Himachal Govt Schools: हिमाचल के सरकारी स्कूलों में अब दो शिफ्टों में पढ़ेंगे बच्चे, 'शिफ्ट सिस्टम' लागू
Himachal Govt Schools: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा निदेशालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य के जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या ज्यादा और कमरों की कमी है, उन्हें दो शिफ्टों में चलाने की अनुमति दे दी गई है।

Himachal Govt Schools: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस साल शिक्षा के स्तर में सुधार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पैटर्न लागू होने के बाद छात्रों के दाखिलों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। इस बढ़ती संख्या ने स्कूलों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है—जगह की कमी। इसी समस्या को देखते हुए हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा निदेशालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य के जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या ज्यादा और कमरों की कमी है, उन्हें दो शिफ्टों में चलाने की अनुमति दे दी गई है।
शिक्षा निदेशक आशीष कोहली द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, यह व्यवस्था फिलहाल एक अस्थाई समाधान के रूप में लागू की गई है ताकि किसी भी योग्य छात्र को एडमिशन से वंचित न रहना पड़े।
क्यों पड़ी दो शिफ्टों की जरूरत?
हिमाचल सरकार ने पिछले साल राज्य के 100 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इसके बाद इन स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई।
इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी: कई स्कूलों के पास अतिरिक्त सेक्शन बनाने के लिए कमरे उपलब्ध नहीं हैं।
सीबीएसई के कड़े नियम: सीबीएसई के नियमों (SARAS 6.0 और OASIS) के तहत एक सेक्शन में छात्रों की संख्या सीमित रखनी होती है। दाखिलों के दबाव के कारण स्कूल इन नियमों का पालन करने में कठिनाई महसूस कर रहे थे।
शिक्षकों की मांग: 25 फरवरी को हुई एक वर्चुअल बैठक में स्कूल प्रिंसिपलों ने विभाग को बताया कि जगह न होने के कारण वे नए छात्रों को प्रवेश नहीं दे पा रहे हैं, जिसके बाद 27 फरवरी की विभागीय समीक्षा बैठक में दो शिफ्टों का विकल्प चुना गया।
कैसे चलेंगी कक्षाएं? (नया टाइम टेबल)
शिक्षा निदेशालय ने शिफ्टों के संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
जूनियर और सीनियर क्लास: सामान्य तौर पर, छोटी कक्षाओं (प्राइमरी/मिडिल) की पढ़ाई सुबह की शिफ्ट में होगी। वहीं, वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं (9वीं से 12वीं) के लिए शाम की शिफ्ट आयोजित की जाएगी।
समय का अंतराल: दोनों शिफ्टों के बीच पर्याप्त समय रखा जाएगा ताकि छात्र सुरक्षा, सफाई और अनुशासन के साथ परिसर का उपयोग कर सकें।
प्रिंसिपल की जिम्मेदारी: स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) के साथ मिलकर स्कूल के प्रिंसिपल खुद अपनी सुविधा के अनुसार शिफ्टों का समय तय करेंगे।
अन्य विकल्प भी खुले हैं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि दो शिफ्टों का विकल्प केवल अंतिम उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यदि पास के किसी सरकारी भवन या बंद हो चुके स्कूल की इमारत खाली है, तो उसका उपयोग अतिरिक्त कक्षाओं के लिए किया जा सकता है। साथ ही, अभिभावकों और छात्रों की काउंसलिंग की जाएगी कि वे अपनी सुविधा के अनुसार पास के अन्य सरकारी स्कूलों में भी दाखिला ले सकते हैं।
यह फैसला हिमाचल प्रदेश के ‘स्कूल क्लस्टर सिस्टम’और नई शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसाधनों की कमी किसी भी बच्चे की पढ़ाई में बाधा न बने।



