
CBSE Exams : कौन दे सकेगा सीबीएसई 10वीं 12वीं परीक्षा, एडिश्नल विषय, इंटरनल असेसमेंट व हाजिरी पर नियम तय
सीबीएसई ने अतिरिक्त विषयों पर भी नियम तय किए हैं। कक्षा 10वीं में छात्र अधिकतम दो अतिरिक्त विषय ले सकते हैं, जबकि 12वीं में केवल एक अतिरिक्त विषय की अनुमति है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने की योग्यता को लेकर नए नियम कायदे तय किए हैं। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परीक्षा में वही छात्र शामिल हो सकेंगे जो इन जरूरी शर्तों को पूरा करेंगे। बोर्ड ने परीक्षा में बैठने के लिए न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। बोर्ड ने कहा कि सभी विषयों में आंतरिक मूल्यांकन अब परीक्षा का अभिन्न हिस्सा है। यदि कोई छात्र स्कूल नहीं जाता है तो उसका आंतरिक मूल्यांकन संभव नहीं होगा और उसका परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा। बोर्ड ने नई शिक्षा नीति का हवाला देते हुए कहा है कि आंतरिक मूल्यांकन बोर्ड परीक्षा का अनिवार्य हिस्सा है। अगर कोई विद्यार्थी रेगुलर स्कूल नहीं आता है तो वह आंतरिक मूल्यांकन में शामिल नहीं हो सकेगा और ऐसे विद्यार्थियों का परिणाम नहीं घोषित किया जाएगा। इन्हें एसेंशियल रिपीट श्रेणी में रखा जाएगा। दूसरे वर्ष इन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी।

एडिश्नल विषयों पर पाबंदियां
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि दसवीं में छात्र पांच अनिवार्य विषयों के अलावा दो अतिरिक्त विषय ही ले सकते हैं। 12वीं में केवल एक अतिरिक्त विषय लेने की अनुमति होगी। अतिरिक्त विषय का अध्ययन छात्रों को दो सालों तक करना होगा। यानी दसवीं के लिए नौवीं और दसवीं तक, तो 12वीं के लिए 11वीं और 12वीं तक अध्ययन करना होगा। तभी बोर्ड परीक्षा में इसे लेने की अनुमति मिलेगी। बोर्ड ने यह भी कहा है कि अगर किसी स्कूल ने सीबीएसई से किसी विशिष्ट विषय को पढ़ाने की मंजूरी नहीं ली तो बोर्ड परीक्षा के लिए विद्यार्थी उस विषय को नहीं चुन सकेंगे।
यदि स्कूल में शिक्षक उपलब्ध न हों तो एडिश्नल विषय नहीं
जिन स्कूलों में सीबीएसई की स्वीकृति या पर्याप्त शिक्षक, लैब्स या सुविधाएं नहीं हैं, वे एडिश्नल विषय नहीं दे सकते। कोई रेगुलर छात्र जो अपने अंतिम वर्ष में किसी अतिरिक्त विषय में फेल रहा हो और उसे कम्पार्टमेंट या एसेंशियल रीपीट श्रेणी में रखा गया हो, वह उसी श्रेणी के अंतर्गत निजी परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दे सकता है। निजी छात्र को परीक्षा देने के लिए किसी स्कूल से संबद्ध होने की आवश्यकता नहीं है, वे स्व-अध्ययन करके परीक्षा दे सकते हैं।





