CBSE OSM : ऑनस्क्रीन मार्किंग की तारीफ में रीलें बनाओ, बचाव करो, सीबीएसई ने स्कूलों को भेजी स्क्रिप्ट

Pankaj Vijay हिन्दुस्तान टाइम्स, संजय मौर्य, नई दिल्ली
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एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक डैमेज कंट्रोल करने के लिए CBSE क्षेत्रीय कार्यालयों ने स्कूल प्रिंसिपलों को एक सोशल मीडिया टूलकिट भेजी है। निर्देश दिया गया था कि वे सोशल मीडिया पर बोर्ड के विवादित ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का बचाव करें।

CBSE OSM : ऑनस्क्रीन मार्किंग की तारीफ में रीलें बनाओ, बचाव करो, सीबीएसई ने स्कूलों को भेजी स्क्रिप्ट

ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) की खामियां सामने आने के बाद चौतरफा घिरा सीबीएसई बोर्ड इसे सुधारने के बजाय इसका बचाव करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। ओएमएम सिस्टम को लेकर उठे विवाद के बीच एक नया विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि डैमेज कंट्रोल करने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के क्षेत्रीय कार्यालयों ने इस सप्ताह स्कूल प्रिंसिपलों को एक सोशल मीडिया टूलकिट भेजी है। इसमें उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे सोशल मीडिया पर बोर्ड के विवादित ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का बचाव करें। हिन्दुस्तान टाइम्स को पता चला है कि इसके बाद सैकड़ों स्कूलों ने जिनमें सरकारी केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय भी शामिल हैं, ऐसे वीडियो पोस्ट किए जिनमें उन्हीं बातों को दोहराया गया था। वीडियो में ये स्कूल ओएसएम सिस्टम का बचाव कर रहे हैं और उसकी तारीफ कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक एचटी ने एक डॉक्यूमेंट देखा है जिसका शीर्षक था 'प्रिंसिपलों के लिए सामग्री' (Material for Principals)। इसमें इस बात की स्क्रिप्ट लिखी थी कि उन्हें क्या बोलना है। एक जगह इसमें प्रिंसिपलों से कहा गया था कि वे बोर्ड को इन शुरुआती दिक्कतों को लेकर बहुत ज्यादा एक्टिव, संवेदनशील और बातचीत करने वाला बताएं।

प्रिंसिपलों के लिए इसमें एक बात यह भी लिखी थी: "जब भी इतने बड़े पैमाने पर कोई नई टेक्नोलॉजी लागू की जाती है, तो उसे लागू करने में कुछ छोटी-मोटी दिक्कतें आती हैं, जिनसे चिंता हो सकती है... कृपया घबराएं नहीं। मैं हर छात्र और अभिभावक को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि किसी भी बच्चे को किसी भी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।'

प्रिंसिपलों से यह भी कहा गया था कि वे छात्रों को बताएं कि अगर उन्हें अपने प्रदर्शन और डिजिटल शीट पर दिख रहे नतीजों में कोई अंतर दिखता है, तो उन्हें सीबीएसई की आधिकारिक री-इवैल्यूएशन' प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो

सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें छात्र और प्रिंसिपल उन्हीं बातों को दोहराते हुए दिखे, जो उस भेजे गए डॉक्यूमेंट में लिखी भाषा से काफी मिलती-जुलती थीं, ऊपर दिया गया कोट भी इसी में शामिल है। वायरल वीडियो में से ज्यादातर इंस्टाग्राम रील्स थे।

सभी प्रिंसिपलों ने CBSE के निर्देश नहीं माने

लेकिन सभी प्रिंसिपलों ने ऐसा नहीं किया। दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल के प्रिंसिपल ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'मैंने देखा कि Instagram पर ऐसे प्रिंसिपलों के वीडियो की बाढ़ आ गई है जो CBSE और OSM प्रक्रिया का समर्थन कर रहे हैं, जबकि उन्हें अच्छी तरह पता है कि इसकी वजह से छात्रों को कितनी दिक्कतें हुई हैं। 'प्रिंसिपलों के लिए सामग्री' वाला डॉक्यूमेंट मुझे हमारे रीजनल ऑफिस के प्रमुख ने भेजा था। लेकिन मुझे लगता है कि हमें छात्रों की चिंताओं, तनाव और तकलीफो को आवाज देनी चाहिए, क्योंकि उनके करियर दांव पर लगे हैं। इसलिए मैंने CBSE की OSM प्रक्रिया के समर्थन में कोई वीडियो नहीं बनाया।"

केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों ने OSM के समर्थन में पोस्ट डाले

जिन संस्थानों ने वीडियो पोस्ट किए, उनमें केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय प्रमुख थे। ये दोनों ही शिक्षा मंत्रालय के तहत केंद्र सरकार द्वारा चलाए जाते हैं। केंद्रीय विद्यालय नंबर 1, एयर फोर्स स्टेशन गोरखपुर द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में कक्षा 12 का एक छात्र इस सिस्टम का बचाव करते हुए दिख रहा है। छात्र कहता है- 'मैं अपने उन अंकों से संतुष्ट हूं जो मुझे सभी विषयों में मिले हैं। छात्रों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, वह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि हर साल छात्रों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मुझे नहीं लगता कि OSM कोई समस्या है।'

प्रिंसिपल बैरिस्टर पांडे ने एचटी को बताया कि वीडियो स्कूल के अपने फैसले को दिखाता है। पांडे ने कहा, 'छात्र इस विवाद में अपनी राय साझा कर सकते हैं और यह हमारे स्कूल स्टाफ का फैसला था कि हमें सोशल मीडिया पर OSM के बारे में अपने छात्रों की राय पोस्ट करनी चाहिए,' उन्होंने इस बात से इनकार किया कि स्कूल ने टूलकिट का पालन किया।

जवाहर नवोदय विद्यालय जाजपुर द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में प्रिंसिपल-इन-चार्ज अभिमन्यु भट्ट इस सिस्टम का बचाव करते हुए दिखाई देते हैं। भट्ट कहते हैं, 'OSM, CBSE की एक बहुत अच्छी पहल है, उत्तरों का सही मूल्यांकन किया गया है... शिक्षकों को हर एक चीज पढ़ने के लिए काफी समय मिला। आने वाले वर्षों में कक्षा 10वीं के छात्रों को भी OSM से फायदा होना चाहिए।' वे स्क्रिप्ट के मुख्य बिंदुओं को ही दोहराते हैं।

दिल्ली पब्लिक स्कूल सिलीगुड़ी की प्रिंसिपल अनीषा शर्मा ने एक वीडियो में कहा कि OSM को “एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शुरू किया गया था, यह ध्यान में रखते हुए कि मूल्यांकन निष्पक्ष, सटीक, तेज और पारदर्शी होगा'। उन्होंने भी ठीक उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल किया जो उस दस्तावेज में लिखे थे।

'प्रिंसिपलों के लिए सामग्री' नामक दस्तावेज में कहा गया है- 'शैक्षणिक दृष्टिकोण से, OSM सिस्टम ने हमारे मूल्यांकन की संरचनात्मक अखंडता में मौलिक सुधार किया है, यह हमारे कॉपी चेक करने वाले टीचरों को कैलकुलेशन के बजाय पूरी तरह से कॉन्टेंट पर ध्यान केंद्रित करने की राह देता है।'

CBSE की प्रतिक्रिया

CBSE के एक प्रवक्ता ने इन आरोपों व विवाद का कोई जवाब नहीं दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमने किसी को भी हमारे पक्ष में कोई वीडियो पोस्ट करने का निर्देश नहीं दिया था।”

4 लाख से ज्यादा आवेदन

26 मई तक कक्षा 12 की परीक्षा में बैठने वाले लगभग 18 लाख छात्रों में से लगभग हर चार में से एक छात्र ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की हुई आंसरशीट मांगी । पिछले वर्ष की तुलना में आवेदनों में 208% से अधिक की वृद्धि हुई है। CBSE ने इस भारी इजाफे का जिम्मेदार फीस में कटौती को दिया है। विरोध के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं की आंसरशीट देखने की फीस को ₹700 से घटाकर सिर्फ ₹100 कर दिया था।

OSM को लेकर विवाद

सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट 13 मई 2026 को जारी किया गया था। 12वीं का रिजल्ट पिछले साल 88.39% से घटकर 85.20% पर आ गया है। लगभग 98 लाख कॉपियां इस बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) के जरिए चेक हुई थीं, जबकि 13000 कॉपियां मैन्युअल तरीके से चेक हुई थीं। सीबीएसई 12वीं बोर्ड रिजल्ट के बाद कई स्टूडेंट और उनके पेरेंट्स ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाया है। उन्होंने शिकायत की कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM की वजह से 12वीं में स्टूडेंट्स के काफी कम नंबर आए।

स्कैन कॉपी सामने आने के बाद हो गया बवाल

स्कैन कॉपी हाथ में आने के बाद विद्यार्थियों ने ओएसएम सिस्टम में कई खामियां गिनाईं और दावा किया कि उनके अधिक नंबर बन रहे हैं। वेदांत मामला सामने आने के बाद भी आवेदन बढ़ने के आसार हैं। किसी ने आंसरशीट बदलने के, किसी ने स्टेप वाइज मार्किंग न होने तो किसी ने एमसीक्यू में बेवजह नंबर काटे जाने के दावे किए हैं।

फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथ्स जैसे विषयों में अपेक्षा से कम नंबर आने की शिकायतों के बीच सीबीएसई ने छात्रों को री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का मौका देने की घोषणा की थी।

ऐसे काम करता है सीबीएसई का ओएसएम सिस्टम

- सबसे पहले विद्यार्थियों की आंसरशीट स्कैन की जाती है।

- आंसरशीट को सुरक्षित सर्वर पर अपलोड कर दिया जाता है

- टीचर कहीं से भी आंसरशीट चेक करता है

- स्क्रीन पर आंसरशीट चेक करने के बाद शिक्षक उसे स्क्रीन पर ही मार्क्स देता है

- सिस्टम अपने आप नंबर जोड़ लेता है। टोटलिंग में गलती नहीं होती।

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

Pankaj Vijay

पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


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