
CBSE : लाखों छात्रों को राहत, सीबीएसई 10वीं 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए अपार अनिवार्यता में आंशिक छूट
सीबीएसई 10वीं 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए अपार अनिवार्यता में आंशिक छूट दी गई है। बोर्ड के निर्णय से लाखों विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। वे परीक्षा से वंचित नहीं होंगे। बोर्ड से संबद्ध विद्यालय और एसोसिएशन छूट की लगातार मांग कर रहे थे।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं हेतु उम्मीदवारों की सूची (एलओसी) भरने की प्रक्रिया में अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट अकादमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी को लिंक करने की अनिवार्यता में आंशिक छूट प्रदान की है। बोर्ड के इस निर्णय से लाखों छात्रों को परीक्षा से वंचित होने से राहत मिल सकेगी। बोर्ड ने कहा है कि यदि किसी छात्र की अपार आईडी अभिभावकों की सहमति के अभाव में जनरेट नहीं हो पा रही है तो संबंधित स्कूल को अभिभावकों की लिखित असहमति की प्रति अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखनी होगी। ऐसे मामलों में एलओसी में अपार के स्थान पर ‘इनकार’ शब्द दर्ज करना होगा। यदि किसी अन्य कारण से अपार जनरेट नहीं हो पा रही है तो एलओसी में ‘नोजेन’ अंकित करना होगा।
बोर्ड ने पत्र किया जारी
सीबीएसई ने पत्र जारी कर कहा है कि अपार आईडी, ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ पहल का हिस्सा है। जो पारदर्शिता, जवाबदेही और शैक्षणिक गतिशीलता सुनिश्चित करती है। हालांकि, स्कूलों ने विभिन्न पोर्टलों के एकीकरण में कठिनाई, स्कूल और आधार रिकॉर्ड में छात्रों के डेटा में अंतर, सुधार की प्रक्रिया में लगने वाला समय और अभिभावकों की सहमति की कमी जैसी चुनौतियों से अवगत कराया। जिसे ध्यान में रखते हुए स्कूलों को आंशिक छूट दी गई है।
बता दें कि चेयरमैन डीके सिंह की नेतृत्व वाली बिहार पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने भी इस मांग को उठाते हुए लगातार सीबीएसई को मेल किया था। अब स्कूलों को छूट देने के बाद एसोसिएशन के चेयरमैन डीके सिंह और सचिव प्रेम रंजन ने सीबीएसई और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को धन्यवाद दिया।
राज्य सरकार के स्कूलों में सर्वाधिक बने अपार
राज्य सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले 1,09,76,362 बच्चों का अपार कार्ड बन चुका है। वहीं, केंद्र सरकार के स्कूलों के केवल 2270 विद्यार्थियों का ही कार्ड बना है। इन सभी विद्यार्थियों का अपार कार्ड ‘डिजिलॉकर’ में भी अपलोड कर दिया गया है। इससे छात्रों के अकादमिक दस्तावेजों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित होगा और उन्हें कहीं से भी, कभी भी इन तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी।
इन श्रेणी के स्कूलों में नामांकित बच्चों के बने अपार
- राज्य सरकार के स्कूल : 1,09,76,362 बच्चे
- केन्द्र सरकार के स्कूल : 2270 बच्चे
- सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल : 57962 बच्चे
- निजी और अन्य स्कूल : 1175191 बच्चे
1.22 करोड़ बच्चों का अपार बना
राज्य के विभिन्न स्कूलों में पढ़ रहे करीब 1.22 करोड़ बच्चों का अपार कार्ड बन चुका है। अब इन बच्चों को शैक्षणिक दस्तावेजों और प्रमाण पत्र के खोने का डर नहीं रहेगा। बच्चे अपार के तहत मिले यूनिक नंबर से अपना सारा रिकॉर्ड निकाल सकेंगे। अपार कार्ड पर इन बच्चों के सारे शैक्षणिक रिकॉर्ड और प्रमाण पत्र एक ही जगह डिजिटली दर्ज होंगे। साथ ही भविष्य में कही साक्षात्कार, फॉर्म भरने आदि में बच्चों को सारे दस्तावेज नहीं ढोने पड़ेंगे। अपार नंबर दर्ज कर एक क्लिक में सारे रिकॉर्ड निकाल सकते हैं।





