CBSE 12वीं आंसरशीट चेक करने वाले टीचरों ने खोली OSM की पोल, अपनी ही संस्था को अनसुना कर अपनाया था OSM
CBSE ने इस वर्ष कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं के लिए नया ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू करने से पहले क्षेत्रीय कार्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट चलाने संबंधी अपने ही संचालन निकाय के सदस्यों की राय को नजरअंदाज किया।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अपने नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के चलते बुरी तरह घिर गया है। ओएसएम का गड़बड़झाला सामने आने के बाद 4 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों ने अपनी स्कैन आंसरशीट की मांग की है। 12वीं के मार्क्स कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में दाखिले और स्कॉलरशिप पाने में काम आते हैं, ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर है। हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीबीएसई ने ओएसएम सिस्टम अपनी ही एक गवर्निंग बॉडी के सदस्यों के सुझाव को अनसुना करके अपनाया था। गवर्निंग बॉडी के सदस्यों ने बोर्ड को सुझाव दिया था कि ओएसएम सिस्टम बड़े लेवल पर न अपनाकर पहले क्षेत्रीय कार्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाए जाएं। लेकिन सीबीएसई ने इस सलाह को नजरअंदाज कर दिया।
छात्रों ने करीब 3 फीसदी रिजल्ट गिरने और अपने कम मार्क्स आने के पीछे सीबीएसई के ओएसएम सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया है। कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को बिना पूरी तैयारी के लागू करने से कई गंभीर समस्याएं पैदा हुईं।
सीबीएसई ने सलाह के उलट जनवरी में दिल्ली के 5 स्कूलों के केवल 100 शिक्षकों के साथ एक छोटा सा परीक्षण (dry run) किया गया। इन शिक्षकों ने बोर्ड को चेतावनी दी थी कि सॉफ्टवेयर में सुधार की जरूरत है और इसे लागू करने से पहले कम से कम एक या दो साल की उचित ट्रेनिंग की आवश्यकता है। सीबीएसई ने 9 फरवरी को OSM लागू करने की घोषणा की और इसके लिए केवल कुछ वेबिनार और मॉक मूल्यांकन आयोजित किए, जिन्हें शिक्षकों ने महज एक "औपचारिकता" बताया। 7 मार्च से वास्तविक मूल्यांकन कार्य शुरू हो गया।
कॉपी चेक करने वाले टीचरों का कहना है कि OSM ने काम करने का एक बिल्कुल ही नया तरीका पेश किया है, जिससे उत्तर-पुस्तिकाओं के स्कैन की गुणवत्ता खराब रही है और अंकों को गलत तरीके से दर्ज किया गया है, जबकि अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि कई उत्तर-पुस्तिकाएं आपस में बदल गई हैं।
जून 2025 में हुई गवर्निंग बॉडी की एक बैठक के मिनट्स के अनुसार, सदस्यों ने सुझाव दिया था कि OSM को 'सभी विषयों में तभी लागू किया जाना चाहिए, जब बोर्ड के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में कुछ विषयों पर पायलट प्रोजेक्ट पूरे हो जाएं।' गवर्निंग बॉडी ने इस सुझाव को "नोट कर लिया था।' CBSE के 22 क्षेत्रीय कार्यालय हैं। इस साल इस प्रणाली को शुरू करने से पहले, ऐसे कोई भी पायलट प्रोजेक्ट नहीं चलाए गए थे।
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टीचरों ने किया था सीबीएसई को आगाह
जनवरी में हुए अभ्यास (ड्राई रन) में शामिल शिक्षकों ने HT को बताया कि उन्होंने CBSE को पहले ही आगाह कर दिया था कि इस प्रणाली में अभी और सुधार की आवश्यकता है। दिल्ली के एक स्कूल के शिक्षक ने, जिन्होंने इस अभ्यास और वास्तविक मूल्यांकन — दोनों में भाग लिया था — बताया, 'हमने अधिकारियों से कहा था कि OSM को शुरू करने से पहले कम से कम एक या दो साल के उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। 7 मार्च से शुरू हुए मूल्यांकन के दौरान, कई शिक्षक इस सॉफ्टवेयर से बिल्कुल भी परिचित नहीं थे और उन्होंने वास्तविक उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करते-करते ही इसे सीखा।'
जल्दी जांच पूरी करने का दबाव था
CBSE ने 13 फरवरी को OSM पर एक देशव्यापी वेबिनार आयोजित किया था, जिसमें सभी स्कूलों और उनके शिक्षकों ने भाग लिया; इसके बाद 15 फरवरी को बोर्ड ने अपना प्रशिक्षण पोर्टल खोल दिया, ताकि मूल्यांकनकर्ता पिछले वर्षों की उत्तर-पुस्तिकाओं पर अभ्यास कर सकें। 17 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने बताया कि लगभग 300,000 शिक्षकों ने ट्रेनिंग के लिए पोर्टल पर लॉग इन किया, जबकि अंततः लगभग 77,000 शिक्षकों ने मूल्यांकन में हिस्सा लिया। एक दूसरे मूल्यांकनकर्ता ने HT को बताया कि शिक्षकों पर CBSE की ओर से जल्दी जांच पूरी करने का दबाव था, ताकि नतीजे समय पर घोषित किए जा सकें और डिजिटल रोलआउट को सफल दिखाया जा सके। एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा, 'शिक्षकों के लिए रोजाना के लक्ष्य तय थे। ध्यान से पढ़ने के बजाय गति ज्यादा मायने रखती थी।'
स्क्रीन पर कॉपी चेकिंग ने समस्या को और बढ़ा दिया
मूल्यांकनकर्ताओं ने कहा कि स्क्रीन बेस्ड कॉपी चेकिंग की सीमाओं ने समस्या को और बढ़ा दिया। मूल्यांकन में शामिल एक भौतिकी शिक्षक ने कहा, “मैन्युअल जांच में आप पन्ने पलट सकते हैं, जवाबों को दोबारा देख सकते हैं और छूटे हुए चरणों को पकड़ सकते हैं। स्क्रीन पर, जवाब आसानी से नजरअंदाज हो सकते हैं।”
स्टेप मार्किंग पर बुरा असर पड़ा
एक गणित शिक्षक ने कहा कि स्क्रीन पर घंटों काम करने के बाद होने वाली थकान का असर स्टेप-मार्किंग पर पड़ा। शिक्षक ने कहा, “कुछ मूल्यांकनकर्ता लाइव उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करते समय भी सॉफ्टवेयर को समझने की कोशिश कर रहे थे। भौतिक प्रतियों के साथ असामान्य लिखावट या कोनों में लिखे जवाबों को पहचानना आसान होता है। डिजिटल रूप से, वे छूट सकते हैं।”
CBSE ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि क्षेत्र-वार कोई ड्राई रन क्यों नहीं किया गया। इसके बजाय अधिकारियों ने 17 मई की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि CBSE ने 13 फरवरी को OSM पर एक राष्ट्रव्यापी वेबिनार आयोजित किया था, जिसमें सभी स्कूलों और उनके शिक्षकों ने हिस्सा लिया था और 15 फरवरी को अपना ट्रेनिंग पोर्टल खोला था ताकि मूल्यांकनकर्ता पिछले वर्षों की उत्तर पुस्तिकाओं पर अभ्यास कर सकें।
68018 को खराब इमेज क्वालिटी के कारण दोबारा स्कैन करना पड़ा
अधिकारियों ने 17 मई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि OSM में शुरुआती तकनीकी दिक्कतें आईं, जिनमें लॉग इन की समस्याएं, सिस्टम पर ज़्यादा लोड और स्कैनिंग में कमियां शामिल थीं। इस साल जांची गई 9,866,622 उत्तर पुस्तिकाओं में से, 68,018 को खराब इमेज क्वालिटी के कारण दोबारा स्कैन करना पड़ा और 13,583 को मैन्युअल रूप से जांचा गया, क्योंकि बार-बार स्कैन करने के बाद भी साफ़ प्रतियानहीं मिल पाईं।
- छात्रों की टेंशन का लेवल इन आंकड़ों में झलकता है। 26 मई तक, CBSE को 1,131,961 कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की हुई प्रतियां मांगने वाले 404,319 आवेदन मिले थे — जो पिछले साल की तुलना में आवेदनों में 208% से ज़्यादा और उत्तर पुस्तिकाओं की मांग में 301% की बढ़ोतरी दर्शाता है। CBSE ने इस बढ़ोतरी की वजह 17 मई को फीस में की गई भारी कटौती को बताया है, जिसके तहत स्कैन की गई कॉपी की कीमत ₹700 से घटाकर ₹100 प्रति विषय कर दी गई थी।
छात्रों, अभिभावकों और प्रिंसिपलों ने HT को बताया कि यह बढ़ोतरी बोर्ड के 12वीं कक्षा के कुल पास प्रतिशत में 3.19 प्रतिशत अंकों की गिरावट के बाद मूल्यांकन की गुणवत्ता को लेकर पैदा हुई चिंता को भी दर्शाती है — यह 2019 के बाद से सबसे कम है।
पहले ले लिया था OSM को वापस
- इससे पहले 2014 में भी CBSE ने कक्षा 10 और 12 के कुछ विषयों के लिए OSM का पायलट प्रोजेक्ट चलाया था, लेकिन स्कैनिंग और कनेक्टिविटी की समस्याओं के कारण इसे वापस ले लिया गया था
अगले साल भी जारी रहेगा OSM
वर्तमान विवादों के बावजूद, CBSE अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अगले साल की बोर्ड परीक्षाओं के लिए भी OSM प्रणाली जारी रहेगी। CBSE के पूर्व अध्यक्ष अशोक गांगुली ने इसे एक अच्छी पहल बताया है, लेकिन उन्होंने जोर दिया है कि इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए उचित स्कैनिंग, शिक्षकों की ट्रेनिंग और रिट्रेनिंग, तथा बेहतर तैयारियों की सख्त आवश्यकता है।
टीचरों ने खोली OSM सिस्टम की पोल
शिक्षकों ने क्या कहा - मूल्यांकनकर्ता (जांचकर्ता) मूल्यांकन केंद्रों पर उस नए सॉफ्टवेयर से अनजान थे और वास्तविक (लाइव) उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करते हुए ही प्रभावी रूप से इसे चलाना सीख रहे थे।
प्रतिदिन के लक्ष्यों को पूरा करने के दबाव ने कॉपियों को ध्यान से पढ़ने की बजाय तेज़ी से जांचने पर ज़्यादा ज़ोर दिया।
धुंधले और अधूरे स्कैन के कारण कोनों में लिखे गए उत्तरों या असामान्य लिखावट वाले उत्तरों को देखना मुश्किल था, जिससे वे आसानी से छूट जाते थे।
स्क्रीन पर लगातार कॉपियां जांचने से होने वाली थकान का सबसे बुरा असर गणित और भौतिक विज्ञान की स्टेप-मार्किंग पर पड़ा।
आंसरशीट देख छात्र हैरान, क्या क्या जता रहे आपत्ति
- सीबीएसई ने इतनी धुंधली स्कैन कॉपी कैसे चेक की, ब्लर कॉपियों की मार्किंग कैसे की गई? ब्लर होने के चलते कैसे कई उत्तर अनचेक रह गए।
- मल्टीपल चॉइस प्रश्न में भी सही जवाब पर अंक क्यों काटे?
- सही सही फीस क्यों नहीं दिखा रहा, बढ़ा चढ़ाकर फीस क्यों दिखा रहा पोर्टल
- विद्यार्थियों की आंसरशीट अदला बदली कैसे हो गई? कइयों के कुछ पन्ने गायब कैसे हो गए? कई आंसरशीट में से एक्स्ट्रा लगाई गई शीट गायब कैसे हो गई। किसी की आंसरशीट किसी और के रोल नंबर पर अपलोड होकर कैसे आ गई?
- सही उत्तरों के मार्क्स क्यों काटे गए?
- मेरी आंसर-शीट मुझे अब तक क्यों नहीं मिली है?
- जितने विषयों की आंसरशीट के लिए आवेदन किया था, उतनी नहीं मिली?
लेखक के बारे में
Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
15 से अधिक सालों का अनुभव
पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।
विजन
तमाम तरह के करियर, स्कूल एजुकेशन, हायर एजुकेशन, भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं, एंट्रेंस एग्जाम, नौकरी के लिए जरूरी स्किल्स एवं बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर पंकज के पास गहरी समझ है। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के कई टॉपरों के इंटरव्यू किए हैं। उनकी लिखी सक्सेस स्टोरीज युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रेरित करती रही हैं। पंकज का मानना है कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता ही पत्रकारिता की असली ताकत है। उनका लक्ष्य स्कूली छात्रों व बेहतर करियर एवं सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आसान भाषा में सटीक, तेज और भरोसेमंद जानकारी देना है।
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