कोई बॉस नहीं बताएगा; कॉर्पोरेट कल्चर की CA ने खोल दी पोल, वायरल पोस्ट कर देगा हैरान

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बेंगलुरु की सीए मीनल गोयल ने कॉर्पोरेट जगत की असलियत बताते हुए कहा है कि करियर में तरक्की के लिए सिर्फ कड़ी मेहनत ही नहीं, बल्कि सही कम्यूनिकेशन और खुद को साबित करना भी बेहद जरूरी है।

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आज के दौर में कॉर्पोरेट दुनिया किसी रेस के मैदान से कम नहीं है। आपको लगता होगा कि अगर आप अपने काम में माहिर हैं, रोज समय पर ऑफिस जाते हैं और अपना टारगेट पूरा करते हैं, तो आपकी तरक्की पक्की है। मगर क्या वाकई ऐसा होता है? सच्चाई इससे कोसों दूर है। सिर्फ अपना काम अच्छे से कर लेना ही कामयाबी की गारंटी नहीं रह गया है। लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए आपको ऑफिस के माहौल, आपसी तालमेल और खुद को सही तरीके से पेश करने का हुनर भी आना चाहिए। इसी कड़वे लेकिन बेहद जरूरी सच पर बेंगलुरु की रहने वाली चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) मीनल गोयल ने हाल ही में लिंक्डइन पर एक ऐसी पोस्ट लिखी है, जिसने कई लोगों की आंखें खोल दी हैं। मीनल ने कॉर्पोरेट जगत के उन अनकहे नियमों पर रोशनी डाली है, जिनके बारे में कोई कंपनी या एचआर कभी खुलकर बात नहीं करता।

जब कड़ी मेहनत के बाद भी नहीं मिलती तरक्की

हर युवा की तरह, सीए बनने के बाद मीनल गोयल को भी यही लगता था कि अगर आप ईमानदारी से काम करते हैं और वक्त पर नतीजे देते हैं, तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने करियर के शुरुआती दिनों में उनका यही मानना था। उन्हें लगता था कि मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है। लेकिन जब उन्होंने असल कॉर्पोरेट दुनिया में कदम रखा, तो उन्हें एक बड़ा झटका लगा। मीनल बताती हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा हैरानी काम के तरीके से नहीं हुई, बल्कि इस बात से हुई कि सिर्फ काम में अच्छा होना ही काफी नहीं है। कई बार ऐसा होता है कि आप अपना खून-पसीना एक कर देते हैं। आप एक्स्ट्रा घंटे काम करते हैं, वीकेंड्स पर भी लैपटॉप से चिपके रहते हैं, लेकिन जब तारीफ या प्रमोशन की बारी आती है, तो कोई और बाजी मार ले जाता है। आपकी मेहनत को वो पहचान नहीं मिल पाती, जिसके आप असल में हकदार होते हैं। यह स्थिति किसी को भी निराश कर सकती है, लेकिन यही कॉर्पोरेट का वो सच है जिसे जितनी जल्दी मान लिया जाए, उतना बेहतर है।

इस पर कोई नहीं करता बात

मीनल ने अपनी पोस्ट में इस बात का भी जिक्र किया कि कई बार ऐसे लोगों को ज्यादा तवज्जो मिल जाती है, जिनका कम्युनिकेशन या प्रेजेंटेशन स्किल अच्छा होता है। भले ही उनका असल काम आपके बराबर ही क्यों न हो। इसका सीधा सा मतलब यह है कि सिर्फ डेस्क पर बैठकर काम करना ही काफी नहीं है, बल्कि अपने काम को सही तरीके से 'दिखाना' भी आना चाहिए। जो दिखता है, वही बिकता है, यह कहावत कॉर्पोरेट दुनिया में पूरी तरह से फिट बैठती है। इसके अलावा, एक और डराने वाली सच्चाई यह भी है कि आपकी बरसों की मेहनत और शानदार ट्रैक रिकॉर्ड पर आपकी सिर्फ एक गलती भारी पड़ सकती है। आप किसी कंपनी के लिए कितने भी वफादार क्यों न हों, यह इस बात की बिल्कुल भी गारंटी नहीं है कि आपकी नौकरी हमेशा सुरक्षित रहेगी। यह सब सुनकर शायद आपको लगे कि यह दुनिया कितनी जालिम है। लेकिन मीनल का नजरिया यहां बिल्कुल अलग है।

मीनल के मुताबिक, भले ही शुरुआत में ये बातें दिल तोड़ने वाली लगें, लेकिन असल में ये आपको एक अजीब सी आजादी देती हैं। ये सच्चाई आपको यह समझाती है कि आपके करियर की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ आपकी है, आपकी कंपनी या आपके बॉस की नहीं। आप अपनी तरक्की के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रह सकते। मीनल अपने पुराने दिनों को याद करते हुए लिखती हैं कि उनके करियर के वो दौर, जब उन्हें लगा कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है या जब उन्होंने अपनी ही काबिलियत पर शक करना शुरू कर दिया था, असल में उनके लिए सबसे बड़ी सीख साबित हुए। उन मुश्किल हालातों ने उन्हें जो सबक सिखाए, वो दुनिया का कोई भी प्रमोशन या बड़ा पैकेज कभी नहीं सिखा सकता था।

मीनल ने क्या दी सलाह

अपनी पोस्ट के आखिर में मीनल गोयल एक बहुत ही पते की बात कहती हैं। उनका मानना है कि नौकरी हमारी प्रोफेशनल जिंदगी का एक अहम हिस्सा जरूर है, लेकिन खुद का विकास उससे भी कहीं ज्यादा मायने रखता है। जिस दिन आप यह सोचना शुरू कर देते हैं कि आप सिर्फ एक 9 से 5 की नौकरी नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपना एक लंबा करियर बना रहे हैं, उसी दिन से आपका नजरिया पूरी तरह से बदल जाता है। यह सोच आपको अपने भविष्य और तरक्की के लिए ज्यादा सोच-समझकर फैसले लेने की ताकत देती है। मीनल की यह कहानी सिर्फ उनकी नहीं है, बल्कि यह हर उस इंसान की कहानी है जो कॉर्पोरेट दुनिया की चकाचौंध के पीछे छिपी असलियत से रोज दो-चार होता है। उनका यह अनुभव हमें सिखाता है कि काम के साथ-साथ खुद को निखारना, सही तरीके से संवाद करना और अपनी कीमत समझना ही असली कामयाबी की कुंजी है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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