स्कूल कैंपस में वीडियो बनाया तो खैर नहीं! छात्र समेत अध्यापकों पर भी लगामा
फरीदाबाद प्रशासन ने स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाने के लिए छात्रों और शिक्षकों के रील या शॉर्ट वीडियो बनाने पर सख्त पाबंदी लगा दी है। केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए छूट मिलेगी।

आजकल हर किसी के सिर पर सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने का भूत सवार है। सड़क हो, बाजार हो या फिर कोई भी सार्वजनिक जगह, लोग अपने स्मार्टफोन के कैमरे के सामने तरह तरह के करतब करते नजर आ ही जाते हैं। लेकिन जब यह शौक शिक्षा के मंदिरों यानी स्कूलों की दहलीज पार करके क्लासरूम तक पहुंच जाए, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। इसी बढ़ती हुई डिजिटल डिस्ट्रेक्शन पर लगाम कसने और स्कूलों में पढ़ाई का एक बेहतरीन और अनुशासित माहौल सुनिश्चित करने के लिए फरीदाबाद प्रशासन ने एक बेहद अहम और सख्त कदम उठाया है।
फरीदाबाद जिला शिक्षा विभाग ने एक कड़ा फरमान जारी करते हुए स्कूल के समय के दौरान छात्रों, शिक्षकों और यहां तक कि स्कूल के अन्य स्टाफ सदस्यों द्वारा रील्स या किसी भी तरह के शॉर्ट वीडियो बनाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। इस फैसले का सीधा मकसद स्कूलों की गरिमा को बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सूरत में शैक्षणिक गतिविधियों में कोई रुकावट न आए।
आखिर क्यों उठानी पड़ी यह सख्ती?
फरीदाबाद के जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी किए गए आधिकारिक सर्कुलर के मुताबिक, पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा था कि कुछ स्कूलों में केवल मनोरंजन और सोशल मीडिया पर लाइक्स बटोरने के मकसद से रील्स और छोटे वीडियो बनाए जा रहे थे। इस चलन का सीधा और बहुत ही नकारात्मक असर क्लासरूम की गतिविधियों और बच्चों की एकाग्रता पर पड़ रहा था।
राज्य सरकार और शिक्षा विभाग का साफ तौर पर मानना है कि स्कूल ज्ञान बांटने और भविष्य संवारने की जगह हैं, कोई फिल्म स्टूडियो नहीं। स्कूल कैंपस के अंदर वीडियो बनाने जैसी गतिविधियों से न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता है, बल्कि इससे संस्था का अनुशासन और स्कूल की साख भी खराब होती है। इसलिए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी जो छात्रों का ध्यान भटकाए या पढ़ाई के माहौल को खराब करे।
प्रिंसिपल्स की जिम्मेदारी तय, सख्ती से होगा पालन
इस आदेश को कागजों तक सीमित न रखते हुए, इसे जमीन पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली गई है। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों के प्रिंसिपल्स को यह सख्त हिदायत दी है कि वे अपने अपने स्कूलों में इस नियम का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें। सर्कुलर में यह बात बिल्कुल साफ कर दी गई है कि स्कूल के समय में छात्रों और शिक्षकों, दोनों का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ सिखाने और सीखने पर केंद्रित होना चाहिए। किसी भी ऐसी गतिविधि को तुरंत रोक दिया जाए जो पढ़ाई से ध्यान हटाती हो।
क्या किसी भी सूरत में वीडियो नहीं बन सकते?
प्रशासन ने स्थिति को व्यवहारिक नजरिए से भी देखा है। विभाग ने साफ किया है कि इस पाबंदी का मतलब यह नहीं है कि तकनीक का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया जाए। अगर कोई वीडियो स्कूल की शिक्षा, किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम, या समाज में किसी तरह की जागरूकता फैलाने के मकसद से बनाया जाना है, तो उसकी इजाजत होगी।
लेकिन, इसके लिए भी कुछ बेहद सख्त शर्तें रखी गई हैं:
1. पूर्व अनुमति: ऐसे किसी भी वीडियो को शूट करने से पहले स्कूल प्रशासन या मैनेजमेंट से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
2. शिक्षकों की निगरानी: ये सभी गतिविधियां पूरी तरह से शिक्षकों की देखरेख में ही की जाएंगी।
3. छात्रों की निजता: वीडियो बनाते समय इस बात का खास ख्याल रखा जाएगा कि किसी भी छात्र की प्राइवेसी या गोपनीयता का हनन न हो।
4. पढ़ाई का नुकसान नहीं: सबसे अहम शर्त यह है कि इन गतिविधियों से स्कूल के रोजमर्रा के शैक्षणिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। स्कूल के सिलेबस या शिक्षा से न जुड़े किसी भी रील या वीडियो शूट की बिल्कुल भी इजाजत नहीं होगी।
नियम तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को यह निर्देश दिया है कि वे इस नए आदेश के बारे में अपने सभी छात्रों, शिक्षकों और नॉन टीचिंग स्टाफ को तुरंत और स्पष्ट रूप से सूचित करें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ एक सलाह नहीं बल्कि एक सख्त नियम है। अगर कोई भी छात्र, शिक्षक या स्टाफ का सदस्य इस नियम की अनदेखी करता हुआ या स्कूल परिसर में मनोरंजन के लिए रील बनाता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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