महज 10 साल की उम्र में छोड़ा स्कूल, पढ़े वेद, फिर JEE पास कर बने ISRO वैज्ञानिक
केरल के गोविंद कृष्णन एम ने कक्षा 4 के बाद त्रिशूर के गुरुकुल में वेद पढ़े, फिर मुख्यधारा में लौटे। कोचिंग के साथ जेईई एडवांस्ड क्लियर किया। आईआईएसटी से BTech किया और ISRO में साइंटिस्ट चुने गए।

रेगुलर स्कूल जाना छोड़कर एक छात्र ने वेद पढ़े। आगे चलकर कुछ साल बाद वह इसरो का वैज्ञानिक बन गया। केरल के गोविंद कृष्णन एम के करियर की यह यात्रा किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। जिस उम्र में बच्चे स्कूल की किताबों और खेलकूद में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में गोविंद कृष्णन एम ने एक बिल्कुल अलग रास्ता चुना। उन्होंने कक्षा 4 के बाद सिर्फ 10 साल की उम्र में रेगुलर स्कूल छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने गुरुकुल में वेदों का अध्ययन शुरू कर दिया। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि पारंपरिक शिक्षा की राह पर चलने वाला यह बालक एक दिन देश के अंतरिक्ष संगठन ISRO में वैज्ञानिक बनेगा।
गोविंद कृष्णन एम का सफर उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो कभी-कभी अपनी शिक्षा या करियर को लेकर उलझन में पड़ जाते हैं। कन्नूर के रहने वाले गोविंद कृष्णन एम की कहानी बताती है कि सीखने के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन लगन और मेहनत से अपने लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। उनकी जिंदगी में वेदों की शिक्षा, आधुनिक विज्ञान और इंजीनियरिंग का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।
कक्षा 4 के बाद रेगुलर स्कूल छोड़ा, गुरुकुल गए
गोविंद ने साल 2011 में केंद्रीय विद्यालय, पय्यानूर से कक्षा 4 की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद करीब 10 साल की उम्र में उन्होंने रेगुलर स्कूली शिक्षा से अलग होने का फैसला किया। वे केरल के त्रिशूर स्थित ब्रह्मस्वम मठ के गुरुकुल में वेदों का अध्ययन करने पहुंच गए। यह फैसला उनके लिए एक बिल्कुल नई दुनिया में कदम रखने जैसा था। यहां पढ़ाई का तरीका स्कूलों से काफी अलग था। गोविंद ने यजुर्वेद का अध्ययन किया, जिसमें मंत्रों को सुनकर सीखना, उनका बार-बार उच्चारण करना और उन्हें याद रखना बेहद अहम था।
सुबह 5 बजे उठते थे
गुरुकुल में उनका दिन सुबह करीब 5 बजे शुरू होता था। वे नियमित अभ्यास और अनुशासन के साथ वेदों की शिक्षा हासिल करते थे। एजुकेशन टाइम्स की खबर के मुताबिक शुरुआत में उन्होंने पांच साल के वैदिक अध्ययन कार्यक्रम में दाखिला लिया था, लेकिन अपनी मेहनत और निरंतर अभ्यास के दम पर इसे चार साल में पूरा कर लिया। उनके बैच में कुल पांच विद्यार्थी थे और सभी यजुर्वेद का अध्ययन कर रहे थे। इस अनुभव ने गोविंद को पारंपरिक भारतीय ज्ञान परंपरा से गहराई से जुड़ने का अवसर दिया।
फिर मुख्यधारा के स्कूल एजुकेशन सिस्टम में की वापसी
वेदों का अध्ययन पूरा करने के बाद गोविंद ने आधुनिक शिक्षा की ओर भी कदम बढ़ाया। उन्होंने पारंपरिक अध्ययन के साथ-साथ मुख्यधारा की पढ़ाई जारी रखी और आगे की स्कूली शिक्षा पूरी की। कक्षा 8 से 10 तक उन्होंने नाडक्कावु स्थित विवेकादयम बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक के मूडबिद्री स्थित अल्वा कॉलेज से 12वीं पास की।
जेईई मेन (JEE Main) और जेईई एडवांस्ड (Advanced) पास कर पहुंचे IIST
गोविंद ने कड़ी मेहनत की देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम जेईई मेन और एडवांस्ड दोनों क्रैक कर डाले। इसके बाद साल 2021 में उन्हें तिरुवनंतपुरम स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST) में दाखिला मिला। यह संस्थान अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में पढ़ाई के लिए देश भर में मशहूर है। यहां गोविंद ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की।
ISRO में बने वैज्ञानिक
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद गोविंद ने इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड (ICRB) की भर्ती में सफलता हासिल की। इसके बाद उनका चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC), तिरुवनंतपुरम में वैज्ञानिक के पद पर हुआ। VSSC भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए लॉन्च व्हीकल और उनसे जुड़ी तकनीक विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
गोविंद की कहानी में खास बात सिर्फ यह नहीं है कि वे ISRO में वैज्ञानिक बने। खास बात यह है कि उन्होंने सीखने के लिए एक अलग रास्ता चुना, पारंपरिक शिक्षा से दोबारा जुड़कर आधुनिक विज्ञान की पढ़ाई की और फिर अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र तक पहुंचे। वह सिखाते हैं कि ज्ञान हासिल करने की जिज्ञासा बनी रहे, तो जीवन में आगे बढ़ने के कई रास्ते खुल सकते हैं।


