7 लाख छात्र, 90 कॉलेज, एक दिन में 2.28 लाख परीक्षार्थी; DU ने एग्जाम लेकर रच दिया इतिहास
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने NEP लागू होने के बाद अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा कराई। करीब सात लाख छात्रों, 90 कॉलेजों और एक दिन में 2.28 लाख परीक्षार्थियों के साथ DU ने नया रिकॉर्ड बनाया।

दिल्ली यूनिवर्सिटी की परीक्षा शाखा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद अब तक का सबसे बड़ा परीक्षा आयोजन कर दिखाया है। सात लाख से ज्यादा छात्रों, करीब 90 कॉलेजों और एक ही दिन में 2.28 लाख परीक्षार्थियों की मौजूदगी ने इस परीक्षा को ऐतिहासिक बना दिया। छात्र संख्या के लिहाज से यह DU की अब तक की सबसे भारी परीक्षा मानी जा रही है, जिसने पूरी परीक्षा व्यवस्था की क्षमता और तैयारी को एक नई कसौटी पर खड़ा कर दिया।
परीक्षा की तारीख आई, रिकॉर्ड भी बना
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने नवंबर-दिसंबर 2025 सत्र में सेमेस्टर परीक्षाओं का आयोजन किया, जिसमें नियमित कॉलेजों के साथ-साथ स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के छात्र भी शामिल हुए। परीक्षा शाखा के मुताबिक, यह आयोजन NEP के बाद का सबसे व्यापक अभ्यास रहा, जिसमें छात्र संख्या, प्रश्नपत्रों और मूल्यांकन व्यवस्था, तीनों स्तरों पर अभूतपूर्व विस्तार देखने को मिला।
सात लाख से ज्यादा छात्र, 90 कॉलेज
DU की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस परीक्षा प्रक्रिया में सात लाख से अधिक छात्र शामिल हुए। परीक्षा करीब 90 कॉलेजों और संस्थानों में कराई गई, जिसमें स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की बड़ी भागीदारी रही। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालय को लॉजिस्टिक्स, टाइम टेबल, प्रश्नपत्र वितरण और मूल्यांकन, हर मोर्चे पर अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ी।
15 हजार प्रश्नपत्र, 10 हजार से ज्यादा शिक्षक
परीक्षा की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 15,000 अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार किए गए। इनके मूल्यांकन के लिए 10,000 से ज्यादा शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई। समय पर और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए कई सेंट्रल इवैल्यूएशन सेंटर्स बनाए गए, जहां उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया।
एक दिन में 2.28 लाख छात्र, 904 प्रश्नपत्र
दिसंबर महीने में एक ऐसा दिन भी आया जब एक ही दिन में 2.28 लाख DU छात्रों ने परीक्षा दी। इस दिन कुल 904 अलग-अलग प्रश्नपत्र आयोजित किए गए। परीक्षा शाखा की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, इस भारी संख्या में छात्रों को संभालना अपने आप में बड़ी चुनौती था, जिसे कई स्तरों पर समन्वय के जरिए पूरा किया गया।
अंडरग्रेजुएट छात्रों का दबदबा
इस दिन परीक्षा देने वालों में सबसे ज्यादा संख्या अंडरग्रेजुएट छात्रों की रही। नियमित कॉलेजों से 1,61,366 छात्र परीक्षा में बैठे। वहीं स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के 65,413 अंडरग्रेजुएट और 2,002 पोस्टग्रेजुएट छात्र शामिल हुए। उस दिन नियमित पोस्टग्रेजुएट की कोई परीक्षा नहीं थी, जिससे कुल परीक्षार्थियों में SOL की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रही।
हर सत्र के साथ बढ़ता दबाव
आंकड़े बताते हैं कि 2021-22 से 2025- 26 के बीच DU की परीक्षा प्रणाली पर दबाव लगातार बढ़ा है। जहां 2024 की इसी अवधि में 228 प्रश्नपत्र संभाले गए थे, वहीं नवंबर- दिसंबर 2025 में यह संख्या बढ़कर 941 तक पहुंच गई। मई- जून 2025 और नवंबर- दिसंबर 2025 की तुलना में भी कई दिन ऐसे रहे जब 800 से ज्यादा प्रश्नपत्र एक साथ कराए गए।
समन्वय से संभाली गई व्यवस्था
विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षा को सफलतापूर्वक आयोजित करना केवल मजबूत समन्वय से ही संभव हो पाया। शेड्यूलिंग से लेकर प्रश्नपत्र वितरण, मूल्यांकन और रिजल्ट प्रोसेसिंग तक हर स्तर पर टीमों ने दिन-रात काम किया, ताकि छात्रों को समय पर और निष्पक्ष परिणाम मिल सकें।

लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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