हार्वर्ड-स्टैनफोर्ड की डिग्री भी नहीं दिला पा रही नौकरी, लेनी पड़ रही थेरेपी; AI रिजेक्ट कर रहा रिज्यूमे

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दुनिया के कई बड़े एजुकेशन और टेक हब में आज हालात ऐसे हैं कि प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़े छात्र भी नौकरी के लिए लंबा इंतजार कर रहे हैं या कहें कि दर-दर भटक रहे हैं। इतना ही नहीं, नौकरी नही मिलने कि वजह से से छात्र करियर थेरेपी भी लेने पर मजबूर हो रहे हैं।

हार्वर्ड-स्टैनफोर्ड की डिग्री भी नहीं दिला पा रही नौकरी, लेनी पड़ रही थेरेपी; AI रिजेक्ट कर रहा रिज्यूमे

आईआईटी, आईआईएम जैसी परीक्षाओं को भारत में सफलता की सबसे बड़ी सीढ़ी माना जाता है। अक्सर खबरों में करोड़ों के पैकेज, बड़ी कंपनियों में नौकरी और शानदार करियर की कहानियां सुर्खियां बनती हैं। लेकिन इन चमकदार किस्सों के पीछे एक ऐसी सच्चाई भी है, जिस पर कम ही चर्चा होती है। दुनिया के कई बड़े एजुकेशन और टेक हब में आज हालात ऐसे हैं कि प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़े छात्र भी नौकरी के लिए लंबा इंतजार कर रहे हैं या कहें कि दर-दर भटक रहे हैं। इतना ही नहीं, नौकरी नही मिलने कि वजह से से छात्र करियर थेरेपी भी लेने पर मजबूर हो रहे हैं। जी हां, मैं ये बात अपने मन से नहीं बता रहा हूं, बल्कि फ्रांस के मशहूर अखबार 'Le Monde' में छपी एक विस्तृत रिपोर्ट के इस बात का जिक्र किया गया है। यह उन छात्रों के लिए चिंता का विषय है, जो आईआईटी या आईआईएम में एडमिशन लेने के लिए महंगी कोचिंगों से पढ़ाई करते हैं।

स्टैनफोर्ड और हार्वर्ड के छात्र नौकरी के लिए परेशान

आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के अखबार Le Monde में प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी स्टैनफोर्ड और हार्वर्ड से पढ़े छात्र भी आज नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता प्रभाव बताया गया है। AI के बढ़ते इस्तेमाल से नौकरी का बाजार तेजी से बदल रहा है और महंगी डिग्री होने के बावजूद रोजगार की गारंटी पहले जैसी नहीं रही। हालात ऐसे हैं कि लगातार रिजेक्शन और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता के कारण कई छात्र अब 'करियर थेरेपी' का सहारा लेने लगे हैं।

AI ने किया रिज्यूम रिजेक्ट

रिपोर्ट में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से इंग्लिश और लिंग्विस्टिक्स की पढ़ाई करने वाली 23 वर्षीय एलन यांग की कहानी का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पढ़ाई के दौरान एलन ने कई टेक कंपनियों में मार्केटिंग से जुड़ा काम किए थे। उन्हें उम्मीद थी कि स्टैनफोर्ड जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी की डिग्री मिलने के बाद अच्छी नौकरी आसानी से मिल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एलन ने नौकरी के लिए सैकड़ों कंपनियों में आवेदन किए, फिर भी उन्हें एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं मिला। ज्यादातर जगहों से उन्हें AI के जरिए भेजे गए रिजेक्शन ईमेल मिले, यानी उनके आवेदन का मूल्यांकन इंसानों की बजाय सॉफ्टवेयर ने किया।

प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली, तो इसका बुरा असर छात्रों के मानसिक पर पड़ा। एलन ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि अपनी जिंदगी में पहली बार मुझे थेरेपिस्ट के पास जाना पड़ा। इतना ही नहीं ये बात अपने पैरेंट्स को भी बताने में उन्हें शर्म महसूस हुआ और डर भी लगा।

क्यों घट रही हैं नौकरियां?

AI की बढ़ती भूमिका:
टेक कंपनियां तेजी से AI टूल्स अपना रही हैं। पहले जो काम फ्रेशर्स और एंट्री-लेवल कर्मचारियों से कराए जाते थे, जैसे कोडिंग, कंटेंट, मार्केटिंग और डेटा से जुड़े कई काम, अब उनमें से कई AI के जरिए पूरे किए जा रहे हैं। इससे शुरुआती स्तर की नौकरियों की मांग कम हुई है।

नई भर्तियां भी कम हुईं

सैन फ्रांसिस्को और सिलिकॉन वैली की कई बड़ी टेक कंपनियों ने नई भर्तियां धीमी कर दी हैं। कुछ कंपनियों ने भर्ती पर रोक लगा दी है, जबकि कई जगह लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी भी की जा रही है।

भारतीय छात्रों के लिए क्या सबक है?

आज सिर्फ बड़ी यूनिवर्सिटी की डिग्री या अच्छा कॉलेज ही नौकरी की गारंटी नहीं है। छात्रों को AI के साथ काम करने की क्षमता, नई तकनीकी स्किल्स, इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट्स और लगातार सीखने की आदत पर भी ध्यान देना होगा। बदलते जॉब मार्केट में वही उम्मीदवार आगे रहेंगे, जो समय के साथ खुद को अपडेट करते रहेंगे।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal

संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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