मैटरनिटी लीव से लौटीं CA को क्लर्क लेवल का काम देना पड़ा भारी, दिल्ली हाई कोर्ट का कंपनी पर 10 लाख का जुर्माना

By Prachi
लाइव हिन्दुस्तान
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दिल्ली हाई कोर्ट ने मैटरनिटी लीव से लौटीं CA राखी बिष्ट को क्लर्क लेवल की जिम्मेदारियां देने पर कंपनी को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने और केंद्र सरकार को कड़े नियम बनाने का निर्देश दिया है।

CA Woman Maternity Leave
मैटरनिटी लीव से लौटीं CA को क्लर्क लेवल का काम देना पड़ा भारी

आज के आधुनिक दौर में जहां महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत का परचम लहरा रही हैं, वहीं कई बार ऑफिस में उन्हें केवल मां बनने की वजह से प्रोफेशनल भेदभाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जो देश की हर कामकाजी महिला के चेहरे पर मुस्कान ले आएगा। अदालत ने स्पष्ट और सख्त शब्दों में कहा है कि मां बनना किसी भी कामकाजी महिला के करियर में रुकावट, पद में गिरावट या अपमान का कारण नहीं बन सकता। हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव से लौटने के बाद एक सीए महिला अधिकारी की जिम्मेदारियां घटाने वाली प्राइवेट कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना और 1.5 लाख रुपये का कानूनी खर्च देने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला?

यह याचिका 14 साल से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) का काम कर रहीं राखी बिष्ट द्वारा दायर की गई थी। राखी बिष्ट जून 2022 में एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर अकाउंटिंग के पद पर 2.6 लाख रुपये प्रति माह के वेतन पर शामिल हुई थीं। मई 2023 में उन्होंने मैनेजमेंट को अपनी प्रेग्नेंसी की जानकारी दी और दिसंबर 2023 से मैटरनिटी लीव पर चली गईं। जुलाई 2024 में जब वे छुट्टियां बिताकर काम पर वापस लौटीं, तो उन्हें बड़ा झटका लगा। उनकी अनुपस्थिति में उनकी पुरानी पोस्ट और उनकी 5 सदस्यों की टीम किसी अन्य कर्मचारी को सौंप दी गई थी। इसके बजाय उन्हें ट्रेजरी विभाग में भेज दिया गया और उनके अधीन काम करने वाले सभी अधिकार छीन लिए गए। उनसे क्लर्क लेवल का काम कराया जाने लगा और जरूरी मीटिंग्स से उन्हें दरकिनार कर दिया गया।

कंपनी का तर्क और कोर्ट का फैसला

कंपनी ने अदालत में अपनी सफाई देते हुए दलील दी कि राखी बिष्ट का पद और सैलरी बिल्कुल भी कम नहीं की गई थी। कंपनी के अनुसार, उन्हें पूरी सैलरी दी जा रही थी, इसलिए मैटरनिटी कानून का कोई उल्लंघन नहीं हुआ। लेकिन जस्टिस सचिन दत्ता की बैंच ने कंपनी के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कंपनी के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि मैटरनिटी प्रोटेक्शन केवल नौकरी से न निकालने या सैलरी न घटाने तक सीमित नहीं है। शर्तों में काम का दर्जा, जिम्मेदारियां, रिपोर्टिंग हायरार्की और करियर में आगे बढ़ने के रास्ते भी शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा कि ईमेल से पता चलता है कि कंपनी ने राखी के लौटने पर उन्हें किसी भी तरह काम में खपाने जैसा व्यवहार किया, जो उनकी योग्यता और अनुभव का अनादर है।

संविधान से जुड़ा है मातृत्व का अधिकार

जस्टिस दत्ता ने कहा कि मां बनना और गर्भावस्था संरक्षित स्थितियां हैं, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 से सीधे तौर पर जुड़ी हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह अगले 6 महीने के भीतर सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत ऐसे नियम बनाए, ताकि मैटरनिटी लीव से लौटने वाली महिलाओं को वर्कप्लेस पर पूरा सुरक्षा कवच मिल सके और क्रैच जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित हो सकें।

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शॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।

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