CBSE : OSM रिहर्सल के दौरान सामने आई थीं स्टेप वाइज मार्किंग और ब्लाइंड चेकिंग समेत 36 खामियां
सीबीएसई की ओर से कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के चेकिंग के लिए लागू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की राष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत से पहले किए गए ड्राई रन रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई थीं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के चेकिंग के लिए लागू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की राष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत से पहले किए गए ड्राई रन रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई थीं। जनवरी 2026 में दिल्ली के पांच स्कूलों में हुए ओएसएम टेस्ट के बाद तैयार की गई आंतरिक रिपोर्ट में तकनीकी, संचालन और मूल्यांकन से जुड़ी कम से कम 36 खामियों का जिक्र किया गया था।
हिंदुस्तान टाइम्स को प्राप्त एक रिपोर्ट के अनुसार ओएसएम सिस्टम में ऐसी कमियां थीं जो निष्पक्ष और एक लेवल के साथ कॉपी चेकिंग को प्रभावित कर सकती थीं। यह रिपोर्ट 21 जनवरी 2026 को आंतरिक पर्यवेक्षकों द्वारा सीबीएसई बोर्ड को सौंपी गई थी।
मई में सीबीएसई द्वारा जारी एक FAQ दस्तावेज (नतीजों को लेकर हुए विवाद के बाद यह आया था) बताता है कि बोर्ड को कम से कम कुछ समस्याओं के बारे में पहले से पता था, उसने जिन सुरक्षा उपायों को अपनाने की बात कही थी, उनमें से कई वही हैं जो जनवरी में सामने आई चिंताओं व समस्याओं में भी शामिल थे। CBSE ने ऑब्जर्वेशन रिपोर्ट या उसके नतीजों पर एचटी के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। एक अधिकारी ने कहा कि बोर्ड के FAQ में ड्राई रन को सिस्टम में किन बदलावों की जरूरत है, इसका एक खाका बताया गया था।
रिपोर्ट में क्या बताया गया, क्या क्या कमियां गिनाईं गई थीं
- रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि यह सिस्टम मूल्यांकन करने वालों को अंक देते समय आपस में बातचीत करने, चर्चा करने या आम सहमति बनाने का कोई मौका नहीं देता, जो कि निष्पक्ष और एक समान मूल्यांकन के लिए बहुत जरूरी है।
- कॉपियों की ब्लाइंड चेकिंग व सरसरी जांच का अंदेशा भी जताया गया था।
- रिपोर्ट में इस बात की कमी भी बताई गई थी कि इसमें कॉपी को अंतिम रूप से जमा करने से पहले दोबारा जांचने और सुधारने की कोई गुंजाइश नहीं है। गलतियां पाए जाने पर ऐसा कोई सिस्टम नहीं था जिससे अतिरिक्त हेड एग्जामिनर (AHEs) को जवाबों की कॉपियां मूल्यांकन करने वालों को वापस भेजने का मौका मिले।
- हेड एग्जामिनर अपनी पसंद की जवाबों की कॉपियों को दोबारा नहीं जांच पा रहे थे, क्योंकि एप्लीकेशन अपने आप ही कॉपियां बांट देता था, जिससे प्रभावी निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में रुकावट आती थी।
- रिपोर्ट में दर्ज दो खास बातें गड़बड़ी को साफ तौर पर दिखाती हैं
- जांच के बाद भी AHE को टिप्पणियां दिखाई नहीं देना।
- पोर्टल पर किए गए बदलावों को देखने का कोई इंतजाम न होना।"
तकनीकी कमियों ने इस समस्या को और भी बढ़ा दिया। रिपोर्ट में स्टेप वाइज मार्किंग के दौरान सुस्ती, ऑटो-सेव न होना, प्रश्न पत्रों और मार्किंग स्कीम को एक साथ न देख पाना, छात्रों द्वारा लिखित उत्तरों का डिजिटल रूप से दर्ज किए गए अंकों के पीछे छिप जाना, विषय-कोड में गड़बड़ियां और अधूरे उत्तरों के लिए प्रश्न-अंक ग्रेडिंग का कोई प्रावधान न होना जैसी कमियों को उजागर किया गया।
- इसमें मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा अतिरिक्त आंसशीट चेक करने में अनिच्छा भी बताई गई।
- रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई कि लंबे उत्तरों को तार्किक भागों में विभाजित नहीं किया गया था, जिससे विसंगति और थकान की संभावना बढ़ जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQ) में क्या कहा गया
छात्रों द्वारा अंकों को लेकर बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर CBSE का 18 मई का FAQ दस्तावेज, जिसका शीर्षक 'OSM के बारे में जानें' था, जारी किया गया था। FAQ में कहा गया कि सेव विकल्प जोड़ा गया है, अंक हटाने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है और लिखित सामग्री को छिपाने वाले अंकों की समस्या को ठीक कर दिया गया है। इसमें यह भी कहा गया कि उच्च क्षमता वाले सर्वरों का उपयोग करके नेट स्पीड की समस्याओं का समाधान कर दिया गया है। ड्राई-रन रिपोर्ट में इन सभी कमियों को उजागर किया गया था।
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