भारत में पढ़ रहा हर चौथा विदेशी छात्र इस देश का, ये राज्य है पहली पसंद; खूब हो रहे एडमिशन
हायर एजुकेशन पर ऑल इंडिया सर्वे से पता चला है कि भारत में पढ़ने वाले विदेशी स्टूडेंट्स में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें नेपाल सबसे आगे है और कर्नाटक टॉप डेस्टिनेशन स्टेट के तौर पर उभरा है।

भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। यहां के क्लासरूम अब सिर्फ देसी छात्रों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दुनिया भर के युवाओं की चहल-पहल से गुलजार होने लगे हैं। शिक्षा के मामले में हमारा देश अब एक ग्लोबल हब बनने की राह पर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। हाल ही में जारी हुई ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) 2023-24 की ताजा रिपोर्ट कुछ ऐसे ही शानदार आंकड़े पेश करती है। इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि विदेशी छात्रों का भारत की ओर रुझान लगातार बढ़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि हमारे पड़ोसी देश नेपाल से सबसे ज्यादा छात्र भारत पढ़ने आ रहे हैं, जबकि राज्यों की बात करें तो कर्नाटक और पंजाब विदेशी छात्रों के सबसे पसंदीदा ठिकाने बनकर उभरे हैं।
19 फीसदी का उछाल
बीते पांच सालों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो एक बहुत ही सकारात्मक तस्वीर उभरकर सामने आती है। भारत में पढ़ाई करने आने वाले विदेशी छात्रों की तादाद में करीब 19 फीसदी का शानदार इजाफा देखने को मिला है। साल 2019-20 में जहां 48,898 विदेशी छात्र भारत के अलग-अलग संस्थानों में पढ़ाई कर रहे थे, वहीं 2023-24 के एकेडमिक सेशन में यह आंकड़ा बढ़कर 58,134 के पार पहुंच गया। यानी सीधे तौर पर 9,236 नए छात्रों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर अपना भरोसा जताया है।
यह बढ़ोतरी सिर्फ किसी एक जेंडर तक सीमित नहीं है। पुरुष छात्रों की संख्या जो पहले 32,386 थी, वो अब बढ़कर 37,295 हो गई है। वहीं, महिला छात्राओं की तादाद में भी अच्छा-खासा उछाल आया है, जो 16,512 से बढ़कर 20,839 हो चुकी है। साल 2018 में शिक्षा मंत्रालय ने स्टडी इन इंडिया (SII) नाम से एक खास पहल शुरू की थी, जिसका बुनियादी मकसद विदेशी छात्रों को भारत की ओर आकर्षित करना था। अब ताजे सर्वे के नतीजे चीख-चीख कर बता रहे हैं कि सरकार की यह कोशिश किस कदर कामयाब हो रही है। आज के वक्त में दुनिया के 173 देशों के छात्र भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहे हैं।
इन मुल्कों से भी आ रहे युवा
भले ही भारत के कैंपसों में दुनिया भर के छात्र आ रहे हों, लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा हमारे पड़ोस से ही आता है। AISHE की रिपोर्ट बताती है कि 2023-24 में भारत में पढ़ाई करने वाले कुल विदेशी छात्रों में से अकेले 24.1 फीसदी सिर्फ नेपाल से हैं। इसे आसान भाषा में समझें तो भारत में पढ़ाई कर रहा हर चौथा विदेशी छात्र नेपाली है। इसके बाद दूसरे नंबर पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का नाम आता है, जिसकी हिस्सेदारी 7 फीसदी है। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) और बांग्लादेश, दोनों देशों से 5.9-5.9 फीसदी छात्र यहां आ रहे हैं। इसके अलावा नाइजीरिया से 5.5 फीसदी और जिम्बाब्वे से 4 फीसदी युवाओं ने भारत को अपनी शिक्षा के लिए चुना है। अगर टॉप 10 देशों को मिला लें तो कुल विदेशी छात्रों का 63.8 फीसदी हिस्सा इन्हीं देशों से आता है। हालांकि, लेबनान, बुर्किना फासो, मंगोलिया, मैक्सिको, कजाकिस्तान, बेलारूस और चिली जैसे दूर-दराज के देशों से भी छात्र हमारे यहां दाखिल हो रहे हैं जो भारतीय एजुकेशन की ग्लोबल पहुंच की गवाही देता है।
राज्यों की रेस में कर्नाटक ने पंजाब को पछाड़ा
जब बात आती है कि ये विदेशी छात्र भारत में किस जगह रहना और पढ़ना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं, तो दक्षिण भारत के कर्नाटक ने बाजी मार ली है। हालांकि, यह मुकाबला बेहद कांटे का रहा। कर्नाटक में कुल 7,914 इंटरनेशनल छात्रों ने एडमिशन लिया और वो देश में पहले पायदान पर रहा। वहीं पंजाब बिल्कुल मामूली अंतर से 7,902 छात्रों के साथ दूसरे नंबर पर रहा। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र है जहां 6,190 विदेशी छात्र पढ़ रहे हैं। इसके बाद 5,953 छात्रों के साथ उत्तर प्रदेश चौथे और 5,694 छात्रों के साथ तमिलनाडु पांचवें स्थान पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा। इन आंकड़ों से एक बात साफ समझ आती है कि भारत के जो राज्य पहले से ही एजुकेशन हब के तौर पर मशहूर हैं, विदेशी छात्रों का सबसे ज्यादा भरोसा भी उन्हीं राज्यों पर है।
अंडरग्रेजुएट कोर्स की डिमांड सबसे ज्यादा
आखिर ये विदेशी छात्र भारत में आकर किस तरह की पढ़ाई करना पसंद करते हैं? सर्वे के मुताबिक, सबसे ज्यादा डिमांड अंडरग्रेजुएट (यूजी) यानी स्नातक कोर्सेज की है। कुल विदेशी छात्रों में से 73.6 फीसदी युवा इसी स्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। संख्या के हिसाब से देखें तो 42,779 छात्र अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिला ले चुके हैं, जिनमें से 27,849 लड़के और 14,930 लड़कियां शामिल हैं। इसके बाद नंबर आता है पोस्टग्रेजुएट (पीजी) प्रोग्राम का जिसमें 9,845 छात्रों ने एडमिशन लिया है, जो कुल तादाद का 16.8 फीसदी बैठता है। इसके अलावा डिप्लोमा, पीएचडी, सर्टिफिकेट और इंटिग्रेटेड कोर्सेज में भी विदेशी छात्र अपनी किस्मत आजमा रहे हैं लेकिन इनकी संख्या ग्रेजुएशन के मुकाबले काफी कम है।
बताते चलें कि ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) शिक्षा मंत्रालय की एक सालाना कवायद है। इसके जरिए पूरे भारत के हायर एजुकेशन सेक्टर का नक्शा तैयार किया जाता है। देश भर की यूनिवर्सिटीज, कॉलेज और तमाम शिक्षण संस्थान एक वेब-आधारित डेटा कैप्चर फॉर्मेट (DCF) के जरिए अपनी जानकारियां सरकार को भेजते हैं। इसमें छात्रों के एडमिशन से लेकर फैकल्टी, स्टाफ, इंफ्रास्ट्रक्चर और परीक्षा के नतीजों तक का पूरा ब्योरा शामिल होता है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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