सेना में 20 साल नौकरी, SSB में 12 बार फेल, फिर RAS में 5वीं रैंक, गजब है कमांडो से DSP बने महावीर सिंह की कहानी
इंडियन एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो से डीएसपी बने महावीर सिंह की कहानी लाखों युवाओं को प्रेरणा दे रही है। उन्होंने सेना में 20 साल नौकरी की। इसके बाद आरएएस में धाकड़ रैंक हासिल की।

40 की उम्र पार करने के बाद लोग नौकरी में किसी भी तरह का रिस्क लेने से बचते हैं। सिर पर परिवार की जिम्मेदारियां होती है और बच्चों की पढ़ाई के बढ़ते खर्च की टेंशन भी। लेकिन राजस्थान के महावीर सिंह की कहानी इस आम धारणा और राह से अलग है। उन्होंने सुरक्षित रास्ता छोड़कर जोखिम लेते हुए अपने ख्वाब को चुना। वर्ष 2022 में उन्होंने अपनी सुरक्षित और सम्मानजनक भारतीय वायुसेना की नौकरी छोड़ने का फैसला किया। एयरफोर्स में भी वो कोई आम जवान नहीं थे, बल्कि गरुड़ कमांडो थे। वर्ष 2018 की केरल बाढ़ के दौरान उन्होंने सैकड़ों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा वह करीब 14 महीने तक कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का हिस्सा भी रहे।
इतनी उपलब्धियों के बावजूद उन्होंने 2022 में वायुसेना की सुरक्षित नौकरी छोड़ दी। उनके सामने कोई तय भविष्य नहीं था और न ही इस बात की गारंटी थी कि आगे क्या होगा। आधी उम्र पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की तो कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। ताने तक सुनने पड़े - आखिर में सिक्योरिटी गार्ड ही बनोगे।' नौकरी छोड़ वे कंपीटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रहे थे तो उनके साथ पढ़ने वाले कई अभ्यर्थी उनसे आधी उम्र के थे। उन्होंने AFCAT और सर्विस एंट्री कमिशनिंग के माध्यम से वर्ष 2011 से 2014 के बीच 12 बार SSB एग्जाम दिया। लेकिन हर बार असफलता मिली। बार-बार मिली असफलताएं किसी भी इंसान का आत्मविश्वास तोड़ सकती थीं। लेकिन महावीर सिंह ने हार को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। संघर्ष उनके लिए नया नहीं था। उनका अनुशासन उनकी सबसे बड़ी ताकत था।
पर वीरों की भूमि शेखावाटी से आने वाले महावारी सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और RAS एग्जाम पास करके राजस्थान पुलिस में डिप्टी SP बने। उनके पिता सिंचाई विभाग में 4th ग्रेड कर्मचारी थे। महावीर का बचपन जैलमेर की उन गलियों में बीता जहां से अधिकतर सेना में भर्ती होते थे। यहीं से आर्म्ड फोर्सेज में जाने का जुनून जागा।
2023 में RAS परीक्षा 5वीं रैंक के साथ पास की
उन्होंने अपनी तैयारी की शुरुआत अपनी बेटी की कक्षा 6 की किताबों से की। सुबह 7 बजे लाइब्रेरी पहुंचते और रात 9 - 10 बजे तक किताबों में डूबे रहते। जब कभी निराशा घेरती, तो राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां उन्हें हौसला देतीं - 'सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें आगे क्या होता है।" मेहनत रंग लाई। साल 2023 में उन्होंने राजस्थान की सबसे प्रतिष्ठित आरएएस (RAS) परीक्षा 5वीं रैंक के साथ पास की और असिस्टेंट कमिश्नर (GST) बने। लेकिन यह मंजिल नहीं थी। उन्होंने खुद को यहीं नहीं रोका। साल 2024 में एक्ससर्विसमैन कैटेगरी से ऑल इंडिया रैंक 5 हासिल की। इसके बाद उनकी मेहनत ने वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना उन्होंने देखा था। 15 अक्टूबर 2025 को जारी अंतिम चयन सूची में महावीर सिंह को डिप्टी एसपी का पद अलॉट हुआ। महावीर सिंह के मजबूत इरादे आज लाखों युवाओं और पूर्व सैनिकों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।


