DU: सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को मंजूरी, विदेश में पढ़ सकेंगे UG छात्र; 4 साल की UG के बाद सीधे PhD में एंट्री

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की कार्यकारी परिषद ने गुरुवार को सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (SAP) शुरू करने को मंजूरी दे दी। इसके तहत अंडरग्रेजुएट यानी स्नातक छात्र किसी विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान में एक सेमेस्टर की पढ़ाई कर सकेंगे।

DU Semester Away program approved UG students can study abroad direct entry into PhD after 4 year UG cours
सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को मंजूरी

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की कार्यकारी परिषद ने गुरुवार को सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (SAP) शुरू करने को मंजूरी दे दी। इसके तहत अंडरग्रेजुएट यानी स्नातक छात्र किसी विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान में एक सेमेस्टर की पढ़ाई कर सकेंगे। परिषद ने चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम पूरा करने वाले छात्रों को सीधे PhD करने की अनुमति देने वाले संशोधनों को भी मंजूरी दे दी है।

ये फैसले DU के कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में लिए गए। हालांकि, निर्वाचित सदस्यों ने दोनों प्रस्तावों पर आपत्ति जताई। उन्होंने आशंका जताई कि इससे DU की डिग्री की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, स्नातक के बाद सीधे डॉक्टरेट में प्रवेश लेने वाले छात्रों की अकादमिक तैयारी पर्याप्त नहीं हो सकती और विदेश में सेमेस्टर करने से छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को मंजूरी

सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF)-2022 के तहत प्रस्तावित किया गया है। इस प्रस्ताव पर पहले विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल में भी चर्चा हो चुकी है। इस प्रोग्राम के तहत अंडरग्रेजुएट छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालयों में एक सेमेस्टर पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। छात्र वहां पढ़ाई के दौरान हासिल किए गए अकादमिक क्रेडिट्स को अपनी DU डिग्री में ट्रांसफर करा सकेंगे। इससे विदेश में पढ़ाई का अनुभव लेने के साथ उनकी डिग्री के लिए जरूरी क्रेडिट भी पूरे किए जा सकेंगे।

हालांकि, इंडियन नेशनल टीचर्स कांग्रेस (INTEC) से जुड़े निर्वाचित कार्यकारी परिषद के सदस्यों मिथुराज धूसिया और अमन कुमार ने इस फैसले पर असहमति जताते हुए एक डिसेंट नोट सौंपा। इसमें उन्होंने इस पहल से जुड़े शैक्षणिक और आर्थिक प्रभावों पर सवाल उठाए। सदस्यों का कहना था कि सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (SAP) के पुराने और संशोधित प्रस्ताव के बीच क्या बदलाव किए गए हैं, यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है। साथ ही, इन बदलावों के पीछे के कारणों की भी पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।

उन्होंने इस प्रोग्राम की तुलना पहले चलाए गए ‘ट्विनिंग प्रोग्राम’ से करते हुए कहा कि इस तरह की व्यवस्थाओं से DU के मौजूदा डिग्री कोर्स की वैल्यू कम होने की आशंका है।

फीस और छात्रों की पहुंच को लेकर शिक्षकों ने जताई चिंता

असहमति जताने वाले सदस्यों ने कहा कि सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (SAP) में शामिल होने वाले छात्रों को DU की नियमित फीस के अलावा विदेशी विश्वविद्यालय की फीस भी देनी होगी।

उन्होंने चिंता जताई कि ट्यूशन फीस के साथ हवाई यात्रा, रहने और खाने-पीने का खर्च भी छात्रों पर पड़ेगा। इससे यह प्रोग्राम केवल आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों के छात्रों तक सीमित रह सकता है और उच्च शिक्षा में असमानता बढ़ सकती है।

सदस्यों का यह भी कहना था कि इस तरह की व्यवस्था से छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालयों से क्रेडिट खरीदने जैसी स्थिति बन सकती है और उच्च शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि, मंजूर किए गए प्रस्ताव में छात्रों के लिए बाहरी स्कॉलरशिप और मोबिलिटी ग्रांट के जरिए आर्थिक मदद लेने का विकल्प रखा गया है। इसके अलावा, फंड उपलब्ध होने पर DU या उसके कॉलेजों की ओर से भी जरूरत और योग्यता के आधार पर आर्थिक सहायता दी जा सकती है।

चार साल की UG डिग्री के बाद सीधे PhD में दाखिला

DU की कार्यकारी परिषद ने PhD में दाखिले से जुड़े ऑर्डिनेंस VI में बदलाव को भी मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब चार साल का अंडरग्रेजुएट (UG) प्रोग्राम पूरा करने वाले छात्र सीधे PhD में प्रवेश ले सकेंगे।

संशोधित नियमों के अनुसार, सीधे PhD में दाखिले के लिए छात्रों के पास चार साल की UG डिग्री में कम से कम 7.5 CGPA होना जरूरी होगा। इसके साथ ही छात्र की कम से कम एक रिसर्च पेपर Scopus में इंडेक्स्ड जर्नल में प्रकाशित होनी चाहिए।

यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रावधानों के अनुरूप है। NEP 2020 के तहत चार साल की अंडरग्रेजुएट डिग्री और छात्रों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक रास्तों की व्यवस्था की गई है।

PhD में सीधे दाखिले को लेकर सदस्यों ने उठाए सवाल

इंडिया टूडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कार्यकारी परिषद के निर्वाचित सदस्यों ने UG के बाद सीधे PhD में दाखिले के फैसले का विरोध किया। उनका कहना था कि चार साल की UG डिग्री पूरी करने वाले सभी छात्रों के पास PhD के लिए जरूरी अकादमिक समझ और रिसर्च का अनुभव हो, यह जरूरी नहीं है।

अपने असहमति पत्र में धूसिया और कुमार ने कहा कि PhD में किसी खास विषय पर गहन रिसर्च करनी होती है। इसके लिए छात्र के पास उस विषय की गहरी और उन्नत समझ होना जरूरी है, ताकि वह एक बेहतर और व्यावहारिक रिसर्च टॉपिक चुन सके।

उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि इस रास्ते से PhD में आने वाले छात्रों के लिए एंट्रेंस एग्जाम या डिपार्टमेंटल रिसर्च कमेटी के सामने इंटरव्यू का प्रावधान नहीं है।

सदस्यों के मुताबिक, अगर छात्रों की उचित जांच नहीं होगी तो यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि उनका चुना हुआ रिसर्च विषय व्यावहारिक और अकादमिक रूप से सही है या नहीं।

उन्होंने PhD के दौरान सुपरवाइजर बदलने और समय पर रिसर्च पूरी कराने जैसे मुद्दों पर भी स्पष्ट नियम नहीं होने को लेकर चिंता जताई।

योग्य शिक्षकों को पेय प्रोटेक्शन की मंजूरी

परिषद ने उन शिक्षकों के लिए Pay Protection से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी, जिन्होंने पहले DU या अन्य संस्थानों में एडहॉक या अस्थायी पदों पर काम किया था और बाद में उचित प्रक्रिया के जरिए स्थायी नियुक्ति हासिल की।

नए प्रावधानों के तहत, अगर किसी शिक्षक की स्थायी नियुक्ति से पहले DU या किसी अन्य समान रूप से वित्त पोषित संस्थान में ओपन रिक्रूटमेंट और विधिवत गठित चयन समिति के जरिए नियुक्ति हुई थी, तो वह Pay Protection के लिए पात्र होगा।

यह प्रावधान 1 अप्रैल 2022 या उसके बाद हुई नियुक्तियों पर लागू होगा।

DU कर्मचारियों के लिए 20 लाख रुपये का ग्रुप इंश्योरेंस

EC ने DU कर्मचारियों, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं, के आश्रितों के लिए वॉलंटरी ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 20 लाख रुपये का बीमा कवर मिलेगा। जो कर्मचारी इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें 500 रुपये प्रति माह प्लस GST का प्रीमियम देना होगा।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal

संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

और पढ़ें
Hindi News के साथ करियर सेक्शन में पढ़ें लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़, सरकारी जॉब , एग्जाम , एडमिशन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें। हर अपडेट सबसे पहले पाने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
Hindi Newsकरियर न्यूज़DU: सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को मंजूरी, विदेश में पढ़ सकेंगे UG छात्र