DPharma : डीफार्मा आयुर्वेद कोर्स के लिए नहीं मिल रहे छात्र, बढ़िया करियर के बावजूद क्यों खाली रह जा रही सीटें
झारखंड के युवाओं में इस क्षेत्र के प्रति रुचि कम होती दिख रही है। सरकारी संस्थान, राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी महाविद्यालय साहिबगंज में डिप्लोमा इन फार्मेसी डी.फार्मा, आयुर्वेद)की पढ़ाई के लिए छात्र नहीं मिल रहे हैं।

आयुर्वेद प्राचीन काल से ही भारतीय चिकित्सा पद्धति का अभिन्न अंग रहा है और वर्तमान में आयुर्वेदिक फार्मेसी एक आकर्षक करियर विकल्प के रूप में उभर रहा है। इसके बावजूद, झारखंड के युवाओं में इस क्षेत्र के प्रति रुचि कम होती दिख रही है। आलम यह है कि राज्य के एकमात्र सरकारी संस्थान, राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी महाविद्यालय (साहिबगंज) में डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी.फार्मा, आयुर्वेद) की पढ़ाई के लिए छात्र नहीं मिल रहे हैं।
झारखंड राज्य आयुष चिकित्सा परिषद की ओर से शैक्षणिक सत्र 2025-27 में 30 सीटों पर नामांकन के लिए 17 अक्तूबर को आईएससी/10+2 (विज्ञान) उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। आवेदन की अंतिम तिथि 29 नवंबर निर्धारित थी, लेकिन इस अवधि तक परिषद को महज 25 आवेदन ही प्राप्त हुए। सीटों की तुलना में आवेदनों की संख्या कम देखते हुए परिषद ने अब आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 16 जनवरी 2026 कर दी है। इसके लिए अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 01 अगस्त 2025 को 17 वर्ष होनी अनिवार्य है।
झारखंड का स्थानीय निवासी होना अनिवार्य
राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी महाविद्यालय में नामांकन के लिए अनिवार्य शर्त यह है कि अभ्यर्थी झारखंड का स्थायी निवासी हो। बिना स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। नियम के अनुसार, अनुमंडल पदाधिकारी स्तर से 02 जून 2016 के बाद या अंचलाधिकारी स्तर से 19 जुलाई 2019 के बाद निर्गत प्रमाण पत्र ही मान्य होंगे। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी आय एवं संपत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही आरक्षण का लाभ मिलेगा। विज्ञापन प्रकाशन की तिथि तक राज्य सरकार द्वारा लागू सभी आरक्षण नियम इस नामांकन प्रक्रिया में प्रभावी होंगे।
पिछले साल भी खाली रह गई थीं सीटें
साहिबगंज स्थित इस इकलौते राजकीय कॉलेज में नामांकन की स्थिति पिछले कई वर्षों से निराशाजनक बनी हुई है। पिछले शैक्षणिक सत्र (2024-26) में भी 30 सीटों के लिए निर्धारित तिथि तक मात्र 37 आवेदन आए थे। इनमें से स्क्रूटनी और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद केवल 15 छात्र ही नामांकन के योग्य पाए गए, जिससे आधी सीटें खाली रह गईं। बाद में परिषद ने आवेदन की तिथि बढ़ाकर 30 अक्तूबर की थी, फिर भी पांच सीटें अंततः रिक्त ही रह गईं।

लेखक के बारे में
Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
15 से अधिक सालों का अनुभव
पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।
विजन
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विशेषज्ञता
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स्कूलिंग के बाद करियर की राहें
यूपीएससी, जेईई मेन व नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं के टॉपरों के इंटरव्यू
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