CUET UG एग्जाम का पैटर्न क्या बदल जाएगा? आर्ट्स के लिए MCQ सही नहीं- संसदीय समिति
CUET UG 2026 Exam: सीयूईटी यूजी का एग्जाम पैटर्न क्या बदलने वाला है? संसदीय समिति ने कहा है कि सीयूईटी का MCQ फॉर्मेट ह्यूमनिटीज और सोशल साइंस के छात्रों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है।

CUET UG 2026: क्या देश के सबसे बड़े एंट्रेंस टेस्ट 'सीयूईटी' (CUET UG) का परीक्षा पैटर्न बदलने वाला है? यह सवाल इस समय देश भर के लाखों छात्रों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। देश के सबसे बड़े एंट्रेंस टेस्ट 'सीयूईटी' (CUET UG 2026) के परीक्षा पैटर्न को लेकर संसद की एक स्थायी समिति ने एक ऐसी रिपोर्ट पेश की है, जिसने पूरे शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अगुवाई वाले इस संसदीय पैनल का साफ कहना है कि चार विकल्पों वाला (MCQ) मौजूदा पैटर्न ह्यूमनिटीज (आर्ट्स) और सोशल साइंस के छात्रों का सही मूल्यांकन करने के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है।
स्वतंत्र सोच की राह में रोड़ा है MCQ फॉर्मेट
समिति ने मंगलवार को राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को अपनी 381वीं एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में बहुत ही कड़े शब्दों में कहा गया है कि साइंस और कॉमर्स जैसे विषयों में जहां फॉर्मूले और सटीक तथ्य मायने रखते हैं, वहां MCQ फॉर्मेट काम कर सकता है। लेकिन दर्शनशास्त्र, साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान जैसे विषय परिभाषा के तौर पर ही स्वतंत्र, आलोचनात्मक और सब्जेक्टिव नेचर पर आधारित होते हैं।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा, "मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन (MCQ) आधारित उत्तर विशेष रूप से ह्यूमनिटीज और सोशल साइंस के विषयों के लिए पूरी तरह सही नहीं हैं।" समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के मूल उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए सीयूईटी के प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और परीक्षा के पैटर्न की तुरंत समीक्षा करने की पुरजोर सिफारिश की है।
जेएनयू (JNU) की अनूठी चयन प्रक्रिया और स्वायत्तता पर चिंता
इस वन-साइज-फिट्स-ऑल सभी के लिए एक जैसा पैमाना अप्रोच की आलोचना करते हुए समिति ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) का विशेष रूप से उदाहरण दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि जेएनयू की अपनी पुरानी प्रवेश परीक्षा प्रणाली इस तरह से डिजाइन की गई थी, ताकि जेएनयू अधिनियम के तहत देश की सामाजिक-आर्थिक और क्षेत्रीय विविधता का पूरा प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। लेकिन एक केंद्रीकृत और पूरी तरह ऑब्जेक्टिव परीक्षा होने की वजह से जेएनयू जैसे संस्थान अपनी इस अनूठी और समावेशी चयन प्रक्रिया का पालन नहीं कर पा रहे हैं।
सरकार ने क्या दिया जवाब?
संसदीय पैनल की इन गंभीर आपत्तियों पर भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने जवाब देते हुए कहा कि इन सभी टिप्पणियों को 'विधिवत नोट' कर लिया गया है। इसके साथ ही, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) और परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को इस संबंध में जरूरी सुधार करने की सलाह दी गई है।
सरकार ने इसके बड़े नेटवर्क का बचाव करते हुए बताया कि सीयूईटी देश की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा बनकर उभरी है। साल 2025 में जहां 13.54 लाख आवेदकों ने पंजीकरण कराया था, वहीं इस साल यानी 2026 में 15.68 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी है, जिनके रिजल्ट और आंसर की जल्द ही जारी होने वाले हैं। सरकार के मुताबिक, शुरुआती कमियों से सीख लेते हुए डोमेन विषयों की संख्या को 63 से घटाकर 37 कर दिया गया है। बहरहाल, अब यह देखना होगा कि आने वाले समय में आर्ट्स के छात्रों के लिए इस परीक्षा में लॉन्ग या शॉर्ट आंसर वाले लिखित सवाल जोड़कर इसे कितना बदलते हैं।


