Gaokao Exam: दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा 'Gaokao': क्यों नहीं कभी लीक होता पेपर? सेना करती है सुरक्षा
Gaokao Exam in China vs NEET UG : क्या आप जानते हैं कि चीन में आयोजित होने वाली 'गाओकाओ' (Gaokao) परीक्षा, जिसे दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा माना जाता है, वहां पेपर लीक होना लगभग नामुमकिन है?

Gaokao Exam in China vs NEET UG : भारत समेत दुनिया के कई देशों में अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की खबरें सुर्खियां बनती हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य बीच में लटक जाता है। अभी हाल ही में NEET UG 2026 परीक्षा लीक ने सबको चौंका दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चीन में आयोजित होने वाली 'गाओकाओ' (Gaokao) परीक्षा, जिसे दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा माना जाता है, वहां पेपर लीक होना लगभग नामुमकिन है? चीन इस परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी सैन्य अभियान जैसी सुरक्षा व्यवस्था अपनाता है। आइए जानते हैं कि चीन की इस परीक्षा का पेपर लीक क्यों नहीं होता और इसके पीछे की सुरक्षा व्यवस्था कितनी सख्त है।
1. सेना की निगरानी और गोपनीय प्रिंटिंग
गाओकाओ परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया किसी जासूसी फिल्म जैसी होती है। परीक्षा से कई महीने पहले, विशेषज्ञों और शिक्षकों की एक टीम को एक गुप्त स्थान पर ले जाया जाता है। इस स्थान का बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं होता। यहां तक कि उनके मोबाइल फोन भी ले लिए जाते हैं।
सबसे खास बात यह है कि प्रश्नपत्रों की छपाई जेल की उन प्रिंटिंग प्रेस में की जाती है, जहां कड़ी सुरक्षा होती है। प्रिंटिंग के दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों को भी परीक्षा खत्म होने तक बाहर जाने की अनुमति नहीं होती। प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए जीपीएस (GPS) लगे ट्रकों और सशस्त्र पुलिस बलों का उपयोग किया जाता है।
2. परीक्षा केंद्रों पर 'नो फ्लाई जोन' और जैमर्स
जब परीक्षा शुरू होती है, तो केंद्रों के आसपास का नजारा देखने लायक होता है। परीक्षा केंद्रों के आसपास के रास्तों को बंद कर दिया जाता है और वहां 'नो फ्लाई जोन' घोषित कर दिया जाता है ताकि कोई ड्रोन या अन्य डिवाइस सिग्नल न भेज सके।
इतना ही नहीं, हाई-टेक वायरलेस सिग्नल जैमर्स लगाए जाते हैं ताकि मोबाइल, ब्लूटूथ या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग न हो सके। परीक्षा हॉल की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फेशियल रिकग्निशन कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है, जो छात्र की हर छोटी हरकत और चेहरे के हाव-भाव पर नजर रखते हैं।
3. पेपर लीक पर मौत की सजा तक का प्रावधान
चीन में नियमों का उल्लंघन करना बहुत महंगा पड़ता है। यदि कोई छात्र नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे अगले तीन साल तक किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक करने या परीक्षा में संगठित धोखाधड़ी करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे 7 साल से लेकर उम्रकैद और कुछ दुर्लभ मामलों में मौत की सजा तक दी जा सकती है। यह सख्त कानून लोगों के मन में डर पैदा करता है।
4. गाओकाओ का महत्व: भविष्य का फैसला
चीन में 'गाओकाओ' केवल एक परीक्षा नहीं है, बल्कि यह एक छात्र के करियर और सामाजिक स्थिति का फैसला करती है। करीब 1.3 करोड़ छात्र हर साल इस परीक्षा में बैठते हैं। यह परीक्षा दो दिनों तक चलती है और इसमें चीनी भाषा, गणित और अंग्रेजी जैसे विषय अनिवार्य होते हैं। इस परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर ही तय होता है कि छात्र को देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में दाखिला मिलेगा या नहीं।
लेखक के बारे में
Prachiशॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।
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