DU ने 2025-26 बैच के छात्रों को दी बड़ी राहत, पासिंग नियम किए आसान, शिक्षक भड़के
DU ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए फर्स्ट ईयर के बाद अगले सेमेस्टर में प्रमोशन के नियमों में एक बार के लिए छूट दी है। अब इस बैच के छात्रों को अगले वर्ष में जाने के लिए पहले की तरह 44 में से 28 क्रेडिट हासिल करना अनिवार्य नहीं होगा।

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए फर्स्ट ईयर के बाद अगले सेमेस्टर में प्रमोशन के नियमों में एक बार के लिए छूट दी है। अब इस बैच के छात्रों को अगले वर्ष में जाने के लिए पहले की तरह 44 में से 28 क्रेडिट हासिल करना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि विश्वविद्यालय के इस फैसले पर शिक्षकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब छात्र तीसरे सेमेस्टर में पहुंच चुके हैं, तब प्रमोशन के मानदंडों में बदलाव करने का औचित्य क्या है?
दिल्ली विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की ओर से 1 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 के उन छात्रों को प्रमोशन के लिए 44 में से 28 क्रेडिट हासिल करने की अनिवार्यता से छूट दी गई है, जिन्होंने एक साल की पढ़ाई पूरी कर ली है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल 2025-26 बैच के लिए एक बार के उपाय के रूप में लागू होगी। अगले बैच के विद्यार्थी इसके लिए दावा नहीं कर सकेंगे। प्रमोशन से जुड़े पहले के नोटिफिकेशन के अन्य सभी प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे।
अधिसूचना में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद यह निर्णय लिया गया है। इसका मतलब है कि विश्वविद्यालय ने इस विशेष बैच के लिए क्रेडिट की निर्धारित शर्त में राहत दी है, लेकिन प्रमोशन से जुड़े बाकी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया है।
फैसले के समय पर शिक्षकों ने उठाए सवाल
पीटीआई की खबर के मुताबिक विश्वविद्यालय के इस फैसले के बाद शिक्षकों के एक वर्ग ने इसकी वजह और समय को लेकर सवाल उठाए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DTF) की सचिव और मिरांडा हाउस की एसोसिएट प्रोफेसर आभा देव हबीब ने पूछा कि छात्रों के लिए निर्धारित क्रेडिट की शर्त में छूट देने का आधार क्या है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन परिस्थितियों या कठिनाइयों के चलते यह राहत देने की जरूरत पड़ी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या बड़ी संख्या में छात्र पहले से तय प्रमोशन मानदंडों को पूरा नहीं कर पाए थे और क्या इसी वजह से यह निर्णय लिया गया।
हबीब ने पहले भी शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों में बदलाव किए जाने के उदाहरणों का हवाला देते हुए यह आशंका भी जताई कि कहीं इस फैसले का लाभ चुनिंदा छात्रों तक ही सीमित न रह जाए।
तीसरा सेमेस्टर शुरू होने के बाद क्यों बदले नियम?
शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता फैसले के समय को लेकर है। आभा देव हबीब के मुताबिक तीसरे सेमेस्टर की कक्षाएं 28 जुलाई से शुरू हो गई थीं, जबकि परीक्षा परिणाम अगस्त तक जारी किए जा रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब छात्र पहले ही अगले सेमेस्टर में पढ़ाई शुरू कर चुके थे, तो उसके बाद प्रमोशन के मानदंडों में बदलाव क्यों किया गया?
हबीब ने कहा कि विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और स्थिरता बेहद अहम है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, 'एग्जाम सिस्टम की पारदर्शिता और स्थिरता एक अच्छे विश्वविद्यालय की खासियत होती हैं। अब इसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है।"
छात्रों पर क्या होगा फैसले का असर
दिल्ली विश्वविद्यालय के 2025-26 बैच के छात्रों को पहले साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रमोशन के लिए अब 44 में से 28 क्रेडिट हासिल करने की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। यह राहत केवल संबंधित बैच के लिए है। विश्वविद्यालय ने इसे स्थायी बदलाव नहीं बताया है। इसलिए इसे सभी बैचों के लिए प्रमोशन नियमों में बदलाव नहीं माना जा सकता।
फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा क्रेडिट की शर्त में दी गई राहत से ज्यादा यह है कि विश्वविद्यालय ने यह फैसला किस आधार पर लिया और शैक्षणिक सत्र के आगे बढ़ जाने के बाद नियमों में बदलाव क्यों किया गया। शिक्षकों ने निर्णय की वजह और प्रक्रिया को लेकर अधिक स्पष्टता की मांग की है।


