
CSAS DU UG Admission 2026: डीयू एडमिशन ब्राउशर जारी, CUET से दाखिला, 12वीं में विषय पढ़ा होना अनिवार्य
DU UG Admission 2026: डीयू यानी दिल्ली यूनिवर्सिटी ने स्नातक दाखिला को लेकर अपना प्रॉस्पेक्टस जारी कर दिया है। डीयू ने अपना इंफोर्मेशन बुलेटिन admission.uod.ac.in पर अपलोड किया है।
DU UG Admission 2026: डीयू यानी दिल्ली यूनिवर्सिटी ने स्नातक दाखिला को लेकर अपना प्रॉस्पेक्टस जारी कर दिया है। डीयू ने अपना इंफोर्मेशन बुलेटिन admission.uod.ac.in पर अपलोड किया है। डीयू में शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में एडमिशन के लिए सिर्फ सीयूईटी यूजी 2026 में मिले अंकों पर ही विचार किया जाएगा।डीयू ने अपने एडमिशन क्राइटेरिया को बरकरार रखा है, जिसके तहत स्टूडेंट्स उन सब्जेक्ट्स में सीयूईटी एग्जाम नहीं दे सकते जिन्हें उन्होंने अपनी 12वीं कक्षा में नहीं चुना था। इस साल सीयूईटी यूजी से होने वाले डीयू दाखिले के नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
डीयू ने नोटिफिकेशन में साफ किया गया है कि 'दिल्ली यूनिवर्सिटी में सभी अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में एडमिशन सीयूईटी यूजी 2026 में मिले स्कोर के आधार पर होंगे (स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL), नॉन-कॉलेजिएट विमेन एजुकेशन बोर्ड (NCWEB) और विदेशी नागरिकों के एडमिशन को छोड़कर)।"
आपको बता दें कि सीयूईटी यूजी 2026 के नियमों के मुताबिक अभ्यर्थी उस विषय की भी परीक्षा दे सकते हैं जो उसने 12वीं में नहीं पढ़ा है लेकिन उस विषय में दाखिला देना या नहीं देना, संबंधित यूनिवर्सिटी के नियमों पर निर्भर करेगा। दाखिलों को लेकर हर विश्वविद्यालय की अपनी अपनी नीति चलेगी। डीयू की पॉलिसी के मुताबिक उस विषय में दाखिला नहीं मिलेगा, जो विषय 12वीं में नहीं पढ़ा है।
डीयू लिस्ट ए और बी में सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन की लिस्ट पिछले साल जैसी ही है।
Direct Link
कम से कम 50 फीसदी सिलेबस मिलना चाहिए
अगर क्लास 12वीं में पढ़े गए सब्जेक्ट का जिक्र सीयूईटी यूजी 2026 में नहीं है, तो कैंडिडेट को उस लैंग्वेज/डोमेन स्पेसिफिक सब्जेक्ट में शामिल होना होगा जो क्लास 12वीं में पढ़े गए सब्जेक्ट के जैसा/उससे मिलता-जुलता हो (उदाहरण के लिए, अगर किसी कैंडिडेट ने क्लास 12वीं में बायोकेमिस्ट्री पढ़ी है, तो उसे CUET (UG) - 2026 में बायोलॉजी में शामिल होना होगा)। सीयूईटी यूजी सब्जेक्ट्स की क्लास 12वीं में लिए गए सब्जेक्ट्स से समानता साबित करने के लिए, कम से कम 50 फीसदी सिलेबस मिलना चाहिए। यूनिवर्सिटी को समानता तय करने का अधिकार है। इस संबंध में यूनिवर्सिटी का फैसला अंतिम और बाध्यकारी होगा।





