दिल्ली यूनिवर्सिटी ने पीजी इतिहास कोर्स से दिल्ली सल्तनत का पेपर हटाया, क्या बताई वजह
डीयू की ओर से हाल ही में जारी किए गए नए पाठ्यक्रम में इतिहास विभाग के कई पुराने और अहम वैकल्पिक पाठ्यक्रमों को शामिल नहीं किया गया है।

पीजी हिस्ट्री के छात्रों के तीसरे सेमेस्टर में कुछ पेपर हटाए गए हैं। इनमें दिल्ली सल्तनत, हिस्ट्री ऑफ नॉर्थ इंडिया 1400-1550 ईसापूर्व, जेंडर एंड वीमेन इन अर्ली इंडिया 1500 ईसापूर्व से 1000 ईस्वी तक, प्राचीन भारत में राजनीतिक प्रक्रियाएं और प्राचीन भारतीय साहित्य में धर्म और समाज जैसे विषय शामिल हैं। नए सिलेबस में इतिहास विभाग के कई पुराने पाठ्यक्रमों को शामिल नहीं किया गया है। इनमें सबसे चर्चित पाठ्यक्रम “द दिल्ली सल्तनत: स्ट्रक्चर्स ऑफ अथॉरिटी इन मीडीवल नॉर्थ इंडिया (13वीं-14वीं शताब्दी)” है, जिसे कई दशकों से पढ़ाया जा रहा था।
जिन पाठ्यक्रमों को हटाया गया है, वे छात्रों को दिल्ली सल्तनत के गठन, उसकी राजनीतिक संरचना, शासन व्यवस्था, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विकास को समझने का अवसर देते थे। इससे छात्र यह जान पाते थे कि मध्यकालीन भारत में सत्ता कैसे स्थापित हुई, उसका संचालन किस प्रकार हुआ और उस दौर की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियां कैसी थीं। लेकिन अब यह विषय नए सिलेबस में दिखाई नहीं दे रहे हैं।
तीसरे सेमेस्टर में कुछ और ड्रॉप हुई चीजों में “हिस्ट्री ऑफ नॉर्थ इंडिया, 1400-1550 ई”, “जेंडर एंड वूमेन इन अर्ली इंडिया: 1500 BCE से 1000 CE” जैसे पेपर शामिल हैं। “पॉलिटिकल प्रोसेसेज एंड स्ट्रक्चर ऑफ पॉलिटीज इन एंशिएंट इंडिया” तथा “रिलिजन एंड सोसाइटी इन एंशिएंट इंडियन लिटरेचर” जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम भी अंतिम अधिसूचना से बाहर कर दिए गए हैं। ये सब पाठ्यक्रम DU के अगस्त में नोटिफाई किए गए पोस्टग्रेजुएट सिलेबस में शामिल नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ऑफिशियल रिकॉर्ड से पता चलता है कि डीयू के इतिहास विभाग द्वारा सुझाए किए गए 38 डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव (DSE) पेपर में से 16 को सेमेस्टर III के सिलेबस में अधिसूचित किया गया था।
कोर्स रिव्यू किए गए थे, रोके नहीं गए थे
DU के एकेडमिक अफेयर्स के डीन के रत्नबली ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि किसी भी कोर्स को रोका नहीं गया था। के. रत्नाबली ने कहा- “हम सब कुछ एकेडमिक काउंसिल के पास ले गए, जिसने वाइस-चांसलर को उन कोर्स को देखने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने की आजादी दी, जिनका रिव्यू जरूरी था। रत्नाबली ने कहा “मुद्दा यह था कि स्टैंडिंग कमेटी से पेपर्स पास होने के बाद भी, डिपार्टमेंट ने कुछ अप्रूव्ड सिलेबस में बदलाव किए थे.... पेपर्स जोड़े या हटाए गए, यूनिट्स बदली गईं और रीडिंग्स हटा दी गईं या बदल दी गईं। कमेटी के रिव्यू पूरा करने के बाद कुछ और पेपर्स के बारे में भी नोटिफाई किए जाने की उम्मीद है।” इस मुद्दे पर इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में विशेषज्ञ समिति की समीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों ने बताया कि समिति ने इतिहास विभाग को कुछ पाठ्यक्रमों में संशोधन करने के सुझाव दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस समीक्षा का उद्देश्य पाठ्यक्रम को भारत के विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों का अधिक संतुलित और व्यापक प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ उसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप बनाना था। समिति का मानना है कि नए सिलेबस में भारतीय इतिहास की विविधता को बेहतर ढंग से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों को देश के अलग-अलग क्षेत्रों और समय अवधियों के इतिहास का समग्र दृष्टिकोण मिल सके।


