CBSE विवाद में अब 19 साल के हैकर ने हनी सिंह वाले मीम से दिया बोर्ड को जवाब, पोस्ट वायरल
CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में कथित सुरक्षा खामियों को लेकर सफाई पेश की जिस पर 19 साल के एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने मीम के जरिए बोर्ड को जवाब दिया है।

CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने बोर्ड की ताजा सफाई के बाद सोशल मीडिया पर एक मीम साझा किया है जो वायरल हो गया है। निसर्ग ने पंजाबी गायक और रैपर यो यो हनी सिंह के मशहूर गाने 'डोप शोप' का एक छोटा वीडियो क्लिप पोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने लिखा कि CBSE ने आखिरकार यह मान लिया है कि सिस्टम में सुरक्षा संबंधी खामियां थीं। यह पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं।
क्या है पूरा मामला?
निसर्ग अधिकारी खुद को साइबर सुरक्षा का शौकिया शोधकर्ता बताते हैं। उनका दावा है कि उन्होंने CBSE के ऑनलाइन मूल्यांकन पोर्टल में ऐसी तकनीकी कमियां खोजी थीं, जिनकी मदद से लॉगिन प्रक्रिया को पार कर सिस्टम तक पहुंचा जा सकता था। उनका आरोप था कि पोर्टल के कोड में मौजूद एक विशेष पासवर्ड के जरिए ओटीपी सत्यापन को छोड़ा जा सकता था और सीधे मूल्यांकन डैशबोर्ड तक पहुंच बनाई जा सकती थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरह छात्रों के अंकों में बदलाव तक संभव था। निसर्ग का कहना है कि उन्होंने फरवरी में ही इस बारे में सरकारी साइबर एजेंसी CERT-In को जानकारी दे दी थी, लेकिन खामियां पूरी तरह दूर नहीं हुई थीं।
CBSE ने क्या कहा?
CBSE ने अपने आधिकारिक बयान में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि जिन सुरक्षा कमजोरियों की जानकारी मिली थी, उन्हें नियंत्रित कर लिया गया है। बोर्ड ने यह भी बताया कि अन्य संभावित कमजोरियों की जांच की जा रही है। साथ ही CBSE ने उन नागरिकों और एथिकल हैकरों का आभार जताया जिन्होंने सिस्टम में संभावित खामियों की जानकारी साझा की। बोर्ड के अनुसार कुछ लोगों से सीधे संपर्क भी किया गया। हालांकि इससे पहले 26 मई को CBSE ने निसर्ग के दावों को खारिज करते हुए कहा था कि जिस वेबसाइट का उल्लेख किया गया था, वह केवल परीक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाला प्लेटफॉर्म था और वास्तविक मूल्यांकन प्रणाली उससे अलग थी।
तीन लड़कों ने बढ़ाई बोर्ड की मुश्किलें
दिलचस्प बात यह है कि OSM विवाद को लेकर सिर्फ निसर्ग अधिकारी ही चर्चा में नहीं हैं। पिछले कुछ दिनों में तीन लड़कों की वजह से यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने दावा किया था कि पुनर्मूल्यांकन के दौरान उन्हें जो उत्तर पुस्तिका दिखाई गई, वह उनकी नहीं थी और उसमें मौजूद लिखावट भी अलग थी। मामला वायरल होने के बाद CBSE ने जांच कर सही कॉपी उपलब्ध कराने की बात कही। वहीं झारखंड के 17 वर्षीय सार्थक सिद्धांत ने एक ब्लॉग प्रकाशित कर आरोप लगाया कि OSM सिस्टम से जुड़े टेंडर नियमों में बदलाव कर एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। हालांकि CBSE और संबंधित कंपनी दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया है।
राहुल गांधी की भी हुई एंट्री
यह विवाद तब और बड़ा हो गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वेदांत श्रीवास्तव से मुलाकात की और सार्थक सिद्धांत के ब्लॉग को भी साझा किया। राहुल गांधी ने इन छात्रों की तारीफ करते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी निडर है और सवाल पूछने से नहीं डरती। इसके बाद यह मामला शिक्षा व्यवस्था से निकलकर राजनीतिक चर्चा का हिस्सा भी बन गया।
पहली बार बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ OSM
CBSE ने इस साल कक्षा 12 की कॉपियों के मूल्यांकन में ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का बड़े पैमाने पर उपयोग किया। इस व्यवस्था में भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं की जगह स्कैन की गई कॉपियां स्क्रीन पर जांची जाती हैं। हालांकि कई छात्रों और शिक्षकों ने धुंधली स्कैन कॉपियों, गायब पन्नों और उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान से जुड़ी शिकायतें सामने रखीं। CBSE का कहना है कि सिस्टम को पर्याप्त परीक्षण और प्रशिक्षण के बाद ही लागू किया गया था।
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Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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