फिजिक्स-मैथ्स ने बिगाड़ा खेल, CBSE 12वीं में साइंस वालों के नंबर क्यों गिरे?
सीबीएसई कक्षा 12 रिजल्ट 2026 में फिजिक्स, मैथ्स, केमिस्ट्री और अकाउंटेंसी जैसे विषयों में ए1 कटऑफ घटा है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग को लेकर छात्रों की शिकायतों के बीच बोर्ड ने पहली बार विस्तृत आंकड़े जारी किए।

13 मई को सीबीएसई कक्षा 12 का रिजल्ट जारी होने के बाद हजारों छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपने नंबरों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। सबसे ज्यादा नाराजगी साइंस स्ट्रीम के छात्रों में दिखी, खासकर गणित, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान जैसे विषयों को लेकर। कई छात्रों का कहना था कि उन्होंने अच्छे जवाब लिखे थे लेकिन उम्मीद से बहुत कम अंक मिले। कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि जेईई मेन में 95 या 99 परसेंटाइल तक लाने वाले विद्यार्थियों को भी बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत से कम अंक मिले। इसके बाद पहली बार लागू हुई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे। छात्रों का कहना था कि कॉपियों की स्कैन क्वालिटी खराब होने से मूल्यांकन प्रभावित हुआ हो सकता है।
बोर्ड ने क्या कहा?
17 मई को आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में सीबीएसई ने माना कि इस साल कई विषयों में औसत अंक और पास प्रतिशत में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने बताया कि भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित और अकाउंटेंसी जैसे विषयों में कटऑफ 1 से 3 अंक तक नीचे आए हैं। बोर्ड का कहना है कि इस बार मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा तैयार मार्किंग स्कीम के अनुसार किया गया, जिसमें रटकर लिखने या शॉर्टकट के बजाय विषय की असली समझ को ज्यादा महत्व दिया गया। सीबीएसई ने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और समान रही है तथा छात्रों को पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन का विकल्प भी दिया गया है।
साइंस स्ट्रीम में सबसे ज्यादा असर
सीबीएसई द्वारा जारी तीन साल के आंकड़ों में सबसे बड़ा बदलाव साइंस स्ट्रीम में दिखाई दिया। गणित में ए1 ग्रेड की शुरुआत इस बार 85 अंक से हुई, जबकि 2025 में यह 86 और 2024 में 88 अंक थी। भौतिक विज्ञान में गिरावट और ज्यादा तेज रही। 2026 में ए1 ग्रेड पाने के लिए 79 अंक जरूरी रहे, जबकि 2025 में यह सीमा 82 और 2024 में 84 अंक थी। इसका मतलब साफ है कि इस बार भौतिक विज्ञान में छात्रों के औसत अंक कम आए। रसायन विज्ञान में भी यही रुझान दिखा। ए1 कटऑफ 2024 में 92 था जो 2026 में घटकर 87 तक पहुंच गया। हालांकि जीव विज्ञान में स्थिति लगभग स्थिर रही और ए1 कटऑफ लगातार 91 पर बना रहा।
कॉमर्स स्ट्रीम के अकाउंटेंसी में सबसे बड़ा बदलाव
कॉमर्स स्ट्रीम में भी कटऑफ में गिरावट देखी गई, लेकिन सबसे ज्यादा असर अकाउंटेंसी विषय में दिखाई दिया। 2024 में जहां ए1 ग्रेड 93 अंक से शुरू होता था, वहीं 2026 में यह घटकर 89 पर आ गया। अर्थशास्त्र में भी ए1 कटऑफ 91 से घटकर 89 हुआ। वहीं बिजनेस स्टडीज में ए1 सीमा 91 से गिरकर 90 पर पहुंची। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन लगातार दूसरे साल नीचे जाते आंकड़े छात्रों और शिक्षकों दोनों का ध्यान खींच रहे हैं।
ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम की तस्वीर लगभग स्थिर रही
ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा। इतिहास में ए1 कटऑफ 86 से बढ़कर 87 हुआ जबकि राजनीति विज्ञान में भी हल्का सुधार देखा गया। राजनीति विज्ञान का ए1 कटऑफ 87 से बढ़कर 89 तक पहुंच गया। भूगोल लगभग स्थिर रहा और अंग्रेजी कोर में पिछले तीन सालों से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। अंग्रेजी कोर में ए1 ग्रेड लगातार 92 अंक पर बना हुआ है। इससे साफ है कि ह्यूमैनिटीज विषयों में मूल्यांकन पैटर्न ज्यादा स्थिर रहा।
आखिर छात्रों की सबसे बड़ी शिकायत क्या है?
इस साल सीबीएसई ने बड़े स्तर पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली लागू की थी। इसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल स्क्रीन पर जांचा जाता है। बोर्ड का दावा है कि इससे पारदर्शिता और समानता बढ़ती है, लेकिन छात्रों का कहना है कि कई कॉपियों की स्कैनिंग स्पष्ट नहीं थी। सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने दावा किया कि डायग्राम, रफ वर्क और हाथ से लिखे गए स्टेप ठीक से दिखाई नहीं दे रहे थे। खासकर गणित और भौतिक विज्ञान जैसे विषयों में स्टेप मार्किंग बहुत अहम होती है, इसलिए छात्रों को डर है कि उनके कई सही स्टेप को नजरअंदाज कर दिया गया होगा।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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