12वीं में फेल, फिर IIT में दाखिला, मध्य प्रदेश के आदिवासी लड़के ने दोहराई 12th Fail वाले IPS मनोज जैसी कहानी
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के चेतन सोलंकी ने 12वीं बोर्ड में असफल होने के बाद ऑनलाइन पढ़ाई और सेल्फ स्टडी के दम पर जेईई एडवांस्ड में सफलता हासिल की। ST वर्ग में 1309वीं रैंक रही। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर में सीट मिली है।

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के 20 वर्षीय चेतन सोलंकी ने लोकप्रिय फिल्म '12th Fail' की प्रेरक कहानी को एक बार फिर दोहराया है। 2023 की इस बहुचर्चित फिल्म में चंबल के मनोज कुमार शर्मा की आर्थिक तंगी और पढ़ाई में आई भारी दिक्कतों को पार कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी बनने की कहानी दिखाई गई है। इसी फिल्म से सीख लेकर चेतन ने भी एक शानदार वापसी की कहानी रची। 12वीं बोर्ड परीक्षा में फेल होने के बाद चेतन वहीं लौट आए जहां से सब शुरू हुआ था यानी अपने घर। हार मानकर आगे बढ़ने के लिए नहीं, बल्कि एक बड़ी असफलता के बाद खुद को संभालकर फिर से उठने के लिए।
वारला तहसील के खुतवाड़ी गांव (जो मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में से एक बड़वानी जिला मुख्यालय से लगभग 100 किमी दूर है) के इस नौजवान ने अब जेईई एडवांस्ड परीक्षा में एसटी कैटेगरी में 1,309वीं रैंक हासिल की है। उन्हें रविवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) खड़गपुर में एग्रीकल्चर एंड फूड इंजीनियरिंग कोर्स में सीट मिली।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक चेतन ने अपनी 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं इंदौर के बेटमा स्थित श्रमोदय आवासीय विद्यालय में दी थीं। हालांकि जब वे फेल हुए, तो उन्हें लगा जैसे उनकी दुनिया बिखर रही हो। उनके चाचा के अनुसार, यह झटका बहुत गहरा था। सिविल इंजीनियर ओंकार सोलंकी ने कहा, '12वीं बोर्ड में फेल होने का उन पर गहरा असर पड़ा। वे घर लौट आए और लगभग खुद को एक कमरे में बंद कर लिया।' ओंकार सोलंकी ने दुबई से ऑपरेशन्स और मेंटेनेंस में पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है और वे फलों और सब्जियों के एग्रीकल्चरल एक्सपोर्ट के मैनेजमेंट से जुड़े हैं।
हालांकि उस कमरे के अंदर वे खाली नहीं बैठे थे। बिना किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट, स्टडी ग्रुप या शहर की लाइब्रेरी के सहारे के चेतन ने इंटरनेट की मदद से 12वीं की परीक्षा पास की। ऑनलाइन कोर्सेज और सेल्फ स्टडी की बदौलत उन्होंने अपनी स्कूलिंग पूरी कर ली। अब उन्हें चुनौतीपूर्ण जेईई एडवांस्ड की तैयारी शुरू की जिसे देश की सबसे मुश्किल इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक माना जाता है।
गांव में बिजली इंटरनेट की समस्या
खुतवाड़ी जैसे गांव में, जहां इंटरनेट और बिजली की समस्या आम थी, यह कोई आसान काम नहीं था। शहर के छात्रों को पढ़ाई के दौरान अच्छा ब्रॉडबैंड कनेक्शन और बिना रुकावट बिजली मिलती है, लेकिन चेतन के लिए ऐसा माहौल पाना रोज की चुनौती थी। इसके साथ ही वह जरूरत पड़ने पर अपने किसान पिता कमल सोलंकी की खेती के कामों में भी मदद करते थे।
सोलंकी ने गर्व से कहा, 'ऑनलाइन कोर्स और खुद से पढ़ाई करके, उन्होंने न सिर्फ़ 12वीं पास की, बल्कि IIT में एडमिशन भी पाया।'
चेतन का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था जिसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन जिसने कभी भी शिक्षा को जरूरी नहीं समझा, ऐसा नहीं था। उनके चाचा ने ट्रक ड्राइवर के तौर पर एक साल काम किया और उसे अपने करियर में आगे बढ़ने का जरिया बनाया। उनकी चाची एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर हैं।
सोलंकी ने कहा, 'जब चेतन 12वीं में फेल हो गए, तो हमने उनसे कहा कि दबाव न लें। हमने कहा कि अगर वह IIT पास नहीं भी कर पाते हैं, तो भी खेती और परिवार के दूसरे कामों में योगदान दे सकते हैं। उस समय IIT पास करना बहुत मुश्किल लग रहा था, लेकिन उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से सबको गलत साबित कर दिया।'
आईआईटी में खेती से जुड़ा विषय चुना
इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन चुनने की बात आई तो चेतन के पास कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग को चुना, एक ऐसा क्षेत्र जो सीधे तौर पर उस दुनिया से जुड़ा था जिसमें वह पले-बढ़े थे। इस फैसले से उन्हें जानने वाले लोग हैरान नहीं हुए। चेतन ने टीओआई को बताया, 'मेरे चाचा ने इंजीनियरिंग की और बाद में एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट सेक्टर में काम किया। मैं भी अपनी शिक्षा का इस्तेमाल खेती और किसानों के फायदे के लिए करना चाहता हूं।'
IAS अफसर बनने का सपना, 12th फेल से ली सीख
कुछ समय पहले मायूसी के अंधरे में डूबे इस 20 साल के युवा ने अब जिंदगी में बड़े लक्ष्य तय किए हैं। वह अब यूपीएससी क्रैक कर आईएएस ऑफिसर बनने का सपना देख रहे हैं, हालांकि अगर वह रास्ता नहीं खुलता है, तो भी वह अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई को अपने आप में सार्थक मानते हैं। चेतन ने बताया कि उन्होंने ‘12th Fail’ फिल्म देखी और उन्हें उसमें बहुत कुछ ऐसा लगा जो उनके अपने जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ था और दिल को छू गया।
पीछे मुड़कर देखें तो चेतन के परिवार का उनकी 12वीं कक्षा में फेल होने को लेकर एक अलग ही नज़रिया है। वे इसे कोई दुखद घटना या हार नहीं, बल्कि एक नई सच्चाई के सामने आने जैसा मानते हैं। परिवार के एक सदस्य ने कहा, 'अगर वह फेल न हुआ होता, तो शायद हमें कभी पता ही नहीं चलता कि उसमें कितनी हिम्मत और काबिलियत है। अब हमें यकीन है कि वह आगे चलकर सिविल सर्विस में भी जा सकता है।" फिलहाल, चेतन का कहना है कि वह पूरी तरह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं और अगले महीने आईआईटी खड़गपुर में दाखिला लेने वाले हैं।
लेखक के बारे में
Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
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