झमाझम बारिश, हिमाचल में ऑरेंज अलर्ट; स्कूल-कॉलेज बंद करने के फैसले पर सरकार का क्या आदेश

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हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते मौसम विभाग ने 23 जुलाई तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, वहीं प्रशासन ने स्कूलों को बंद करने का फैसला जिलाधिकारियों पर छोड़ दिया है।

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पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में इन दिनों कुदरत का मिजाज काफी तल्ख नजर आ रहा है। आसमान से बरसती आफत ने आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते स्थिति खराब हो रही है। पहाड़ों के दरकने का खौफ लोगों के चेहरों पर साफ देखा जा सकता है। हालात की नजाकत को समझते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गए हैं, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। छात्रों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती फिक्र के बीच, प्रशासन ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। सरकार नहीं चाहती कि मौसम की इस मार का खामियाजा किसी भी मासूम छात्र को अपनी जान जोखिम में डालकर चुकाना पड़े। बारिश और मौशम के मौजूदा हालात को लेकर सरकार का क्या रुख है आइए जानते हैं।

डीसी के हाथों में फैसले की डोर

हिमाचल के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने हालात की नजाकत को समझते हुए एक बेहद व्यावहारिक फैसला लिया है। अब स्कूलों और कॉलेजों की छुट्टी का जिम्मा पूरी तरह से जिलों के उपायुक्तों (डिप्टी कमिश्नर) पर छोड़ दिया गया है। अक्सर होता यह था कि राजधानी शिमला से पूरे राज्य के लिए एक ही फरमान जारी कर दिया जाता था, जबकि हकीकत में हर जिले के हालात अलग होते हैं। कांगड़ा और चंबा में जहां मूसलाधार बारिश ने तबाही मचाई हुई है, वहीं मुमकिन है कि किसी और जिले में मौसम थोड़ा मेहरबान हो। ऐसे में डीसी अपने-अपने इलाकों की भौगोलिक स्थिति, रास्तों की हालत और खतरे के स्तर को देखते हुए फौरन यह तय करेंगे कि उनके इलाके में स्कूल-कॉलेज खोले जाएं या उन्हें कुछ दिनों के लिए ताला लगा दिया जाए। इस फैसले से स्थानीय स्तर पर तेजी से कदम उठाने में बड़ी मदद मिलेगी।

दूर-दराज से आने वाले कॉलेज छात्रों की जान सांसत में

स्कूलों की तरह ही कॉलेजों में पढ़ने वाले नौजवानों की मुश्किलें भी कम नहीं हैं। हिमाचल में अक्सर छात्रों को अपने कॉलेज पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का पहाड़ी सफर तय करना पड़ता है। कई बार तो उन्हें उफनते बरसाती नालों और खस्ताहाल पुलों को पार करके जाना होता है। हाल ही में चंबा के जोत इलाके में 109 मिलीमीटर और कांगड़ा में 77.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इन इलाकों में कई रास्ते लैंडस्लाइड की वजह से बंद पड़े हैं। ऐसे में अगर कॉलेज खुले भी रहते हैं, तो दूर-दराज के गांवों से आने वाले छात्रों के लिए वहां पहुंचना किसी बुरे सपने से कम नहीं है। प्रशासन ने साफ कहा है कि जब तक रास्ते पूरी तरह से सुरक्षित न हो जाएं, छात्रों को किसी भी तरह का जोखिम उठाने की जरूरत नहीं है।

क्या ऑनलाइन क्लासेस बनेंगी इस आफत का तोड़?

लगातार हो रही बारिश और 23 जुलाई तक जारी 'ऑरेंज अलर्ट' को देखते हुए पढ़ाई के नुकसान की चिंता भी सताने लगी है। 19 से 23 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। ऐसे में कई शिक्षा संस्थान एक बार फिर ऑनलाइन क्लासेस की तरफ रुख करने का मन बना रहे हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई का जो बुनियादी ढांचा तैयार हुआ था, वह आज इस प्राकृतिक आपदा के वक्त काफी काम आ सकता है। जिन इलाकों में इंटरनेट और बिजली की सुविधा बहाल है, वहां स्कूल और कॉलेज प्रशासन छात्रों को घरों में सुरक्षित रहकर पढ़ाई जारी रखने की सलाह दे रहे हैं।

अभिभावकों और छात्रों के लिए खास एडवाइजरी

सरकार की तरफ से आम जनता और खास तौर पर छात्रों के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी की गई है। प्रशासन ने अपील की है कि किसी भी कीमत पर नदी-नालों के करीब न जाएं। अगर आपके इलाके में स्कूल या कॉलेज खुला भी है, लेकिन आपको रास्ता सुरक्षित नहीं लग रहा, तो बच्चों को भेजने से परहेज करें। जिला प्रशासन और मौसम विभाग के अपडेट्स पर लगातार नजर बनाए रखें। पहाड़ी रास्तों पर बेवजह सफर करने से बचें, क्योंकि लैंडस्लाइड का खतरा सबसे ज्यादा इन्हीं दिनों में होता है। 2023 की मानसूनी त्रासदियों से सबक लेते हुए, इस बार सरकार कोई भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। फिलहाल प्रशासन की पहली और आखिरी प्राथमिकता यही है कि कुदरत के इस गुस्से से हर एक छात्र को महफूज रखा जाए।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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