शरणार्थी से पासपोर्ट कैसे मांग सकते हैं? डीयू की शर्त पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्नातक दाखिले के लिए पासपोर्ट की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली म्यांमार के शरणार्थी की याचिका पर दिल्ली विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है।

दिल्ली उच्च न्यायायल ने शुक्रवार को म्यांमार के एक शरणार्थी की याचिका पर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से जवाब मांगा है। इस याचिका में विश्वविद्यालय की उस शर्त को चुनौती दी गई है जिसके तहत विदेशी छात्रों को स्नात्तक कोर्स में दाखिले के लिए वैध गैर-भारतीय पासपोर्ट की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने विश्वविद्यालय के रुख पर सवाल उठाते हुए उसके वकील से पूछा कि एक शरणार्थी से पासपोर्ट की उम्मीद कैसे कर सकते हें।
पीठ ने विश्वविद्यालय को जवाब देने के लिए दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की गई है। यह याचिका यूएनएचसीआर से मान्यता प्राप्त म्यांमार के शरणार्थी हेनरी हटू आंग लिन ने वकील अशोक अग्रवाल व कुमार उत्कर्ष के जरिए दायर की है। याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय के विदेशी छात्र रजिस्ट्री (एफएसआर) दाखिला बुलेटिन में पासपोर्ट की जरूरत वाली शर्त की वैधता को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता ने क्या की मांग
इसमें कहा गया है कि यह शर्त गैर-कानूनी रूप से उन मान्यता प्राप्त शरणार्थी को बाहर करती है जो अपनी स्थिति के कारण उन देशों से पासपोर्ट नहीं ले सकते, जिन्हें वे उत्पीड़न के डर से छोड़कर आए थे। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि या तो इस शर्त को रद्द किया जाए या इसमें बदलाव किया जाए। विश्वविद्यालय को निर्देश दिया जाए कि वह पासपोर्ट दिखाए बिना विदेशी छात्र श्रेणी के तहत उनके दाखिले के आवेदन पर विचार करे।
याचिका के अनुसार हेनरी व उनका परिवार 2022 में राजनीतिक अस्थिरता, हिंसा व उत्पीड़न के डर से म्यांमार से भाग आए थे। तब से संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त की सुरक्षा में भारत में रह रहे हैं। भारत में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने 28 मई, 2026 को विदेशी छात्र रजिस्ट्री के माध्यम से दिल्ली विश्वविद्यालय में 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए दाखिले के लिए आवेदन किया।
आवेदन अधूरा है: दिल्ली विश्वविद्यालय
हालांकि विश्वविद्यालय ने उन्हें सूचित किया कि उनका आवेदन अधूरा है क्योंकि उन्होंने पासपोर्ट जमा नहीं किया था। पासपोर्ट के बजाय यूएनएचसीआर शरणार्थी दस्तावेज़ स्वीकार करने का अनुरोध करने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली। याचिकाकर्ता का तर्क है कि पासपोर्ट की शर्त का शैक्षणिक योग्यता से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि उसकी पहचान व शैक्षणिक योग्यता पहले ही यूएनएचसीआर रिकॉर्ड व मान्यता प्राप्त भारतीय शिक्षा बोर्डों द्वारा जारी प्रमाणपत्रों से साबित हो चुकी है। उसने मिजोरम बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से 10वीं और मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से 12वीं (साइंस) की पढ़ाई पूरी की है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


