आपकी पोल खोलने में व्यस्त था, डेट बढ़ा दो; CBSE ठेके की खामियां उजागर करने वाले सार्थक का तंज, पोस्ट वायरल

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

रांची के 12वीं के छात्र सार्थक ने सीबीएसई के सिस्टम की गड़बड़ियों का खुलासा करने के बाद अब बोर्ड से री-इवैल्यूएशन की तारीख आगे बढ़ाने की एक अनोखी मांग रखते हुए पोस्ट किया है।

आपकी पोल खोलने में व्यस्त था, डेट बढ़ा दो; CBSE ठेके की खामियां उजागर करने वाले सार्थक का तंज, पोस्ट वायरल

अपने तथ्यों और सबूतों से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) जैसे विशाल और पुराने संस्थान के पसीने छुड़ा देने वाले छात्रा सार्थिक सिद्धांत इन दिनों सुर्खियों में हैं। सीबीएसई ओसएम सिस्टम विवाद, री-इवैल्यूएशन विंडो के दोबारा खोले जाने और हफ्ते भर की इस भारी उथल-पुथल के बाद अब इस लड़के ने सीबीएसई के ही एक रिमाइंडर पोस्ट पर ऐसा करारा तंज कसा है कि सोशल मीडिया पर लोग अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं।

दरअसल, रविवार को सीबीएसई ने एक्स पर 12वीं के छात्रों को याद दिलाते हुए एक पोस्ट किया। बोर्ड ने अपनी पोस्ट में कहा कि आंसर शीट के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख 7 जून है। पोर्टल रात 11:59 बजे तक खुला रहेगा। दिलचस्प बात यह है कि पोर्टल में तकनीकी खराबी की तमाम शिकायतों के बाद बोर्ड पहले ही इस डेडलाइन को 6 जून से बढ़ाकर 7 जून कर चुका था। इसी आधिकारिक पोस्ट पर सार्थक सिद्धांत ने ऐसा रिप्लाई किया जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया। सार्थक ने मजे लेते हुए लिखा, "क्या आप कृपया डेडलाइन और बढ़ा सकते हैं क्योंकि मैं इस पूरे हफ्ते आपकी पोल खोलने में व्यस्त था।" एक लाइन का यह जवाब उस बोर्ड के मुंह पर सीधा तमाचा था जो पिछले कुछ दिनों से लगातार सवालों के घेरे में खड़ा है।

बता दें सार्थक का यह तंज यूं ही हवा में नहीं था। इसके पीछे पिछले कुछ दिनों का एक जबरदस्त घटनाक्रम छिपा है। 2 जून का दिन भारतीय शिक्षा जगत में शायद लंबे समय तक याद रखा जाएगा। इसी दिन सार्थक ने कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सामने सात पन्नों की अपनी एक विस्तृत और सनसनीखेज रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट में इतने पुख्ता सबूत थे कि कुछ ही घंटों के भीतर सरकार को मजबूरन बड़ा एक्शन लेना पड़ा। सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का आनन-फानन में ट्रांसफर कर दिया गया। उनकी जगह प्रशांत लोखंडे को नया चेयरपर्सन बनाया गया है और सार्थक ने जिन खरीद-फरोख्त पर सवाल उठाए थे, उसकी बारीकी से जांच के लिए तुरंत एक सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया।

इस पूरे मामले ने इतनी तूल पकड़ी कि उसी दिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सार्थक और उसके परिवार से खास मुलाकात की। राहुल गांधी ने सार्थक की हिम्मत की दाद देते हुए सोशल मीडिया पर उसके साथ तस्वीर साझा की और लिखा, "सार्थक, अपने सिद्धांतों पर डटे रहो।" जाहिर है एक 12वीं के छात्र के लिए इतने बड़े स्तर पर समर्थन मिलना कोई छोटी बात नहीं है।

कहां से शुरू हुआ पूरा बखेड़ा?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह पूरा बखेड़ा शुरू कैसे हुआ? सार्थक बताते हैं कि उनके एक दोस्त ने उन्हें सीबीएसई के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पोर्टल की तकनीकी खामियों के बारे में बताया था। यह नया सिस्टम इसी साल लॉन्च हुआ था। जैसे ही देशभर के छात्रों ने गलत आंसर शीट स्कैन होने और चेकिंग में भारी गलतियों की शिकायत शुरू की, सार्थक ने सीधे इस सिस्टम के टेंडर दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया।

गहरी छानबीन के बाद उन्होंने 'हाउ सीबीएसई री-रोट रूल्स टू फेवर कोएम्प्ट एडुटेक' नाम से एक लंबा ब्लॉग लिखा। इस ब्लॉग में उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाए कि ओएसएम सिस्टम का टेंडर देने में कम से कम 15 तरह की भारी अनियमितताएं बरती गईं। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि 'कोएम्प्ट' नाम की कंपनी को 5 दिसंबर को यह कॉन्ट्रैक्ट दे दिया गया था, जबकि 17 फरवरी से तो बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होने वाली थीं, यानी परीक्षाओं से सिर्फ 74 दिन पहले इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई। हालांकि, सीबीएसई और कंपनी दोनों ने ही किसी भी तरह की गड़बड़ी से साफ इनकार किया है।

निसर्ग अधिकारी की भी थी अहम भूमिका

इस पूरे खुलासे में सार्थक अकेले नहीं थे। उन्होंने बताया कि उनकी इस रिसर्च में 19 साल के एक एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने भी अहम भूमिका निभाई है। निसर्ग ने ही ओएसएम पोर्टल में मौजूद तकनीकी कमजोरियों (वल्नेरेबिलिटी) को पकड़ा था। इसके अलावा एक और किशोर वेदांत श्रीवास्तव का हैरान करने वाला मामला भी सामने आया था, जिसे चेकिंग के दौरान किसी और की आंसर शीट पकड़ा दी गई थी। जब वेदांत की पोस्ट एक्स पर वायरल हुई और हंगामा मचा, तब जाकर सीबीएसई ने अपनी गलती सुधारी। सार्थक के इन गंभीर आरोपों पर सीबीएसई ने अपनी सफाई में कहा है कि उन्होंने जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) का पूरा पालन किया है और सबसे कम बोली लगाने वाले को ही यह टेंडर दिया था। बहरहाल, अब इस पूरे मामले की विभागीय जांच चल रही है।

री-इवैल्यूएशन को लेकर क्या था सीन

अगर री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया की बात करें तो बोर्ड का यह पोर्टल 29 मई को खुलने वाला था, लेकिन इसे देरी से 2 जून को खोला जा सका। सीबीएसई का कहना है कि उन्होंने 68,018 आंसर बुक्स को दोबारा स्कैन किया है, 13,583 कॉपियों को मैनुअल चेकिंग के लिए अलग से निकाला है और अब सारा डेटा अपने खुद के सुरक्षित सर्वर पर शिफ्ट कर लिया है। अपनी सफाई पेश करते हुए बोर्ड ने यह भी दावा किया कि उनके पोर्टल पर कुछ शरारती तत्वों द्वारा जानबूझकर साइबर हमला किया गया था।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

और पढ़ें
करियर सेक्शन में लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़, सरकारी जॉब , एग्जाम , एडमिशन , CBSE 12th Result 2026 Live के साथ सभी Board Results 2026 देखें। सबसे पहले अपडेट पाने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।