ITI Training: ITI छात्रों के लिए अब 150 घंटे की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग हुई जरूरी, नौकरी मिलना होगा आसान
ITI Training: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने अब आईटीआई के सभी ट्रेनियों के लिए 150 घंटे की ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) या प्रोजेक्ट वर्क को अनिवार्य कर दिया है।

ITI Training: केंद्र सरकार ने देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में पढ़ रहे लाखों छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने अब आईटीआई के सभी ट्रेनियों के लिए 150 घंटे की ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) या प्रोजेक्ट वर्क को अनिवार्य कर दिया है। इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक औद्योगिक माहौल के लिए तैयार करना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अक्सर देखा गया है कि आईटीआई से कोर्स पूरा करने के बाद भी छात्रों को कंपनियों में काम शुरू करने में कठिनाई होती है क्योंकि उनके पास प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस की कमी होती है। सरकार का मानना है कि इस अनिवार्य ट्रेनिंग से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार खुद को ढाल पाएंगे।
क्या हैं नए नियम?
मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह 150 घंटे की ट्रेनिंग अब आईटीआई कोर्सेज का एक अभिन्न हिस्सा होगी। इसके बिना छात्रों का प्रमाणपत्र पूरा नहीं माना जाएगा।
ट्रेनिंग का स्वरूप: छात्र किसी भी रजिस्टर्ड उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) या सेवा क्षेत्र की इकाई में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर सकते हैं।
प्रोजेक्ट वर्क का विकल्प: यदि किसी कारणवश छात्र को बाहरी उद्योग में ट्रेनिंग नहीं मिल पाती है, तो उन्हें संस्थान की देखरेख में एक 'प्रोजेक्ट वर्क' पूरा करना होगा।
रिकॉर्ड रखना अनिवार्य: प्रत्येक छात्र को अपनी ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई बातों का एक 'प्रशिक्षण रिकॉर्ड' या 'लॉग बुक' बनाए रखनी होगी, जिस पर संबंधित उद्योग के सुपरवाइजर के सिग्नेचर होंगे।
छात्रों को कैसे होगा फायदा?
इस कदम से आईटीआई छात्रों के लिए प्लेसमेंट के अवसर काफी बढ़ जाएंगे।
उद्योग की पहचान: ट्रेनिंग के दौरान छात्र यह समझ पाएंगे कि आधुनिक मशीनें और तकनीकें फैक्ट्रियों में कैसे काम करती हैं।
सॉफ्ट स्किल्स: कार्यस्थल पर टाइम मैनेजमेंट, टीम वर्क और अनुशासन जैसे गुण छात्र स्वाभाविक रूप से सीख पाएंगे।
करियर की शुरुआत: कई मामलों में कंपनियां ट्रेनिंग के दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सीधे नौकरी दे देती हैं।
संस्थानों की भूमिका
अब आईटीआई संस्थानों को स्थानीय उद्योगों के साथ तालमेल बिठाना होगा। प्रधानाचार्यों और प्लेसमेंट अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे यह सुनिश्चित करें कि हर छात्र को उसकी ट्रेड (जैसे फिटर, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर आदि) के अनुसार सही जगह ट्रेनिंग मिले। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस ट्रेनिंग की निगरानी 'डिजीटल प्लेटफॉर्म' के माध्यम से की जाएगी ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।



