क्या छठी कक्षा को 3 भाषा नीति से छूट देगा CBSE, सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को दिए क्या निर्देश

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा कि वह इस अकादमिक सत्र के लिए छठी कक्षा के छात्रों को अपनी त्रि-भाषा नीति से छूट देने पर विचार करे।

CBSE Board
सीबीएसई

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से कहा कि वह इस अकादमिक सत्र के लिए छठी कक्षा के छात्रों को अपनी त्रि-भाषा नीति से छूट देने पर विचार करे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 17 सितंबर तक टालते हुए बोर्ड से कहा कि वह मौजूदा अकादमिक सत्र में छठी कक्षा के छात्रों को शामिल करने की संभावना पर विचार करे। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।

न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, 'इस साल छठी कक्षा पर विचार करें, यदि उन्हें कुछ छूट दी जा सकती है।' मेहता ने अदालत से सुनवाई टालने का अनुरोध किया क्योंकि अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं। फिर भी उन्होंने भरोसा दिलाया कि संबंधित अधिकारी पीठ के सुझाव पर विचार करेंगे। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा, ''हम सब मिलकर बैठेंगे और फिर आपको सूचित करेंगे।''

याचिकाकर्ताओं में से एक के वरिष्ठ वकील ने कहा कि मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि छात्रों को आखिरकार परीक्षा देनी है और इससे उनके माता-पिता की चिंता बढ़ रही है। न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें सीबीएसई की उस नीति को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए एक जुलाई से तीन भाषाएं (जिनमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं) पढ़ना अनिवार्य किया गया था।

न्यायालय ने 20 अगस्त को सीबीएसई की उस नीति से पैदा होने वाली समस्याओं का समाधान तलाशने पर जोर दिया जिसके तहत नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना जरूरी है। अदालत ने कहा कि बच्चों पर किसी भी तरह का दबाव नहीं पड़ना चाहिए।

जब पिटीशनर्स के वकील ने जस्टिस बागची की पहले की बात का जिक्र किया कि इंग्लिश के साथ कैसा बर्ताव किया जाना चाहिए - चाहे वह देसी भाषा हो या विदेशी - तो मेहता ने कहा कि सरकार को इस बात से कुछ दिक्कत है कि इंग्लिश देसी भाषा है। जस्टिस बागची ने कहा, "लॉजिस्टिकली जो चीज कम रुकावट वाली है, वह है 3 भाषा पॉलि

सी को लागू करने का कटऑफ साल। इंग्लिश के स्टेटस को देखते हुए इस पर बहस की जरूरत हो सकती है।"

SC ने फोरम ऑफ माइनॉरिटी स्कूल्स की एक नई याचिका पर CBSE को भी नोटिस जारी किया। इसके वकील रोमी चाको ने अदालत को बताया कि यह एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स के माइनॉरिटी कैरेक्टर की सुरक्षा, इंस्टीट्यूशनल ऑटोनॉमी और बुनियादी पहचान से जुड़े उनके मौलिक अधिाकारों का उल्लंघन है।

Pankaj Vijay

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शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


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पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


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