कैसे बनते हैं राष्ट्रपति के ADC , क्या है क्राइटेरिया और योग्यता शर्तें, मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने बताया

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राष्ट्रपति के ADC के प्रतिष्ठित पद की भर्ती कोई सीधी या खुली भर्ती नहीं होती है जिसमें कोई भी आम युवा हिस्सा ले सकता है, बल्कि आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के कमिशंड अधिकारी ही एडीसी बनने के पात्र होते हैं।

Major Rishabh Sambyal
कैसे बनते हैं राष्ट्रपति के ADC, क्या है क्राइटेरिया

How to Become ADC to President of India : सिर्फ 30 साल की उम्र में मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने राष्ट्रपति के एडीसी जैसे प्रतिष्ठित पद से इस्तीफा दे दिया है। नेशनल क्रश कहे जाने वाले मेजर सांब्याल ने समय से पहले आर्मी छोड़कर सबको चौंका दिया है। उनके पद छोड़ने के बाद काफी युवा यह जानना एडीसी पद के बारे में जानना चाहते हैं। राष्ट्रपति के एडीसी (ADC) पद का पूरा नाम होता है - एड डी कैंप टू दिन प्रेजिडेंट ऑफ इंडिया ( Aide-de-Camp to the President of India) । राष्ट्रपति के एडीसी का पद देश का प्रतिष्ठित पद है जो कि बड़ी जिम्मेदारी से भरा होता है। एडीसी हर वक्त हर चीज से राष्ट्रपति की हिफाजत करते हैं। वह हर समय राष्ट्रपति की परछाई बनकर उसके साथ रहता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सिर पर छाता थामे और उन्हें रुमाल देते हुए मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल की वायरल तस्वीरों से एडीसी पद की जिम्मेदारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

एडीसी की सर्विस सिर्फ ड्यूटी नहीं रहती, वह भरोसे का रिश्ता बन जाती है। एक एडीसी का हर कदम सटीक होना चाहिए। उसका हर पल जिम्मेदारी से भरा होता है। उसे राष्ट्रपति के करीब रहकर लगातार सतर्क और तैयार रहना पड़ता है। एडीसी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों, समारोहों, यात्राओं और सैन्य संबंधी दायित्वों में हमेशा उनके साथ रहते हैं।

अब सवाल है कि एडीसी पद पर चयन कैसे होता है -

राज शामानी के साथ पॉडकास्ट में मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया है कि राष्ट्रपति के एडीसी पद पर चयन कैसे होता है। यह कोई सीधी या खुली भर्ती नहीं होती है जिसमें कोई भी आम युवा हिस्सा ले सकता है, बल्कि आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के कमिशंड अधिकारी ही एडीसी बनने के पात्र होते हैं। आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में कमिशंड अधिकारी बनने का प्रमुख जरिए यूपीएससी एनडीए और यूपीएससी सीडीएस भर्ती परीक्षाएं हैं। एनडीए की परीक्षा 12वीं के बाद और सीडीएस की परीक्षा ग्रेजुएशन के बाद दी जा सकती है। सांब्याल एनडीए के जरिए सेना में आए थे।

एडीसी (Aide-de-Camp) के चयन की प्रक्रिया काफी कठिन और लंबी होती है।

1. शॉर्टलिस्टिंग

- तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना, वायु सेना) द्वारा योग्य अधिकारियों की लिस्ट तैयार की जाती है। ये वही अधिकारी होते हैं जो कम से कम 5-7 साल की सेवा पूरी कर चुके होते हैं।

- चयन के लिए सर्विस ब्रैकेट, आयु सीमा, शारीरिक मानक, गोपनीय रिपोर्ट (ACR), मेरिट, कोर्स परफॉर्मेंस और फीडबैक को आधार बनाया जाता है।

- इन मानकों के आधार पर लगभग 20 से 30 अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है।

2. सर्विस हेडक्वार्टर इंटरव्यू

शॉर्टलिस्ट किए गए अधिकारियों का इंटरव्यू उनके संबंधित सर्विस हेडक्वार्टर (जैसे आर्मी हेडक्वार्टर) द्वारा लिया जाता है।

- इसमें अधिकारियों से करंट अफेयर्स (समसामयिक मामले), राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दे और परिस्थितियों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं ताकि यह जांचा जा सके कि वे अचानक आई समस्याओं को कैसे संभालेंगे। इंटरव्यू लेने वाले सैन्य अधिकारी यह जांचते हैं कि कोई विपरीत या कठिन परिस्थिति आने पर एक सामान्य इंसान की प्राकृतिक प्रतिक्रिया और सिचुएशनल अवेयरनेस कैसी रहती है।

- इस इंटरव्यू के आधार पर 5 अधिकारियों को अगले चरण के लिए चुना जाता है।

3. राष्ट्रपति भवन में 14 दिनों तक चलने वाला मैराथन इंटरव्यू

- चुने गए 5 अधिकारियों को दिल्ली बुलाया जाता है, जहां राष्ट्रपति भवन में लगभग 14 दिनों तक रोजाना इंटरव्यू और परख होती है।

- यह साक्षात्कार वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और राष्ट्रपति के सचिव द्वारा लिया जाता है।

- 14 दिनों के दौरान अधिकारी को यह नहीं बताया जाता कि उसमें क्या कमी है। यह देखा जाता है कि साक्षात्कार में अपनी कमी महसूस होने के बाद क्या अधिकारी खुद जिम्मेदारी लेकर रात में (लैपटॉप या इंटरनेट के जरिए) पढ़ाई करके अगले दिन सुधार दिखाता है या नहीं।

- इसमें लंबे समय तक चलने वाले इंटरव्यू (कभी-कभी 2-3 घंटे तक) और मानसिक दबाव डालकर अधिकारी के स्वभाव, दबाव झेलने की क्षमता, ज्ञान की गहराई और तुरंत सीखने की क्षमता की जांच की जाती है।

4. चरित्र और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन

चयन प्रक्रिया के दौरान अधिकारी की पारिवारिक पृष्ठभूमि, स्कूली शिक्षा, अतीत का आचरण और चरित्र जांच कई स्तरों पर की जाती है ताकि किसी भी तरह का सुरक्षा जोखिम न रहे।

5. अंतिम चयन

14 दिनों के गहरी जांच और सभी सुरक्षा जांचों के बाद केवल 1 सबसे उपयुक्त अधिकारी का चयन राष्ट्रपति के एडीसी के रूप में किया जाता है।

साक्षात्कारकर्ता जानबूझकर अधिकारी पर अत्यधिक दबाव बनाते हैं। यदि उन्हें पता चलता है कि अधिकारी किसी विषय (जैसे जियोपॉलिटिक्स) में कमजोर है, तो वे बार-बार उसी विषय से सवाल पूछकर उसे चिढ़ाने और मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश करते हैं ताकि यह देखा जा सके कि वह दबाव में खुद पर नियंत्रण रख पाता है या नहीं।

इंटरव्यू पैनल केवल खूबियां ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार की कमजोरियां ढूंढने की कोशिश करता है; क्योंकि आपातकालीन परिस्थिति में इंसान की कमियां सबसे पहले बाहर आती हैं।

करेंट अफेयर्स की दुरुस्त जानकारी होनी चाहिए

एडीसी हमेशा राष्ट्रपति के साथ तैनात रहते हैं। यदि राष्ट्रपति उनसे अचानक पूछ लें कि देश या दुनिया में क्या चल रहा है, तो एडीसी के पास उसकी सटीक जानकारी तुरंत होनी चाहिए।

- मेजर ऋषभ ने बताया कि इस तैयारी के लिए सभी एडीसी रोज शाम को साथ बैठकर न्यूज देखते हैं, इंटरनेट पर पढ़ते हैं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों से खुद को पूरी तरह अपडेट रखते हैं ताकि राष्ट्रपति को किसी भी जानकारी के लिए इंतजार न करना पड़े।

स्पेशल फोर्सेस में तैनाती के दौरान मेजर ऋषभ अक्सर बिना नेटवर्क और इंटरनेट वाले दूरदराज के इलाकों में रहते थे, इसलिए जियोपॉलिटिक्स और करेंट अफेयर्स उनकी शुरुआती कमजोरी थी।

राष्ट्रपति भवन में 14 दिनों के चयन प्रक्रिया के दौरान जब उन्हें अपनी इस कमी का अहसास हुआ, तो वे रात में इंटरनेट और लैपटॉप से पढ़ाई करके खुद को अपडेट करते थे। चयन समिति ने यह विशेष रूप से आंका कि वे दबाव में खुद से सीखकर सुधार करने की क्षमता रखते हैं या नहीं।

राष्ट्रपति के एडीसी पद पर रहते हुए शादी नहीं की जा सकती

ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताय कि राष्ट्रपति के एडीसी पद पर रहते हुए शादी नहीं की जा सकती। परिवार से दूर रहना पड़ता है और सामान्य जीवन जीने का मौका नहीं मिलता। यानी पर्सनल लाइफ का त्याग करना पड़ता है। अकसर अकेलापन फील होता है।

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


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तमाम तरह के करियर, स्कूल एजुकेशन, हायर एजुकेशन, भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं, एंट्रेंस एग्जाम, नौकरी के लिए जरूरी स्किल्स एवं बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर पंकज के पास गहरी समझ है। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के कई टॉपरों के इंटरव्यू किए हैं। उनकी लिखी सक्सेस स्टोरीज युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रेरित करती रही हैं। पंकज का मानना है कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता ही पत्रकारिता की असली ताकत है। उनका लक्ष्य स्कूली छात्रों व बेहतर करियर एवं सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आसान भाषा में सटीक, तेज और भरोसेमंद जानकारी देना है।


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