मिलिए IAS आर्मस्ट्रांग पामे से... बिना सरकारी मदद के बना दी 100 किमी लंबी सड़क; कैसे किया ये कमाल
मणिपुर के 'मिरेकल मैन' IAS आर्मस्ट्रांग पामे ने बिना सरकारी फंड के 100 किमी लंबी 'पीपुल्स रोड' बनवा दी। आइए जानते हैं उनके संघर्ष और सफलता की कहानी।

हर दूसरे दिन हमें किसी न किसी ऐसे आईएएस या आईपीएस एस्पिरेंट की प्रेरणादायक कहानी सुनने को मिल ही जाती है, जिसने अपनी लगन, कड़ी मेहनत और पक्के इरादे से अपनी मंजिल हासिल की हो। लेकिन कुछ कहानियां सिर्फ परीक्षा पास करने और अफसर बनने तक सीमित नहीं रहतीं वो सिस्टम और समाज की तस्वीर को एक नई दिशा देने का काम करती हैं। आज हम बात करेंगे ऐसे ही एक शानदार और जांबाज इंसान की जिन्हें लोग प्यार और इज्जत से 'मणिपुर का मिरेकल मैन' कहते हैं। हम बात कर रहे हैं आईएएस अधिकारी आर्मस्ट्रांग पामे की। यह वो शख्स हैं जिन्होंने साल 2012 में कुछ ऐसा कर दिखाया, जिसने पूरे देश का ध्यान उनकी तरफ खींच लिया। बिना किसी सरकारी फंड या मदद के इन्होंने अपने इलाके में 100 किलोमीटर लंबी सड़क बनवा दी। आइए जानते हैं इनके इस बेमिसाल सफर के बारे में।
कैसी रही शुरुआती जिंदगी
आर्मस्ट्रांग पामे की जड़ें मणिपुर के बेहद दूर-दराज इलाके से जुड़ी हैं। उनका जन्म मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के तौसेम सब-डिवीजन में पड़ने वाले एक छोटे से गांव इम्पा में हुआ था। उनके बचपन के दिन इसी पहाड़ी इलाके की आबो-हवा में गुजरे। शुरुआती तालीम उन्होंने मणिपुर के ही यूनाइटेड बिल्डर्स स्कूल से हासिल की। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो मेघालय की तरफ रुख कर गए और शिलॉन्ग के मशहूर सेंट एडमंड कॉलेज में दाखिला लिया।
पढ़ाई में वो हमेशा से काफी तेज थे। इसी का नतीजा था कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में अपनी जगह पक्की की। साल 2005 में उन्होंने यहां से फिजिक्स में अपना ग्रेजुएशन (बीए) पूरा किया। दिल्ली आने के बाद उनके अंदर एक बड़ा बदलाव आया और समाज के लिए कुछ बड़ा करने का ख्वाब और भी पुख्ता हो गया।
कैसा था यूपीएससी का सफर
सिविल सेवा की राह कभी आसान नहीं होती, लेकिन पामे के हौसले बुलंद थे। उन्होंने जमकर तैयारी की और अपनी पहली ही कोशिश में साल 2007 में यूपीएससी की इस मुश्किल परीक्षा को क्रैक कर लिया। हालांकि, पहली बार में उन्हें इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस की जगह इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) मिली। उन्हें कस्टम और सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट में तैनाती मिली।
मगर आर्मस्ट्रांग पामे कहां रुकने वाले थे! उनका मकसद तो कुछ और ही था। उन्होंने अपनी नौकरी के साथ-साथ एक बार फिर से इस इम्तिहान की तैयारी शुरू कर दी। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और इस बार उन्होंने वो मुकाम हासिल कर लिया जिसका उन्हें इंतजार था, उन्हें आईएएस का पद मिल गया।
कैसे किया नामुमकिन को मुमकिन
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, साल 2012 में उन्हें उसी तौसेम सब-डिवीजन का एसडीएम बनाकर भेजा गया, जहां वो पले-बढ़े थे। यह इलाका बहुत ही पिछड़ा हुआ था। मणिपुर की इन पहाड़ियों में पक्की सड़क तो दूर, चलने लायक रास्ता भी नहीं था। लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। सरकार की तरफ से सड़क बनाने के लिए कोई भी बजट या फंड पास नहीं हुआ था।
आमतौर पर ऐसे हालात में एक अफसर सरकारी फाइलें आगे बढ़ाता है और इंतजार करता है। लेकिन आर्मस्ट्रांग पामे ने अलग ही रास्ता चुना। उन्होंने तय किया कि वो सरकार के आसरे नहीं बैठेंगे। उन्होंने सीधे सोशल मीडिया का सहारा लिया और लोगों से इस नेक काम के लिए मदद की अपील की। इसके अलावा, उन्होंने वहां के स्थानीय नेताओं, छोटे-बड़े कारोबारियों और आम जनता से चंदा इकट्ठा करना शुरू किया।
क्राउडफंडिंग से बना दी 'पीपुल्स रोड'
उनका यह जज्बा देखकर लोग खुद-ब-खुद उनके इस अभियान से जुड़ते चले गए। किसी ने पैसे दिए, तो किसी ने अपनी मेहनत दी। देखते ही देखते उन्होंने 50 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटा ली। यह पैसा उस 100 किलोमीटर लंबी सड़क को बनाने के लिए काफी था जो मणिपुर को सीधे नागालैंड और असम से जोड़ने वाली थी। साल 2012 में शुरू हुआ यह काम 2014 में पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया। यह सिर्फ एक सड़क नहीं थी, बल्कि इलाके के लोगों के लिए एक नई जिंदगी की शुरुआत थी। इसी वजह से इस सड़क को बिल्कुल 'पीपुल्स रोड' का सही नाम दिया गया यानी लोगों की सड़क। इस रास्ते ने तौसेम के लोगों को एक मोटर चलने लायक रास्ता दिया और उन्हें बाकी दुनिया से जोड़ दिया, जिससे उनकी जिंदगी में एक नई खुशी और उम्मीद की लहर दौड़ गई।
खूब मिला सम्मान
आर्मस्ट्रांग पामे के इस निस्वार्थ काम और बेमिसाल जज्बे को पूरे देश ने सलाम किया। उनके इस बेहतरीन काम के लिए उन्हें कई बड़े सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें प्रतिष्ठित 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्हें राजीव गांधी राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार, इंडियाज डिस्टिंग्विश्ड आईएएस ऑफिसर्स अवॉर्ड और इंडियाज मोस्ट एमिनेंट आईएएस ऑफिसर अवॉर्ड भी मिल चुके हैं।


