
IBPS RRB Clerk Expected Cut Off 2025 : पहले दिन की परीक्षा खत्म, जानिए राज्यवार संभावित कट-ऑफ
IBPS RRB Clerk 2025 की परीक्षा शुरू हो चुकी है। पहले दिन के एग्जाम के बाद जानिए राज्यवार संभावित कट-ऑफ और अगले चरण की तैयारी की रणनीति।
IBPS RRB Clerk 2025 की परीक्षा आज से शुरू हो चुकी है और पहले ही दिन हज़ारों स्टूडेंट्स एग्ज़ाम सेंटर से बाहर निकल चुके हैं। एग्जाम आसान था या टफ? क्या इस बार कट ऑफ ऊपर जाएगा? इन सवालों का जवाब जानने के लिए देशभर के अभ्यर्थी बेताब हैं। उम्मीदवारों का कहना है कि पेपर के लेवल और प्रतियोगिता में बढ़ोतरी को देखते हुए इस बार मेरिट और भी दिलचस्प होने वाली है। अब सबकी नजर है इस बात पर कि कितना स्कोर लेकर कोई उम्मीदवार सुरक्षित माना जा सकता है।
IBPS RRB Clerk Expected Cut Off 2025 (पहले दिन के रुझान)
गौरतलब है कि कि इस तरह की परीक्षा का कट ऑफ का अंदाजा एग्जाम के लेवल, विभिन्न शिफ्टों के फीडबैक और राज्यवार प्रतियोगिता पर निर्भर करेगा। पेपर आसान होता है तो कट ऑफ ऊपर जाता है और पेपर मुश्किल आया तो अंक नीचे भी जा सकते हैं।
IBPS RRB Clerk Expected Cut Off 2025 : राज्यवार संभावित कट ऑफ (जनरल श्रेणी)
- आंध्र प्रदेश: 63 - 69
- असम: 67 - 73
- बिहार: 65 - 71
- छत्तीसगढ़: 59 - 65
- गुजरात: 65 - 71
- हरियाणा: 73 - 79
- हिमाचल प्रदेश: 72 - 78
- झारखंड: 67 - 73
- कर्नाटक: 64 - 71
- केरल: 74 - 80
- मध्य प्रदेश: 68 - 74
- महाराष्ट्र: 69 - 75
- ओडिशा: 72 - 78
- पंजाब: 71 - 77
- राजस्थान: 69 - 75
- तमिलनाडु: 59 - 65
- तेलंगाना: 62 - 68
- त्रिपुरा: 66 - 72
- उत्तर प्रदेश: 68 - 74
- उत्तराखंड: 72 - 78
- पश्चिम बंगाल: 75 - 80
IBPS RRB Clerk Expected Cut Off 2025 : कट ऑफ पर असर डालने वाले बड़े कारक
IBPS RRB Clerk प्रीलिम्स में कट ऑफ सिर्फ अंक का खेल नहीं होता। कई महत्वपूर्ण फैक्टर्स इसमें भूमिका निभाते हैं, जैसे पेपर की कठिनाई यानी जितना आसान पेपर, उतना ऊंचा कट ऑफ होता है। वहीं उम्मीदवारों की संख्या, जिसका मतलब है कि ज्यादा प्रतिस्पर्धा होगी तो कट ऑफ में बढ़ोतरी संभव है। राज्यवार प्रतियोगिता भी कट ऑफ पर असर करेंगे क्योंकि हर राज्य में अलग स्तर की रेस है। वैकेंसी की संख्या भी कट ऑफ पर असर डालती हैं क्योंकि ज्यादा सीटें होगीं को कम कट ऑफ होगा।
IBPS RRB Clerk Expected Cut Off 2025 : अभी क्या करें अभ्यर्थ?
अपने अनुमानित स्कोर को राज्यवार कट ऑफ से मिलाएं और मेरिट के आधार पर मेन्स परीक्षा की रणनीति तय करें। कठिन टॉपिक्स और कमजोर सेक्शन को अभी से सुधारें और पिछले साल के पेपर और माइक्रो टेस्ट सीरीज पर फोकस करें।





