बकरीद पर छूटी परीक्षा तो कब होगा दोबारा एग्जाम, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने तय कर दी तारीख
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने ईद-उल-जुहा यानी बकरीद के कारण 28 मई की परीक्षा नहीं दे पाने वाले छात्रों को बड़ी राहत दी है। छात्र अब 4 जुलाई 2026 के बाद परीक्षा दे सकेंगे।

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने ईद-उल-जुहा के मौके पर छात्रों को बड़ी राहत दी है। जिन विद्यार्थियों की परीक्षा 28 मई 2026 को तय थी और जो बकरा ईद की वजह से एग्जाम नहीं दे पाएंगे, उन्हें अब बाद में परीक्षा देने का मौका मिलेगा। यूनिवर्सिटी के इस फैसले से हजारों छात्रों को राहत मिली है, क्योंकि इस बार ईद की तारीख को लेकर आखिरी समय में बदलाव हुआ था और कई राज्यों में छुट्टियों का शेड्यूल भी बदल गया। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने साफ कहा है कि ऐसे छात्र 4 जुलाई 2026 के बाद आयोजित होने वाली विशेष परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को अपने कॉलेज के प्रिंसिपल या विभागाध्यक्ष को ईमेल भेजकर जानकारी देनी होगी। यूनिवर्सिटी ने यह जानकारी अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा की।
ईद की तारीख बदलने से बढ़ी थी परेशानी
दरअसल, पहले माना जा रहा था कि देश के कई हिस्सों में ईद-उल-अजहा 27 मई को मनाई जाएगी। लेकिन बाद में चांद दिखाई न देने की पुष्टि होने के बाद धार्मिक संस्थाओं ने त्योहार की तारीख 28 मई घोषित कर दी। इसके बाद कई छात्रों और अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई, क्योंकि उसी दिन दिल्ली यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं भी तय थीं। कई राज्यों में सरकारी छुट्टियों के कैलेंडर में भी बदलाव देखने को मिला। ऐसे में छात्रों ने परीक्षा की तारीख को लेकर राहत की मांग की थी। अब यूनिवर्सिटी के इस फैसले को छात्रों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।
छात्रों को क्या करना होगा
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा है कि जिन छात्रों को ईद-उल-जुहा के कारण परीक्षा में शामिल होने में दिक्कत है, उन्हें अपने कॉलेज या विभाग को ईमेल के जरिए सूचित करना होगा। बिना सूचना दिए विशेष अवसर का लाभ नहीं मिल पाएगा। यूनिवर्सिटी की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा बाद में आयोजित की जाएगी और छात्रों का अकादमिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
PG एडमिशन को लेकर भी DU का बड़ा अपडेट
इसी बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी ने पोस्टग्रेजुएट एडमिशन 2026 को लेकर भी अहम जानकारी साझा की है। यूनिवर्सिटी 29 मई को दोपहर 3 बजे एक विशेष वेबिनार आयोजित करेगी। इस वेबिनार में छात्रों को Common Seat Allocation System यानी CSAS 2026 के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। यूनिवर्सिटी के मुताबिक एडमिशन प्रक्रिया, सीट आवंटन, जरूरी नियम और छात्रों के सवालों के जवाब इस ऑनलाइन सत्र में दिए जाएंगे। इसमें एडमिशन डीन प्रोफेसर हनीत गांधी और जॉइंट डीन प्रोफेसर आनंद सोनकर भी शामिल होंगे।
CUET-PG छात्रों को मिलेगा सुधार का मौका
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने CUET-PG 2026 से जुड़े छात्रों के लिए भी राहत भरी खबर दी है। जिन उम्मीदवारों की सोशल कैटेगरी डिटेल्स NTA-API रिकॉर्ड से अलग हैं, उन्हें CSAS(PG)-2026 पोर्टल पर एक बार सुधार का मौका दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी ने बताया कि जिन छात्रों ने पहले ही अपना फॉर्म लॉक कर दिया था या बिना सुधार किए फॉर्म जमा कर दिया था, उनके लिए अलग से करेक्शन विंडो खोली जाएगी। इसकी तारीख जल्द घोषित की जाएगी। हालांकि यूनिवर्सिटी ने यह भी साफ कर दिया है कि दिव्यांग स्टेटस में किसी तरह का बदलाव करने की अनुमति नहीं होगी। इससे जुड़े नियम पहले जैसे ही लागू रहेंगे।
छात्रों और अभिभावकों में राहत
दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों में राहत का माहौल है। कई छात्रों का कहना था कि त्योहार और परीक्षा एक ही दिन होने से वे मुश्किल में पड़ गए थे। अब विशेष परीक्षा का विकल्प मिलने से उन्हें बड़ी चिंता से राहत मिली है। गौरतलब है कि ऐसे फैसले छात्रों की धार्मिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए, ताकि किसी भी विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित न हो।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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