कोर्ट ने बरी युवक को दिल्ली पुलिस में भर्ती से रोका, कहा- बाइज्जत और सूबतों के अभाव में रिहा होने में अंतर

Mar 11, 2026 06:27 am ISTPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हेमलता कौशिक
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दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसे शख्स को दिल्ली पुलिस का हिस्सा बनने से रोकने को सही माना है जिस पर गंभीर अपराधिक मुकदमा दर्ज हो चुका हैं। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों की खामी के कारण बरी होने को निरपराध नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने बरी युवक को दिल्ली पुलिस में भर्ती से रोका, कहा- बाइज्जत और सूबतों के अभाव में रिहा होने में अंतर

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसे शख्स को अनुशासनात्मक फोर्स का हिस्सा बनने से रोकने को सही माना है जिस पर गंभीर अपराधिक मुकदमा दर्ज हो चुका हैं। हालांकि, यह शख्स इस मामले से बरी हो गया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अदालत से बाइज्जत बरी होना व परिस्थितियों के कारण साक्ष्यों की कमी से बरी होने में अंतर है। इसलिए साक्ष्यों की खामी के कारण बरी होने को निरपराध नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल व न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने युवक की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह दिल्ली पुलिस जैसी अनुशासनात्मक फोर्स का हिस्सा बनने के लायक नहीं है। वह एक गंभीर अपराध के मामले में आरोपी रहा है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत से बरी होना ही काफी नहीं होता। किसी व्यक्ति को निर्दोष तब माना जाता है जब उसके खिलाफ कोई साक्ष्य या गवाह ही ना मिले, लेकिन जहां गवाह अपने बयानों से मुकर जाएं अथवा आरोपी व गवाहों के बीच समझौता होने की वजह से आरोपी बरी हो जाए, तो उसे निर्दोष नहीं माना जा सकता। पीठ ने इस युवक की दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल पद पर नियुक्ति पर रोक को उचित माना है।

पेश मामले के मुताबिक, याचिकाकर्ता युवक के पिता दिल्ली पुलिस में पदस्थ थे। उनकी वर्ष 2013 में मृत्यु हो गई। याचिकाकर्ता का नाम साल 2014 में दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल (लिपिक वर्ग) के पद पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए मंज़ूर किया गया। इस बीच इस युवक के चरित्र व पिछली जानकारी के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई। चरित्र सत्यापन के दौरान यह पता चला कि याचिकाकर्ता पर अलग-अलग प्रावधान के तहत प्राथमिकी नंबर 138/2009 के जरिए आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।

गवाहों के मुकरने पर वर्ष 2011 में बरी हुआ था

दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल पद पर नियुक्ति की तमाम प्रक्रियाएं पूरी कर चुके युवक के चरित्र सत्यापन के दौरान उसके खिलाफ पूर्व में गंभीर अपराध का मामला सामने आया। हालांकि, इस मामले में वह वर्ष 2011 में ही बरी हो चुका था। संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा उसके मुकदमे की फाइल देखने के बाद पता चला कि उसके बरी होने का कारण चश्मदीद गवाहों मुकरना रहा। साथ ही पीड़ित पक्ष से समझौता भी सामने आया। इसके बाद अदालत ने बदली परिस्थितियों के मद्देजनर मजबूरी में बरी किया।

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


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