CBSE के टेंडर पर 12वीं के छात्र ने उठाए सवाल, एक ब्लॉग से मचा सियासी हंगामा; मामले पर क्या बोला बोर्ड
CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया को लेकर 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत के ब्लॉग ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। छात्र ने टेंडर डॉक्यूमेंट में कई कथित गलतियों की ओर इशारा करते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

सीबीएसई 12वीं परीक्षा के पेपर मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे जुड़ी कॉपियों को लेकर इन दिनों विवाद गहरा गया है। आमतौर पर बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र अपने नतीजों और आगे की पढ़ाई को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार एक 12वीं के छात्र ने ऐसी पड़ताल सामने रखी है जिसने शिक्षा व्यवस्था से लेकर सरकारी ठेके की प्रक्रिया तक पर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड के छात्र सार्थक सिद्धांत का एक ब्लॉग इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस ब्लॉग में उन्होंने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से जुड़े टेंडर डॉक्यूमेंट्स को खंगालने का दावा किया है जिसमें कई कथित गलतियां शामिल हैं। इसके मद्देनजर कई विपक्षी नेताओं ने सरकार और सीबीएसई परीक्षा सिस्टम को आड़े हाथों लिया है। सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सीबीएसई सिस्टम पर सवाल उठाए।
टेंडर डॉक्यूमेंट्स की तुलना में मिले कई सवाल
सार्थक सिद्धांत का कहना है कि उन्होंने सीबीएसई के अलग-अलग टेंडर डॉक्यूमेंट्स की तुलना की और इसमें करीब 15 ऐसी बातें सामने आईं जो उनके मुताबिक गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने बताया कि OSM से जुड़े तीन अलग-अलग टेंडर जारी किए गए थे। पहला टेंडर बाद में पोर्टल से हटा दिया गया, दूसरे टेंडर में तकनीकी मूल्यांकन के दौरान सभी बोली लगाने वाले को अयोग्य घोषित कर दिया गया, जबकि तीसरे टेंडर का ठेका एक एडटेक कंपनी को मिला। सार्थक के अनुसार पुराने टेंडर में खराब प्रदर्शन करने वाले सेवा प्रदाताओं को अयोग्य ठहराने से जुड़ी कुछ शर्तें मौजूद थीं, लेकिन बाद में जारी दस्तावेजों में इन शर्तों को हटा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि ब्लैकलिस्टिंग, वित्तीय योग्यता, CMMI स्तर और परियोजना पात्रता से जुड़ी कुछ शर्तों में भी बदलाव किए गए।
एक छात्र ने क्यों शुरू की यह पड़ताल?
सार्थक ने बताया कि इस विषय में उनकी रुचि तब बढ़ी जब वे साइबर सुरक्षा शोधकर्ता और एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी के साथ काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें संबंधित कंपनी और टेंडर प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अन्य पत्रकारों और शोधकर्ताओं के साथ मिलकर दस्तावेजों का अध्ययन किया। उनका कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था बल्कि कई लोगों के सामूहिक प्रयास का नतीजा था। उन्होंने अपनी ओर से जुटाई गई जानकारियों को ब्लॉग के माध्यम से सार्वजनिक किया ताकि लोग पूरे मामले को समझ सकें।
पारदर्शिता की मांग और जवाब का इंतजार
सार्थक का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं बल्कि सवाल उठाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीबीएसई उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जवाब देगा और टेंडर प्रक्रिया को लेकर अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी खरीद और टेंडर से जुड़ा डेटा आम लोगों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं के लिए आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। उनके मुताबिक जब ज्यादा लोग इन प्रक्रियाओं की जांच कर सकेंगे तो जवाबदेही भी मजबूत होगी।
OSM व्यवस्था पर क्या है छात्र की राय?
हाल के वर्षों में सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था को लेकर कई छात्रों और शिक्षकों ने तकनीकी समस्याओं और मूल्यांकन संबंधी चिंताएं जताई हैं। हालांकि सार्थक OSM के पूरी तरह विरोध में नहीं हैं। उनका मानना है कि यह एक सकारात्मक बदलाव हो सकता है, लेकिन किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण और पायलट परियोजनाएं जरूरी होती हैं। उनका कहना है कि यदि किसी प्रणाली को सही तरीके से लागू नहीं किया जाता तो उसके फायदे भी विवादों में घिर सकते हैं।
खुद भी झेलीं मूल्यांकन संबंधी दिक्कतें
दिलचस्प बात यह है कि सार्थक खुद भी इस वर्ष बोर्ड परीक्षा के अभ्यर्थी रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें भी कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि वे खुद को अपेक्षाकृत भाग्यशाली मानते हैं क्योंकि उनकी सभी उत्तर पुस्तिकाओं के पन्ने धुंधले नहीं हुए थे, लेकिन उन्हें जांच और अंकन से जुड़ी कुछ दिक्कतें महसूस हुईं। उन्होंने कहा कि वे अपनी कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया के दौरान इन मुद्दों को आगे उठाएंगे। इसी अनुभव ने उन्हें OSM व्यवस्था और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को और करीब से समझने के लिए प्रेरित किया।
राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए 17 वर्षीय सार्थक सिद्धांत की सराहना की और दावा किया कि छात्र ने सीबीएसई के डॉक्यूमेंट्स के आधार पर यह दिखाया है कि टेंडर प्रक्रिया में बदलाव कर कथित तौर पर एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि सार्थक का काम यह दिखाता है कि भारत की नई पीढ़ी निडर और प्रतिभाशाली है, जो बड़े से बड़े सवाल उठाने का साहस रखती है।
CBSE ने आरोपों पर क्या कहा?
सार्थक सिद्धांत के दावों के बीच सीबीएसई ने टेंडर प्रक्रिया का बचाव किया है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पूरी खरीद प्रक्रिया निर्धारित नियमों और प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए पूरी की गई। सीबीएसई के मुताबिक अनुबंध गुणवत्ता और क्वालिटी कम कॉस्ट बेस्ड सेलेक्शन यानी लागत आधारित चयन प्रणाली के तहत सबसे कम बोली लगाने वाले योग्य आवेदक को दिया गया। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि टेंडर दस्तावेजों में किए गए बदलावों को जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह पहले के चरणों में सामने आई कमियों को दूर कर बेहतर परिणाम हासिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा था। वहीं एक अन्य अधिकारी ने स्पष्ट किया कि संबंधित कंपनी को किसी भी सरकारी एजेंसी ने ब्लैकलिस्ट नहीं किया था और उसके खिलाफ पहले किसी तरह की औपचारिक आपत्ति भी दर्ज नहीं कराई गई थी।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


