सीटीईटी के बदले पैटर्न ने उलझाया; सवाल समझते रह गए शिक्षक, छूट गया पूरा पेपर
सीटीईटी के बदले पैटर्न ने वर्षों बाद लौटे शिक्षकों की परीक्षा ली, जबकि एनसीईआरटी आधारित तैयारी वाले सामान्य अभ्यर्थियों को पेपर संतुलित और संभालने लायक लगा।

कई साल बाद दोबारा परीक्षा की मेज पर बैठे परिषदीय शिक्षक इस बार तैयारी से ज्यादा समय सवाल समझने में गंवाते दिखे। बदले पैटर्न ने रविवार को सीटीईटी में असली परीक्षा बना दी। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) दूसरे दिन रविवार को भी जिले भर के 49 परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित की गई। सुबह 9:30 से 12 बजे तक पहली पाली में उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा हुई, जबकि दोपहर 12:30 से शाम पांच बजे तक दूसरी पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा संपन्न कराई गई। एपीएस स्कूल समेत कई केंद्रों से बाहर निकलते परीक्षार्थियों के चेहरों पर राहत और उलझन दोनों भाव साफ नजर आए।
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा सवालों के बदले पैटर्न की रही। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई वर्षों के अंतराल से परीक्षा देने पहुंचे परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को प्रश्नपत्र ने खासा उलझाया। शिक्षकों का कहना था कि प्रश्न सीधे न होकर कथन आधारित और युग्मित रूप में पूछे गए, जिनमें विकल्पों को जोड़कर सही निष्कर्ष तक पहुंचना पड़ा। इस प्रक्रिया में सवाल समझने में ही काफी वक्त चला गया। नतीजा यह रहा कि कुछ शिक्षक पूरे प्रश्नपत्र तक नहीं पहुंच सके।
सीधे सवालों की आशा में शिक्षक
शिक्षकों के मुताबिक पहले की प्रतियोगी परीक्षाओं में सवाल अपेक्षाकृत सीधे और तथ्यात्मक होते थे, जिनमें उत्तर तक पहुंचना समयसाध्य नहीं होता था। अब अवधारणा पर आधारित और घुमाकर पूछे गए प्रश्नों के कारण रणनीति बदलनी पड़ रही है। खासकर कथन-आधारित प्रश्नों में शब्दों की बारीकी और विकल्पों के आपसी संबंध को समझना जरूरी हो गया है, जो समय का बड़ा हिस्सा ले गया।
हालांकि, सामान्य अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया थोड़ी अलग रही। उन्हें पेपर आसान से मध्यम स्तर का लगा। उनका कहना था कि तैयारी एनसीईआरटी की किताबों से की गई हो तो अधिकतर सवाल समझ में आ जाते हैं। दोनों पालियों के प्रश्नपत्र एनसीईआरटी आधारित रहे, जिससे पाठ्यक्रम से जुड़े उम्मीदवारों को राहत मिली।
कैसा रहे पेपर
प्राथमिक स्तर की परीक्षा में भाषा और सामान्य अध्ययन वाले हिस्से अपेक्षाकृत सरल बताए गए। इन सेक्शनों में बुनियादी समझ और रोजमर्रा के उदाहरणों पर आधारित प्रश्न पूछे गए थे, जिनमें ज्यादा घुमाव नहीं था। वहीं गणित का भाग कुछ अभ्यर्थियों को कठिन लगा। गणित में समय प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया, क्योंकि सवालों में अवधारणा को लागू करने के लिए एक से ज्यादा चरणों में सोचना पड़ा।
उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा में कुल मिलाकर प्रश्न सरल से सामान्य स्तर के बताए गए। गणित और विज्ञान या सामाजिक अध्ययन के हिस्से में अवधारणा आधारित सवालों की संख्या ज्यादा थी। इनमें पाठ्यवस्तु की गहरी समझ जरूरी थी, इसलिए कुछ उम्मीदवारों को यह भाग अपेक्षाकृत कठिन लगा। फिर भी जिन अभ्यर्थियों ने नियमित अध्ययन और अभ्यास किया था, उन्हें संतुलित अनुभव मिला।
क्या थी परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाएं
परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाएं सामान्य रहीं। प्रवेश से पहले पहचान पत्रों की जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और समय पर परीक्षा शुरू होने से अभ्यर्थियों को किसी तरह की बड़ी असुविधा नहीं हुई। बाहर निकलते समय अभ्यर्थियों के बीच सवालों और पैटर्न को लेकर चर्चा चलती रही। कई शिक्षक आपस में यह कहते सुने गए कि आने वाले समय में तैयारी का तरीका बदलना होगा और सिर्फ याददाश्त पर नहीं, बल्कि समझ पर ज्यादा जोर देना पड़ेगा।
सीटीईटी जैसी पात्रता परीक्षा में बदलता पैटर्न संकेत दे रहा है कि अब उम्मीदवारों से कक्षा में पढ़ाने की वास्तविक समझ और तार्किक सोच की अपेक्षा बढ़ गई है। परीक्षा के इस अनुभव ने एक बार फिर साफ कर दिया कि समय प्रबंधन और प्रश्न समझने की क्षमता अब सफलता की कुंजी बन चुकी है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


