दिल्ली में स्कूल फीस पर बड़ा अपडेट, हाईकोर्ट ने सरकार की नई व्यवस्था पर लगाई रोक

Feb 28, 2026 08:57 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की फीस तय करने वाली समितियों पर रोक लगाई। 2026-27 सत्र में स्कूल पुरानी फीस ही लेंगे। जानिए क्या है पूरा मामला।

दिल्ली में स्कूल फीस पर बड़ा अपडेट, हाईकोर्ट ने सरकार की नई व्यवस्था पर लगाई रोक

राजधानी दिल्ली में स्कूल फीस को लेकर चल रही खींचतान के बीच बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार की उस अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें निजी स्कूलों को फीस तय करने के लिए विशेष शुल्क विनियमन समितियां बनाने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने साफ कहा है कि अगली सुनवाई तक स्कूलों को ऐसी समितियां बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इस आदेश का सीधा असर लाखों अभिभावकों और करीब 1,700 निजी स्कूलों पर पड़ा है, क्योंकि अब नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए फीस बढ़ाने का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है।

क्या कहा अदालत ने

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी। यानी स्कूलों को अभी नई फीस तय करने की प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं है।

मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को तय की गई है। इसका मतलब यह हुआ कि 2026-27 सत्र में भी वही फीस ली जाएगी जो स्कूलों ने 2025-26 में ली थी। इससे अचानक फीस बढ़ने की आशंका पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।

सरकार क्या चाहती थी

दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से "दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025" लागू किया था। सरकार का कहना था कि कई स्कूल बिना स्पष्ट आधार के फीस बढ़ा देते हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक दबाव पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत हर स्कूल में एक समिति बननी थी, जो यह तय करती कि फीस बढ़ोतरी उचित है या नहीं। सरकार का दावा था कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों को राहत देने के लिए बनाया गया है।

नया कानून कितना बड़ा बदलाव था

इस अधिनियम को 8 अगस्त को दिल्ली विधानसभा में लंबी बहस के बाद पारित किया गया था। सरकार के मुताबिक, यह कानून 1973 के पुराने नियमों से कहीं ज्यादा व्यापक है। पुराना कानून लगभग 300 स्कूलों तक सीमित था, जबकि नया कानून राजधानी के लगभग सभी 1,700 निजी स्कूलों को अपने दायरे में लाता है। यानी पहली बार इतने बड़े स्तर पर फीस व्यवस्था को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा था

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में इस कानून को शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार बताया था। उन्होंने कहा था कि यह कदम अभिभावकों और छात्रों के हित में लिया गया है और इससे फीस निर्धारण की प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनेगी। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य शिक्षा को व्यवसाय बनने से रोकना और संतुलित व्यवस्था बनाना था।

शिक्षा मंत्री का बयान

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने भी कानून का समर्थन करते हुए कहा था कि यह विधेयक सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी कहा था कि जो निजी स्कूल इस कानून से असहज हैं, वे चाहें तो अपनी सरकारी मान्यता छोड़ सकते हैं। यह बयान अपने आप में काफी सख्त माना गया था और उसी के बाद से स्कूल प्रबंधन और सरकार के बीच विवाद तेज हो गया था।

अब अभिभावकों और स्कूलों के लिए क्या मायने

अदालत के इस फैसले से सबसे बड़ी राहत अभिभावकों को मिली है, क्योंकि नए सत्र से पहले संभावित फीस वृद्धि पर फिलहाल रोक लग गई है। स्कूलों के लिए भी यह एक अस्थायी राहत है, क्योंकि उन्हें नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने की जल्दी नहीं रहेगी। लेकिन यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। 12 मार्च की सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि सरकार का कानून लागू रहेगा या उसमें बदलाव होगा या फिर उसे निरस्त किया जाएगा।

क्यों अहम है यह मामला

दिल्ली जैसे बड़े शिक्षा केंद्र में निजी स्कूलों की फीस लंबे समय से बहस का मुद्दा रही है। हर साल फीस बढ़ोतरी को लेकर अभिभावकों के विरोध, स्कूलों की दलीलें और सरकार की दखल की मांग सामने आती रही है। अब यह विवाद सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी लड़ाई बन चुका है, जिसका असर आने वाले वर्षों की शिक्षा नीति पर भी पड़ सकता है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

और पढ़ें
लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़, Bihar Board Result 2026, CBSE Board Result 2026, UP Board Result 2026 और सरकारी जॉब अपडेट्स हिंदी में पाने के लिए आज ही Live Hindustan App डाउनलोड करें।