रीस्टार्ट हो तो ऐसा, UPSC प्रीलिम्स में लगातार 3 बार फेल, डिप्रेशन की गोलियां खाईं, फिर 7 साल बाद चयन
UPSC Success Story : एनआईटी में बीटेक की थर्ड टॉपर लीजा गर्ग यूपीएससी प्रीलिम्स में लगातार तीन बार फेल हुईं। अन्य सरकारी नौकरी के एग्जाम भी नहीं निकले। फिर चौथे प्रयास में आखिरकार उन्हें 303वीं रैंक मिली।

IAS Liza Garga Success Story: एनआईटी की बीटेक टॉपर लड़की यूपीएससी प्रीलिम्स में लगातार 3 बार फेल हो गई थीं। तनाव इतना कि आधी रात को एंग्जायटी की गोलियां खानी पड़ रही थी। लक्ष्य को पाने की जिद में उन लोगों को भी खो दिया जो जिंदगी में काफी मायने रखते थे। डर था कि भविष्य में जब जब लूजर या नाकामी की मिसालें दी जाएंगी तो उनके किस्से गढ़े जाएंगे। और तो और करियर के 6 साल गैप और सब कुछ त्यागने के बाद जब कुछ नहीं मिला तो अपनी मां की आंखों में देख नहीं पाती थीं। लेकिन चौथे प्रयास में बरसों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और तपस्या का फल मिला। 7 साल लंबा संघर्ष खत्म हुआ और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 303वीं रैंक लाकर देश के लाखों युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा बन गईं। ये कहानी है लीजा गर्ग की जिन्होंने यह साबित कर दिया कि जब आपकी जिद किसी लक्ष्य को पाने की होती है, तो हर ठोकर एक सबक बनकर आपको आपकी मंजिल के और करीब ले जाती है।
बीटेक की थर्ड टॉपर
बीटेक में आमतौर पर 8 सीजीपीए के स्कोर को अच्छा माना जाता है। लेकिन लीजा ने 9.2 सीजीपीए हासिल किया था। एनआईटी सिलचर के बीटेक सिविल इंजीनियरिंग में वह अपने विभाग की थर्ड टॉपर थीं। मूल रूप से असम के गुवाहाटी की रहने वाली लीजा का परिवार काफी पढ़ा लिखा है। उनके पिता जहां डॉक्टर हैं, वहीं मां प्रोफेसर हैं।
प्लेसमेंट होने के बावजूद यूपीएससी की राह चुनी
बीटेक के बाद NHIDCL में प्लेसमेंट होने के बावजूद लीजा ने नौकरी नहीं चुनी। वे GRE देकर अमेरिका/जर्मनी जाकर उच्च शिक्षा पाना चाहती थीं, लेकिन कोविड-19 महामारी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण यह प्लान टालकर उन्होंने यूपीएससी का रास्ता चुना। उन्होंने सोचा कि क्यों न अपने देश में रहकर ही कुछ अच्छा किया जाए।
यूपीएससी में फेल होने में हैट्रिक लगाई
लीजा के लिए यूपीएससी की राह आसान नहीं थी। अनुशासित पढ़ाई और मेहनत के बावजूद उन्हें यूपीएससी की मैराथन यात्रा में एक के बाद एक तगड़े झटके लगे। 2020 में तैयारी शुरू करने के बाद लीजा को लगातार तीन बार प्रीलिम्स में असफलता का सामना करना पड़ा। 2022 के पहले प्रयास में वह कटऑफ से केवल 2 नंबर से चूक गईं। CSAT भी क्वालीफाई नहीं हो सका। 2023 के दूसरे प्रयास में बड़े मार्जिन से प्रीलिम्स अटका। 2024 के तीसरे प्रयास में भी नाकामी हाथ लगी।
आधी रात को डिप्रेशन की गोलियां खाने लगीं
यूपीएससी के अलावा लीजा ने RBI, NABARD, NIACL, IRDAI और बैंक जैसी कई परीक्षाएं दीं, लेकिन हर जगह वे प्रीलिम्स स्टेज पर ही रिजेक्ट होती रहीं। 2019 में ग्रेजुएशन के बाद 6 साल तक कोई नौकरी या परीक्षा न निकलने के कारण वह बेरोजगारी के तनाव से गुजरीं। 2024 के परिणाम के बाद वे लगभग 6 महीने तक गहरे डिप्रेशन में रहीं। उन्हें एंग्जायटी की गोलियां लेनी पड़ीं, नींद का सिस्टम बिगड़ गया। 28-29 वर्ष की उम्र में पहुंचने पर रिश्तेदारों की ओर से शादी का दबाव बनने लगा। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने उनके माता-पिता को ताने दिए कि बेटी को पढ़ाकर क्या फायदा हुआ, आज भी बेरोजगार बैठी है। मां से मिलने दिल्ली नहीं जाती थीं क्योंकि वे अपनी नाकामी के साथ उनका सामना नहीं कर पा रही थीं।
फिर सब कुछ भूलकर जीरो से की शुरुआत
पर लीजा की जिद पक्की थी। उनके यूपीएससी क्रैक करने के जुनून ने सभी नकारात्मकताओं को किनारे कर दिया। ठोकरों को उन्होंने सबक और सीख माना। उन्होंने अपने पुराने सभी बिखरे हुए नोट्स को किनारे कर दिया और जीरो से दोबारा तैयारी शुरू की। उन्होंने खुद को सोशल मीडिया से दूर रखा और नकारात्मक विचार देने वाले लोगों से संपर्क पूरी तरह काट दिया। मन को शांत और केंद्रित रखने के लिए वे नियमित मेडिटेशन (ध्यान) करने लगीं और पॉजिटिव माइंडसेट वाली सेल्फ-हेल्प बुक्स पढ़ने लगीं।
यूपीएससी में 303वीं रैंक, बनी आईआरएस अफसर
लेकिन चौथे प्रयास में बरसों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और तपस्या का फल मिला। 7 साल लंबा संघर्ष खत्म हुआ और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 303वीं रैंक लाकर देश के लाखों युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा बन गईं। उन्हें भारतीय राजस्व सेवा (IRS) मिली। जो लोग पहले ताने मारते थे, वही लोग बधाई देने आने लगे। कहने लगे कि हमें तो पहले से ही पता था कि इसका जरूर निकलेगा।
IAS Liza Garga Success Story: एनआईटी की बीटेक टॉपर लड़की यूपीएससी प्रीलिम्स में लगातार 3 बार फेल हो गई थीं। तनाव इतना कि आधी रात को एंग्जायटी की गोलियां खानी पड़ रही थी। लक्ष्य को पाने की जिद में उन लोगों को भी खो दिया जो जिंदगी में काफी मायने रखते थे। डर था कि भविष्य में जब जब लूजर या नाकामी की मिसालें दी जाएंगी तो उनके किस्से गढ़े जाएंगे। और तो और करियर के 6 साल गैप और सब कुछ त्यागने के बाद जब कुछ नहीं मिला तो अपनी मां की आंखों में देख नहीं पाती थीं। लेकिन चौथे प्रयास में उन्होंने सब कुछ भुला रीस्टार्ट किया और जीरो से शुरुआत की जिससे बरसों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और तपस्या का फल मिला। 7 साल लंबा संघर्ष खत्म हुआ और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 303वीं रैंक लाकर देश के लाखों युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा बन गईं। ये कहानी है लीजा गर्ग की जिन्होंने यह साबित कर दिया कि जब आपकी जिद किसी लक्ष्य को पाने की होती है, तो हर ठोकर एक सबक बनकर आपको आपकी मंजिल के और करीब ले जाती है।
बीटेक की थर्ड टॉपर
बीटेक में आमतौर पर 8 सीजीपीए के स्कोर को अच्छा माना जाता है। लेकिन लीजा ने 9.2 सीजीपीए हासिल किया था। एनआईटी सिलचर के बीटेक सिविल इंजीनियरिंग में वह अपने विभाग की थर्ड टॉपर थीं। मूल रूप से असम के गुवाहाटी की रहने वाली लीजा का परिवार काफी पढ़ा लिखा है। उनके पिता जहां डॉक्टर हैं, वहीं मां प्रोफेसर हैं।
प्लेसमेंट होने के बावजूद यूपीएससी की राह चुनी
बीटेक के बाद NHIDCL में प्लेसमेंट होने के बावजूद लीजा ने नौकरी नहीं चुनी। वे GRE देकर अमेरिका/जर्मनी जाकर उच्च शिक्षा पाना चाहती थीं, लेकिन कोविड-19 महामारी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण यह प्लान टालकर उन्होंने यूपीएससी का रास्ता चुना। उन्होंने सोचा कि क्यों न अपने देश में रहकर ही कुछ अच्छा किया जाए।


