DU : दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई कोर्स में 50 से 90 फीसदी सीटें खाली, नहीं मिल रहे छात्र
सीयूईटी के तहत यूजी दाखिले अपने अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं, लेकिन डीयू के हिंदी, संस्कृत, पंजाबी और उर्दू जैसे प्रमुख भाषा विषय कोर्स के प्रति छात्रों की भारी बेरुखी ने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।

देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में दाखिले की दौड़ जहां कुछ कोर्सेज में 99% अंकों पर भी खत्म नहीं होती, वहीं दूसरी ओर भारतीय भाषाओं के क्लासरूम खाली पड़े हैं। सीयूईटी के तहत यूजी दाखिले अपने अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं, लेकिन हिंदी, संस्कृत, पंजाबी और उर्दू जैसे प्रमुख भाषा विषयों के प्रति छात्रों की भारी बेरुखी ने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। डीयू के नामी-गिरामी कॉलेजों में भी भारतीय भाषाओं की 50 से 90 फीसदी तक सीटें खाली पड़ी हैं।
पर्याप्त छात्र नहीं मिल रहे
स्पॉट राउंड के लिए जारी डीयू के आंकड़े बताते हैं कि राजभाषा हिंदी तक को पर्याप्त छात्र नहीं मिल रहे हैं। भगिनी निवेदिता कॉलेज में हिंदी ऑनर्स की 56, कमला नेहरू कॉलेज और जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में 40-40, लक्ष्मीबाई कॉलेज में 36, आईपी कॉलेज फॉर विमेन में 30 और भारती कॉलेज व डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज में 20 से ज्यादा सीटें खाली हैं।
संस्कृत में तो और बुरा हाल
संस्कृत और अन्य भाषाओं की स्थिति तो और भी बदतर है। भारती कॉलेज और कालिंदी कॉलेज में संस्कृत ऑनर्स की 60-60 से ज्यादा सीटें खाली हैं। इसके अलावा लक्ष्मीबाई कॉलेज में 50, राजधानी कॉलेज में 50 से अधिक, देशबंधु कॉलेज में 45 और दौलत राम कॉलेज में 35 सीटें खाली पड़ी हैं। उर्दू ऑनर्स की बात करें तो सत्यवती में 50 से अधिक और जाकिर हुसैन में 30 से ज्यादा सीट रिक्त हैं।
स्थिति चिंतजानक
दयाल सिंह कॉलेज के शिक्षक नवीन गौर ने बताया, हिंदी की स्वीकृत 77 सीटों में से 43 (55%), पंजाबी की 58 में से 52 (89%), संस्कृत की 58 में से 36 (62%) और उर्दू की 74% रिक्त हैं।
भगत सिंह कॉलेज में ऑनलाइन नामांकन
डीयू के शहीद भगत सिंह कॉलेज ने डूसू चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और छात्रहितैषी बनाने के लिए ऑनलाइन नामांकन समेत कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण कुमार अत्री के अनुसार, कॉलेज ने डूसू चुनाव के लिए पहली बार ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य नामांकन प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।


