
किसने लिखा भारत का संविधान, अंबेडकर ने क्यों कही थी इसे जलाने की बात, संविधान दिवस पर जानें इसकी 25 दिलचस्प बातें
Constitution Day 2025 Facts : इस वर्ष संविधान दिवस का विषय हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नई दिल्ली में संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित मुख्य समारोह में शामिल होंगे।
Constitution Day 2025 : किसी भी देश को चलाने के लिए संविधान की जरूरत होती है। ये वो दस्तावेज हैं जिसमें सरकार कैसे बनेगी, उसके क्या काम व अधिकार होंगे, वो कैसे काम करेगी, नागरिकों के अधिकार व कर्त्तव्य क्या होंगे, उनकी रक्षा कैसे होगी, कानून क्या होंगे जैसी तमाम बातें समाहित होती हैं। भारत में 26 नवंबर का दिन संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन देश में राष्ट्रीय कानून दिवस भी मनाया जाता है। असल में संविधान को देश का सर्वोच्च कानून भी कहा जा सकता है। इस देश का चलाने वाला संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ था। यही वह दिन था जब पहली बार संविधान को अपनाया गया और राष्ट्र को समर्पित किया गया था। इसके बाद 26 जनवरी 1950 में इसे लागू किया गया था। इसलिए हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। डॉ. अंबेडकर को संविधान सभा की ड्राफ्टिंग सभा का अध्यक्ष होने के नाते संविधान निर्माता होने का श्रेय दिया जाता है। अंबेडकर को ही संविधान का जनक कहा जाता है। लेकिन भारतीय संविधान को लिखने वाले शख्स प्रेम बिहारी नारायण रायजादा थे। उन्होंने अपने हाथ से संविधान को लिखा था। पंडित नेहरू ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी।
क्या है इस वर्ष संविधान दिवस का विषय
इस वर्ष का विषय "हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान" है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नई दिल्ली में संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित मुख्य समारोह में शामिल होंगे।
Constitution Day of India : यहां पढ़ें भारतीय संविधान की खास बातें
1. साल 2015 में भारत सरकार ने 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया था। 2015 इसलिए खास वर्ष था क्योंकि उस साल संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की 125वीं जयंती मनाई जा रही थी।
2. भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसमें इंग्लिश के 1,46,385 शब्द हैं।
3. बैग ऑफ बोरोविंग - भारत के संविधान में कई देशों के संविधान की विशेषताओं को अपनाया गया है। भारत के संविधान को ‘Bag of Borrowings’ भी कहा जाता है क्योंकि इसके ज्यादातर प्रावधान अन्य देशों से लिए गए हैं। इसके कई हिस्से यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान के संविधान से लिये गये हैं। इसमें देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों, सरकार की भूमिका, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री की शक्तियों का वर्णन किया गया है। विधानपालिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का क्या काम है, उनकी देश को चलाने में क्या भूमिका है, इन सभी बातों का जिक्र संविधान में है।
4. - टाइप नहीं हाथ से लिखी है संविधान की ऑरिजनल कॉपी:
भारतीय संविधान की ये मूल प्रतियां टाइप या मुद्रित नहीं थीं। संविधान की असली कॉपी अंग्रेजी में प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने हाथ से लिखी थी। ये बेहतरीन कैलीग्राफी के जरिए इटैलिक अक्षरों में लिखी गई है। इसके हर पन्ने को शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) के कलाकारों राममनोहर सिन्हा और नंदलाल बोस ने सजाया था।
5. कहां रखी हैं संविधान की प्रतियां :
संविधान की हस्तलिखित प्रतियों को संसद के पुस्तकालय में हीलियम में रखा गया है। कांच से बने इन पारदर्शी मगर सीलबंद बक्सों में नाइट्रोजन भरी है, जो पांडुलिपि के कागज को खराब नहीं होने देती। ये दोनों बॉक्स अमेरिका की एक कंपनी ने कैलिफोर्निया में बनाए थे।
6. कैसी दिखती है मूल प्रति
- 16 इंच चौड़ी है संविधान की मूल प्रति
- 22 इंच लंबे चर्मपत्र शीटों पर लिखी गई है
- 251 पृष्ठ शामिल थे इस पांडुलिपि में
7. कितने दिन में हुआ तैयार
पूरा संविधान तैयार करने में 2 वर्ष, 11 माह 18 दिन लगे थे। यह 26 नवंबर, 1949 को पूरा हुआ था। 26 जनवरी, 1950 को भारत गणराज्य का यह संविधान लागू हुआ था।
8. - संविधान की असली प्रतियां हिंदी और इंग्लिश दो भाषाओं में लिखी गई थीं।
9- हाथ से लिखे हुए संविधान पर 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा के 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे जिसमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं। दो दिन बाद 26 जनवरी से यह संविधान देश में लागू हो गया था।
10. 15 महिलाएं कौन थीं -
संविधान सभा में जो 15 महिलाएं थीं, इनमें आरबीआई के पहले भारतीय गवर्नर सीडी देशमुख की पत्नी दुर्गाबाई देशमुख भी थीं। साथ ही, कुछ अन्य महिलाएं जैसे विजयलक्ष्मी पंडित, सरोजिनी नायडू, अम्मू स्वामीनाथन, दक्षिणायनी वेलायुदन, बेगम रायसुल का संविधान निर्माण में खासा योगदान रहा है।
11- 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा की आखिरी मीटिंग हुई। इसी मीटिंग के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम की घोषणा भारत के पहले राष्ट्रपति के तौर पर की गई।
12- मूल रूप से भारतीय संविधान में कुल 395 अनुच्छेद (22 भागों में विभाजित) और 8 अनुसूचियां थीं। संविधान के तीसरे भाग में मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है।
13. भारतीय संविधान की मूल संरचना भारत सरकार अधिनियम, 1935 पर आधारित है।
14. डॉ. भीमराव आंबेडकर को भारतीय संविधान का निर्माता कहा जाता है। भारत के पहले कानून मंत्री डॉ. भीमराम अंबेडकर संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष थे।
15. भारतीय संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के तीसरे भाग में अनुच्छेद 12 से 35 तक किया गया है।
16. भारत के संविधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया था। भारत की संविधान सभा ने संविधान के निर्माण से संबंधित विभिन्न कार्यों से निपटने के लिये कुल 13 समितियों का गठन किया था।
17. अंबेडकर ने क्यों कही थी संविधान जलाने की बात
साल 1953 में राज्यसभा में जब संविधान संशोधन को लेकर बहस चल रही थी, तब बाबा साहेब राज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने के मुद्दे पर अड़े थे। अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा पर भी वह अडिग थे। इस बहस के दौरान बाबासाहेब ने कहा कि छोटे तबके के लोगों को हमेशा डर लगा रहता है कि बहुसंख्यक उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा था, मेरे मित्र मुझसे कहते हैं कि संविधान मैंने बनाया है। मैं बताना चाहता हूं कि इसको जलाने वाला पहला इंसान भी मैं ही होऊंगा। मुझे इसकी कोई जरूरत नहीं है क्योंकि ये किसी के लिए भी अच्छा नहीं है। यह किसी के लिए भी ठीक नहीं है। कई लोग इसे लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं पर यह भी याद रखना होगा कि एक ओर बहुसंख्यक हैं और दूसरी ओर अल्पसंख्यक। बहुसंख्यक यह नहीं कह सकते हैं कि अल्पसंख्यकों को महत्व नहीं दें। ऐसा करने से लोकतंत्र को ही नुकसान होगा। दरअसल बाबासाहेब लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों के अधिकार को लेकर बेहद सजग थे। वे बहुसंख्यकों द्वारा अल्पसंख्यकों के अधिकार को किसी भी तरह से हड़पने के सख्त खिलाफ थे।
उपरोक्त बयान की सफाई बाबासाहेब से दो साल बाद दी थी। उनके बयान के बाद की कहानी 1955 की है। 19 मार्च को संसद की कार्यवाही के दौरान राज्यसभा में संविधान के चौथे संशोधन से जुड़े विधेयक पर चर्चा हो रही थी। तभी कार्यवाही में हिस्सा लेने पहुंचे पंजाब के सांसद अनूप सिंह ने बाबासाहेब से पूछा कि आपने दो साल पहले संविधान को जलाने की बात क्यों कही थी। इसके बाद बाबा साहेब ने कहा पिछली बार वे इसका जवाब पूरा नहीं दे पाए थे। उन्होंने कहा कि मैंने सोच समझकर संविधान को जलाने की बात कही थी। हम लोग मंदिर इसलिए बनाते हैं क्योंकि उसमें भगवान आकर रह सके। अगर भगवान से पहले ही राक्षस आकर रहने लगें तो मंदिर को नष्ट करने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं बचेगा। कोई यह सोचकर मंदिर नहीं बनाता कि उसमें राक्षस रहने लगें। सब चाहते हैं मंदिर में देवता ही रहें। इसलिए उन्होंने संविधान जलाने की बात कही थी। उनका मानना था कि कोई भी संविधान कितना ही अच्छा क्यों ना हो अगर उसे ढंग से लागू नहीं किया जाएगा तो वह उपयोगी साबित नहीं हो सकता।
इससे पहले जब संविधान लागू हुआ तो बाबा साहेब ने उसी दिन कहा था कि हम सबसे अच्छा संविधान लिख सकते हैं, लेकिन उसकी कामयाबी आखिरकार उन लोगों पर निर्भर करेगी, जो देश को चलाएंगे।
18. 432 निब घिसीं
प्रेम बिहारी नारायण रायजादा को हाथ से संविधान लिखने में 6 महीने लगे और कुल 432 निब घिस गईं।
19. लिखने की कोई फीस नहीं ली
प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने संविधान लिखने की कोई फीस नहीं ली थी। उन्होंने हर पेज पर अपना नाम और अंतिम पेज पर अपने गुरु व दादा मास्टर राम प्रसाद सक्सेना का नाम लिखने की शर्त रखी थी।
20. संविधान की हिंदी कॉपी कैलीग्राफर वसंत कृष्ण वैद्य ने हाथ से लिखी है।
21 . करीब तीन साल तक 53,000 से ज़्यादा नागरिकों ने संविधान सभा की विज़िटर्स गैलरी में बैठकर संविधान का ड्राफ़्ट बनाते समय हुई बहसों को देखा।
22. संविधान का हर हिस्सा भारत के राष्ट्रीय इतिहास के किसी दौर या सीन के चित्रण से शुरू होता है। संविधान के हर हिस्से की शुरुआत में, नंदलाल बोस ने भारत के राष्ट्रीय अनुभव और इतिहास के किसी दौर या सीन को दिखाया है।
23. आर्टवर्क और इलस्ट्रेशन (कुल 22), जो ज़्यादातर मिनिएचर स्टाइल में बनाए गए हैं, भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास के अलग-अलग समय की झलक दिखाते हैं, जिसमें सिंधु घाटी में मोहनजो-दारो, वैदिक काल, गुप्त और मौर्य साम्राज्य और मुगल काल से लेकर राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन तक शामिल हैं।
24. भारत के राष्ट्रीय झंडे को उसके मौजूदा रूप में 22 जुलाई, 1947 को हुई संविधान सभा की मीटिंग के दौरान अपनाया गया था, जो 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों से भारत की आज़ादी से कुछ दिन पहले हुआ था।
25. एम.एन. रॉय 1934 में संविधान सभा बनाने का विचार रखने वाले पहले व्यक्ति थे, जो आखिरकार 1935 में नेशनल कांग्रेस की आधिकारिक मांग बन गई।
संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

लेखक के बारे में
Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।
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