CBSE : मार्क्स टोटलिंग में गड़बड़ी, छात्रों की शिकायत पर CBSE ने बताया ओवर अटेम्प्ट प्रश्न पर अंक जोड़ने का नियम
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि अगर छात्र ने जरूरत से ज्यादा प्रश्न हल किए हैं, तो चेकिंग में उसके बेहतर अंक ही जोड़े जाते हैं और अतिरिक्त उत्तरों को ओवर अटेम्प्ट के रूप में मार्क किया जाता है।

सीबीएसई यानी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वीं की आंसरशीट में टोटलिंग को लेकर की जा रही शिकायतों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। दरअसल बहुत से छात्रों ने आंसरशीट मिलने के बाद टोटल में गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि सवाल दर सवाल उन्होंने जो अंक जोड़े थे, वे उन्हें मिले कुल अंकों से मेल नहीं खा रहे हैं। छात्रों ने आंसरशीट में मौजूद कैलकुलेशन शीट और कुल मिले मार्क्स के बीच अंतर देखा। कुल अंकों में हुई गड़बड़ी के बारे में स्थिति साफ करते हुए बोर्ड ने कहा कि प्रश्नपत्रों में छात्रों को सवालों के जवाब देते समय चुनने के लिए कई इंटरनल चॉइस (आंतरिक विकल्प) दिए जाते हैं। कई बार छात्र जरूरी संख्या से ज्यादा सवालों के जवाब दे देते हैं।
सीबीएसई ने अब साफ किया है कि क्योंकि क्वेश्चन पेपर में कई इंटरनल चॉइस (अंदरूनी विकल्प) दी जाती हैं, इसलिए छात्र जरूरी संख्या से अधिक सवालों के जवाब देते हैं। पॉलिसी के तौर पर सीबीएसई हमेशा छात्रों को मिले सबसे अच्छे मार्क्स को ही लेता है और दूसरे हल किए गए सवाल/सबपार्ट को 'ओवर अटेम्प्ट' के तौर पर दिखाता है। ऐसे मामलों में सिस्टम रिजल्ट कैलकुलेट करने के लिए दोनों मार्क्स में से बेहतर मार्क्स को ध्यान में रखता है। जिन मार्क्स को कंसीडर नहीं किया गया, उन्हें स्टार मार्क (*) के साथ दिखाया गया है। छात्रों को मार्किंग सिस्टम समझाने के लिए बोर्ड ने एक उदाहरण भी शेयर किया है जो ऑफिशियल नोटिस पर उपलब्ध है।
आंसर बुक की मिली स्कैन कॉपी में देखी गई दिक्कतों के वेरिफिकेशन और जवाबों के री-इवैल्यूएशन (दोबारा जांच) के लिए अप्लाई करने का पोर्टल 2 जून को एक्टिव हो गया है और 6 जून, 2026 को बंद हो जाएगा। इस सुविधा का फायदा सिर्फ वही छात्र उठा सकते हैं जिन्हें अपनी जांची हुई आंसरशीट की स्कैन कॉपी मिली है।
मिली स्कैन कॉपी में देखी गई दिक्कतों के वेरिफिकेशन के लिए फीस स्ट्रक्चर 100/- रुपये प्रति आंसर बुक है और री-इवैल्यूएशन के लिए 25/- प्रति सवाल है। फीस का पेमेंट सिर्फ ऑनलाइन जैसे UPI, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से किया जा सकता है।
छात्र आंसर बुक की मिली स्कैन कॉपी में देखी गई दिक्कतों के समाधान के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं, जिसमें छूटे हुए पेज, छूटी हुई सप्लीमेंट्री शीट, छूटे हुए मैप/ग्राफ, धुंधले पेज, गलत आंसर बुक, या अलग सेट के आधार पर इवैल्यूएशन जैसी दिक्कतें शामिल हैं। छात्र एक या ज़्यादा सब्जेक्ट्स में एक या अधिक सवालों के री-इवैल्यूएशन के लिए भी ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं, जिसके लिए उन्हें जरूरी जानकारी देनी होगी, जैसे सवाल नंबर और पेज नंबर, जैसा भी मामला हो। सीबीएसई ने छात्रों को निर्देश दिया है कि वे दिक्कतों के वेरिफिकेशन/री-इवैल्यूएशन के लिए सिर्फ एक-एक एप्लीकेशन जमा करें।
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Pankaj Vijayपंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
15 से अधिक सालों का अनुभव
पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।
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भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।
विजन
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विशेषज्ञता
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