न IIT की डिग्री, न कोडिंग का झंझट... गूगल की कर्मचारी का दावा- ऐसे मिलती है दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी में नौकरी
गूगल कर्मचारी नेहा शर्मा का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने बताया कि गूगल में नौकरी पाने के लिए सिर्फ कोडिंग या बड़ी डिग्री नहीं बल्कि स्किल्स चाहिए।

गूगल (Google) का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में क्या आता है? कोडिंग, ढेर सारे कंप्यूटर, और कुछ जीनियस लोग जो दिन-रात कीबोर्ड पर उंगलियां दौड़ा रहे हों। ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि अगर आपको गूगल जैसी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी में नौकरी पानी है, तो आपको कोडिंग का उस्ताद होना ही चाहिए। साथ ही समाज में यह भी मान लिया जाता है कि आपके पास IIT या IIM जैसी किसी बड़ी और नामी यूनिवर्सिटी की डिग्री होनी ही चाहिए। लेकिन क्या वाकई हकीकत यही है? हाल ही में इंस्टाग्राम पर नेहा शर्मा नाम से गूगल की एक कर्मचारी होने का दावा करने वाली महिला ने बताया कि गूगल में कैसे नौकरी मिलती। महिला का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो की शुरुआत एक बहुत ही आम बातचीत से होती है। एक शख्स नेहा से पूछता है, "क्या आप गूगल में काम करने से जुड़े कुछ मिथकों को दूर कर सकती हैं?" नेहा मुस्कुराते हुए जवाब देती हैं, "हां, बिल्कुल पूछिए।" इसके बाद जो बातचीत होती है उसे जानने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग हैरान हैं।
क्या गूगल सिर्फ टेक रोल्स के लिए हायर करता है?
सबसे पहला और सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या गूगल में सिर्फ टेक यानी तकनीकी पदों पर ही नौकरियां मिलती हैं? इसका जवाब देते हुए नेहा ने इस बात को पूरी तरह से नकार दिया। उन्होंने कहा, "बिल्कुल नहीं, यह सबसे बड़ा झूठ है। गूगल कई नॉन-टेक रोल्स के लिए भी लोगों को नौकरी पर रखता है।" उन्होंने आगे बताया कि कंपनी में स्ट्रैटेजी, मार्केटिंग, सेल्स ऑपरेशंस और ऐसे ही कई अन्य विभागों में भी बंपर हायरिंग होती है। उन्होंने अपने वीडियो के कैप्शन में भी इस बात पर जोर देते हुए बहुत ही शानदार बात लिखी। नेहा ने लिखा, "जब लोग गूगल का नाम सुनते हैं, तो सबसे पहले उनके दिमाग में कोडिंग आती है। लेकिन जरा सोचिए, अगर हर कोई सिर्फ कोड ही करेगा, तो हमारे बनाए गए उस कोड या प्रोडक्ट को बाजार में बेचेगा कौन?"
क्या गूगल को सिर्फ 'परफेक्ट' लोगों की तलाश है?
इंटरव्यू देने जाने वाला हर शख्स यही सोचता है कि उसे हर सवाल का एकदम सही और रटा-रटाया जवाब देना है। लोगों में यह डर होता है कि गूगल जैसी कंपनी में कोई गलती बर्दाश्त नहीं की जाती और वे सिर्फ 'परफेक्ट' लोगों को ही काम पर रखते हैं। इस सवाल के जवाब में नेहा शर्मा ने कहा, "नहीं, वे बिल्कुल भी परफेक्ट लोगों की तलाश में नहीं रहते। कंपनी को ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो स्मार्ट तरीके से सोच सकें, मुश्किल हालातों में समस्याओं को सुलझा सकें और नई चीजों को तेजी से सीख सकें।"
यहां देखें वीडियो
क्या सिर्फ IIT और IIM वालों को ही मिलती है एंट्री?
भारत में यह एक बहुत ही आम धारणा है कि अगर आपने IIT (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) या IIM (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट) से पढ़ाई नहीं की है, तो आप दुनिया की टॉप कंपनियों में जगह नहीं बना सकते। इस नेहा ने साफ शब्दों में कहा, "नहीं, यह बात 100 प्रतिशत सच नहीं है। कंपनी आपकी डिग्री से ज्यादा आपकी जरूरी स्किल्स को अहमियत देती है।"
अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने अपनी खुद की टीम का उदाहरण दिया। नेहा ने बताया, “मेरी टीम में ऐसे कई लोग काम करते हैं जो किसी IIT या IIM के ग्रेजुएट नहीं हैं, लेकिन फिर भी उनका काम सबसे शानदार है और वे बेहतरीन नतीजे दे रहे हैं। गूगल के लिए आपका कॉलेज नहीं, बल्कि आपका वर्क प्रोफाइल ज्यादा मायने रखता है।”
सोशल मीडिया पर लोगों का रिएक्शन
नेहा शर्मा का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर छा गया। इंटरनेट पर लोग उनकी खूब तारीफ कर रहे हैं। कमेंट सेक्शन में यूजर्स ने अपनी-अपनी राय रखी है। एक यूजर ने राहत भरी सांस लेते हुए लिखा, "यह वीडियो उन लोगों के लिए बहुत मददगार है जिन्हें लगता था कि गूगल सिर्फ कोडर लोगों का ही अड्डा है।" वहीं एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, "आखिरकार किसी ने तो सच कहा कि कॉलेज के नाम और टैग से कहीं ज्यादा आपकी स्किल्स मायने रखती हैं।" एक और शख्स ने लिखा, "इस वीडियो ने बड़ी टेक कंपनियों की हायरिंग को लेकर फैले बहुत सारे कंफ्यूजन को दूर कर दिया है।"
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


