खाड़ी देशों में फंसे छात्रों के लिए गुड न्यूज, अटके CBSE रिजल्ट पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दिया अहम संकेत
पश्चिम एशिया के कई देशों में परीक्षा रद्द होने से सीबीएसई के नतीजे अटकने वाले छात्रों को जल्द राहत मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने नई नीति लाने के संकेत दिए हैं।

पश्चिम एशिया के कई देशों में जारी तनाव और संघर्ष के कारण जिन छात्रों के सीबीएसई बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित नहीं हो सके हैं, उनके लिए राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह ऐसे छात्रों के लिए एक विशेष नीति बनाने पर विचार कर रही है। इससे उन विद्यार्थियों को फायदा मिल सकता है जिनकी परीक्षाएं प्रभावित हुईं और जिनके नतीजे अब तक जारी नहीं किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह केवल एक छात्र का मामला नहीं है, बल्कि ऐसे कई छात्र हैं जो समान परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर विचार कर रही है और जल्द ही कोई निर्णय सामने आ सकता है। इसके बाद न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 22 जून तक टाल दी।
सऊदी अरब के छात्र ने लगाई थी याचिका
यह मामला सऊदी अरब में रहने वाले छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल की याचिका से जुड़ा है। छात्र ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि सीबीएसई को उसके कक्षा 12 सुधार परीक्षा (इम्प्रूवमेंट एग्जाम) का परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि सीबीएसई ने अन्य प्रभावित छात्रों के लिए मूल्यांकन योजना बनाई थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सुधार परीक्षा देने वाले निजी छात्र भी उस योजना के दायरे में आते हैं या नहीं।
परिणाम रोके जाने से उच्च शिक्षा पर पड़ा असर
छात्र का कहना है कि उसका परिणाम अब तक घोषित नहीं किया गया है और उसकी स्थिति "आरएल (रिजल्ट लेटर)" दिखाई जा रही है। इससे उसके कॉलेज दाखिले और आगे की पढ़ाई की योजनाओं पर गंभीर असर पड़ा है। याचिका में कहा गया है कि परिणाम न आने की वजह से वह उच्च शिक्षा के कई अवसरों से वंचित हो सकता है। छात्र ने यह भी दावा किया कि उसने 17 मई, 21 मई और 30 मई को सीबीएसई को कई बार पत्र भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
किन देशों में प्रभावित हुई थीं परीक्षाएं?
सीबीएसई ने क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा संकट और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए सात पश्चिम एशियाई देशों में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। इनमें बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इन देशों में रहने वाले बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों की परीक्षाएं प्रभावित हुई थीं। बाद में सीबीएसई ने उनके लिए विशेष मूल्यांकन व्यवस्था की घोषणा की, लेकिन कुछ निजी और सुधार परीक्षा देने वाले छात्रों के मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
अब सभी प्रभावित छात्रों के लिए बन सकती है नीति
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के ताजा रुख से संकेत मिले हैं कि सरकार केवल एक छात्र के मामले को नहीं, बल्कि सभी प्रभावित विद्यार्थियों की समस्या को एक साथ हल करने की दिशा में सोच रही है। यदि नई नीति लागू होती है तो पश्चिम एशिया के उन छात्रों को राहत मिल सकती है जिनके परिणाम अब तक लंबित हैं और जिनका शैक्षणिक भविष्य अनिश्चितता में फंसा हुआ है।
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Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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