हिंदी दिवस पर 10 सरल लाइनें, भाषण और निबंध में आएंगी काम

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Hindi Diwas 10 Lines : हर साल 14 सितंबर को देश हिंदी दिवस मनाता है। हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर अगर आप किसी भाषण या निबंध प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रहे हैं तो नीचे दी गईं 10 लाइनों को शामिल कर सकते हैं।

hindi diwas 10 lines
हिंदी दिवस पर 10 सरल लाइनें

Hindi Diwas 2025 Speech , Essay : हर साल 14 सितंबर को देश हिंदी दिवस मनाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी देश भर के अमूमन हर स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालयों में हिंदी दिवस ( Hindi Diwas ) बेहद उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। बहुत से सरकारी कार्यालयों में 1 से 15 सितंबर को हिंदी पखवाड़े के तौर पर मनाया जाता है। 14 सितंबर का दिन हर भारतवासी के लिए गर्व का दिन है। ये पूरे देश को एक रखने वाली भाषा हिंदी का दिन है। सांस्कृतिक विविधताओं से भरे देश भारत में हिंदी दिवस के दिन की अहमियत बहुत ज्यादा है। कोई भी हिन्दुस्तानी जहां भी हो, दूसरे हिंदुस्तानी से हिंदी भाषा के जरिए ही अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करता है। हिंदी देश में सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। आज देश का शायद ही ऐसा कोई हिस्सा हो जहां हिंदी सहजता से बोली या समझी ना जाती हो। हिंदी केवल हमारी मातृभाषा व राजभाषा ही नहीं बल्कि यह राष्ट्रीय अस्मिता और गौरव का प्रतीक है।

हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर अगर आप किसी भाषण या निबंध प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रहे हैं तो नीचे दी गईं 10 लाइनों को शामिल कर सकते हैं।

1. 14 सितंबर के दिन संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया था। बाद में इस ऐतिहासिक दिन की याद में सरकार ने 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया। पहला आधिकारिक हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था।

2. 14 सितंबर का दिन हिंदी भाषा को समर्पित है। भारत विविधताओं से भरा देश है। हिंदी भाषा भारत के अलग अलग राज्यों के अलग अलग धर्मों, जातियों, संस्कृति, वेशभूषा व खान-पान वाले लोगों को एकता के सूत्र में बांधती है। देश को एक रखती है। इतना ही नहीं हिंदी विदेशों में बसे भारतीयों को आपस में जोड़ने का काम भी करती है। हिंदी अलग अलग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के दिलों की दूरियों की मिटाती है। हिंदी इन सभी लोगों की भावनाओं को जाहिर करने का सबसे सरल व सहज तरीका है। हिंदी की अहमियत और इसके सम्मान के लिए 14 सितंबर को हिंदी दिवस हर साल मनाया जाता है। इस दिन का मकसद हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना है।

3. दुनिया भर में बसे भारतीयों को भावनात्मक रूप से एक साथ जोड़ने का काम भी हिंदी ही करती है। इसी अहमियत को ध्यान में रखकर हर साल 10 जनवरी का दिन विश्व हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। वर्ष 2006 में इसकी शुरुआत हुई थी।

4. मंदारिन, इंग्लिश के बाद विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा हिंदी है। हिंदी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से पता चलता है कि भारत के अलावा मॉरीशस, फिलीपींस, नेपाल, फिजी, गुयाना, सुरिनाम, त्रिनिदाद, तिब्बत और पाकिस्तान में कुछ परिवर्तनों के साथ ही सही लेकिन हिंदी बोली और समझी जाती है। दुनिया के अनेक देशों में हिंदी पढ़ाई भी जाती है। विश्वविद्यालयों में उसके लिए अध्यापन केंद्र खुले हुए हैं।

5. दुनिया की सबसे प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (शब्दकोश) हर साल भारतीय शब्दों को जगह दे रही है। इनमें हिंदी के शब्दों की भरमार है।

6. हमारे संविधान में भाग 17 के अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा को लेकर विशेष प्रावधान हैं। अनुच्छेद 343 (1)अनुच्छेद में कहा गया है कि भारत संघ की भाषा देवनागरी लिपी में हिंदी होगी।

7. भारत में डॉक्टरी और इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब हिंदी में होने लगी है। एमबीबीएस और बीटेक की किताबें हिंदी में आने लगी हैं। सोशल मीडिया पर हिंदी पढ़ने व लिखने का उपयोग बढ़ता जा रहा है। डिजिटल युग में भी हिंदी का दायरा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। इंटरनेट पर हिंदी की धमक बढ़ती जा रही है। ईकॉमर्स की दुनिया में भी अधिक से अधिक हिंदी का प्रयोग किया जाने लगा है। दर्शन कला, संस्कृति, फिल्म, टेलीविजन और संचार के तमाम इलाकों में उसका दायरा बढ़ रहा है। अदालती कार्यवाही व डॉक्टरों के पर्चे हिंदी में आने की बात हो रही है।

8. यह भी जानना जरूरी है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं बल्कि राजभाषा है। इसे राजभाषा का दर्ज मिला है न कि राष्ट्रभाषा का। राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा कहा था। वह चाहते थे कि हिंदी राष्ट्रभाषा बने। आजादी मिलने के बाद लंबे विचार-विमर्श के बाद आखिरकार 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा बनाने का फैसला लिया गया। दरअसल हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने के विचार से बहुत से लोग खुश नहीं थे। कइयों का कहना था कि सबको हिंदी ही बोलनी है तो आजादी के क्या मायने रह जाएंगे। 1960 के दशक में गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हुई कई हिंसक झड़पों के बाद देश की संसद ने एक राष्ट्रभाषा के विचार को त्याग दिया। यही वजह है कि हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी।

9. यह भी सच है कि आजादी के बाद केन्द्र सरकार के कामकाज में हिंदी का काफी कम प्रसार हो सका है। व्यवहारिक रूप से आज भी राजभाषा का स्थान अंग्रेजी के कब्जे में हैं। बच्चों पर अंग्रेजी लादी जा रही है क्योंकि उसे रोजगार की ज्यादा संभावनाओं से जोड़ दिया गया है।

10. हिंदी को बढ़ावा देना है तो इसे रोजमर्रा के जीवन में शामिल करना होगा। हिंदी बोलें, पढ़ें, सुनें। हिंदी सिखाएं। अधिक से अधिक प्रयोग में लाने का संकल्प लें। 14 सितम्बर को ही नहीं, साल के हर दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाये जाने की दरकार है।

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

Pankaj Vijay

पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


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