फकीरों सा बिताया जीवन, तनाव से बिगड़ी हालत... फिर भी नहीं मानीं हार 30वीं रैंक के साथ बनीं IAS
ias pari bishnoi success story: आईएएस परी बिश्नोई ने यूपीएससी में सफलता पाने के कड़ी मेहतन की है। उनकी संघर्ष की कहानी काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए खुद को दुनिया से अलग कर लिया था।

ias pari bishnoi success story: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को हमारे देश में सबसे मुश्किल और कड़े इम्तिहानों में से एक माना जाता है। हर साल लाखों नौजवान इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन कामयाबी का स्वाद सिर्फ चंद लोगों को ही चखने को मिलता है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सिर्फ किताबी ज्ञान की नहीं बल्कि अटूट मेहनत, गजब के सब्र, और एकाग्रता की जरूरत होती है। परीक्षा के इस तनाव भरे माहौल में हर साल कुछ ऐसे आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), और आईएफएस (IFS) अफसरों की कहानियां सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं जो तैयारी कर रहे छात्रों के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं होतीं। ऐसी ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाली और जज्बे से भरी कहानी आईएएस परी बिश्नोई (IAS Pari Bishnoi) की है । एक ऐसी लड़की जिसने महज 24 साल की उम्र में यूपीएससी की परीक्षा पास कर कामयाबी के झंडे गाड़े। आइए जानते हैं उनके इस बेमिसाल सफर के बारे में…
बचपन से ही मिला पढ़ाई का शानदार माहौल
परी बिश्नोई मूल रूप से राजस्थान के खूबसूरत शहर बीकानेर से ताल्लुक रखती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका जन्म 26 फरवरी 1996 को हुआ था। उनके परिवार का माहौल हमेशा से ही पढ़ाई लिखाई और अनुशासन वाला रहा। उनके पिता मनीराम बिश्नोई पेशे से एक वकील हैं, जबकि उनकी मां सुशीला बिश्नोई अजमेर में जीआरपी (GRP) थाना अधिकारी के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। जाहिर है घर में जब माता पिता दोनों ही अपने अपने फील्ड में माहिर हों तो बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा बचपन से ही मिलने लगती है। कहा जाता है कि परी अपने बिश्नोई समुदाय की पहली महिला आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अजमेर के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से हासिल की। पढ़ाई में वह शुरू से ही अव्वल रहीं जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 10वीं क्लास में 91 फीसदी और 12वीं में 89 फीसदी नंबर हासिल किए थे।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से लेकर यूपीएससी के अखाड़े तक
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद परी ने अपने सपनों को नई उड़ान देने के लिए देश की राजधानी का रुख किया। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रतिष्ठित इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर विमेन से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उन्होंने अजमेर की एमडीएस यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री भी हासिल की। उनका सफर यहीं नहीं थमा, रिपोर्ट्स बताती हैं कि उन्होंने यूजीसी नेट जैसी कठिन परीक्षा भी पास कर ली थी। लेकिन उनके दिलो दिमाग पर तो सिविल सर्विस का खुमार चढ़ा हुआ था।
वो दौर जब दुनिया से कट गईं परी
सुनने में परी बिश्नोई की कहानी भले ही एकदम सीधी और आसान लगे लेकिन इसके पीछे की हकीकत काफी संघर्षों से भरी रही है। ऐसी खबरें हैं कि साल 2019 में जब उन्होंने अपना पहला अटेम्प्ट दिया तो उन्हें नाकामी का मुंह देखना पड़ा। यह हार उनके लिए किसी गहरे सदमे से कम नहीं थी। निराशा के उस भंवर में फंसकर परी वापस राजस्थान के अपने एक छोटे से शहर में लौट आईं। उन्होंने खुद को एक सन्यासी की तरह दुनिया की नजरों से बिल्कुल अलग कर लिया। न किसी से मिलना, न जुलना बस अपने कमरे में बंद रहना। इस तनाव और डिप्रेशन में वह स्ट्रेस ईटिंग करने लगीं यानी तनाव में बहुत ज्यादा खाना। इस आदत का नतीजा यह हुआ कि उनका वजन 45 किलो तक बढ़ गया। वह न सिर्फ शारीरिक तौर पर बल्कि जज्बाती तौर पर भी खुद को बहुत भारी और टूटा हुआ महसूस करने लगी थीं।
एक फोन कॉल और जिंदगी बदलने की जिद
कहते हैं कि जब इंसान सबसे ज्यादा अंधेरे में होता है तब उसे रोशनी की सबसे ज्यादा कद्र होती है। परी की जिंदगी में भी एक ऐसा ही टर्निंग पॉइंट आया। एक दिन आए एक फोन कॉल ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। उस दिन उन्होंने तय किया कि वह हार नहीं मानेंगी और अपनी जिंदगी की कमान वापस अपने हाथों में लेंगी। परी ने फिर से अपनी कमर कसी। उन्होंने एक अनुशासित जिंदगी जीना शुरू किया। वेटलिफ्टिंग से लेकर जिम में पसीना बहाने तक और एक हेल्दी बैलेंस्ड डाइट से लेकर अपने वर्कआउट शेड्यूल को सख्ती से फॉलो करने तक उन्होंने वो सब किया जिससे उनका खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौट सके।
आखिरकार मिली मंजिल
परी की ये जबरदस्त मेहनत और कभी न हार मानने वाली जिद आखिरकार रंग लाई। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 30 हासिल करते हुए यूपीएससी की परीक्षा पास की और आईएएस अफसर बनने का अपना सपना पूरा कर लिया। इंस्टाग्राम पर अपनी कामयाबी का मंत्र शेयर करते हुए उन्होंने एक बार लिखा था, “असली जीत तब है जब आप हार नहीं मानते। अगर आप अभी किसी अंधेरे वक्त से गुजर रहे हैं तो याद रखिए कि आप फंसे नहीं हैं, आप टूटे नहीं हैं। आप अपनी जिंदगी बदल सकते हैं और यह पूरी तरह आपके अपने हाथों में है।”
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


