पहले मार्कशीट में नंबर नहीं, अब CBSE री-इवैल्यूएशन में एक कॉपी ही गायब; 81 फीसदी पाने वाले छात्र का दावा
दिल्ली में सीबीएसई 12वीं के छात्र तनिष्क को पहले खाली मार्कशीट मिली और अब री-इवैल्युएशन के लिए एक आंसर शीट न मिलने से एक नया विवाद सामने आ गया है।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की लापरवाही को लेकर दिल्ली के एक और छात्र ने दावा किया है। दावा किया जा रहा है कि पहले इस छात्र को पहले तो बिना नंबरों वाली पूरी तरह खाली मार्कशीट थमा दी गई। जब काफी भागदौड़ के बाद यह गलती सुधरी, तो अब पुनर्मूल्यांकन यानी री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया में एक नया रोड़ा अटक गया है। छात्र को सभी विषयों में से एक कॉपियां ही नहीं मिल पा रही हैं, जबकि आवेदन करने की आखिरी तारीख बेहद नजदीक है। बोर्ड के इस रवैये से परेशान होकर पीड़ित परिवार ने अब मीडिया के जरिए न्याय की गुहार लगाई है।
81 फीसदी नंबर लेकिन मार्कशीट पर कुछ नहीं
यह पूरा मामला दिल्ली के रहने वाले छात्र तनिष्क का है, जिसने इस साल सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा दी थी। तनिष्क ने अपनी मेहनत के दम पर परीक्षा में 81 फीसदी अंक हासिल किए हैं। लेकिन जब बोर्ड ने नतीजों का ऐलान किया और तनिष्क ने अपना रिजल्ट चेक किया, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। मार्कशीट के कॉलम में किसी भी विषय के सामने कोई नंबर ही दर्ज नहीं थे। उसकी मार्कशीट पूरी तरह से ब्लैंक यानी खाली थी। एक तरफ जहां बाकी घरों में खुशियां मनाई जा रही थीं, वहीं तनिष्क का परिवार इस तकनीकी गड़बड़ी को देखकर हैरान-परेशान हो गया।
एक हफ्ते तक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, तनिष्क के पिता सचिन इस बड़ी गड़बड़ी को देखने के बाद वे तुरंत मदद के लिए भागे। सचिन करीब एक हफ्ते तक लगातार बेटे के स्कूल के चक्कर काटते रहे ताकि कोई रास्ता निकल सके। स्कूल से बात न बनने पर उन्होंने सीधे सीबीएसई के आला अधिकारियों से संपर्क किया। सचिन का आरोप है कि इतने गंभीर मामले पर भी बोर्ड के अधिकारियों का रवैया ढुलमुल रहा और उन्हें शुरुआत में कोई समय पर जवाब या मदद नहीं मिली। उन्होंने कहा, "हमने बार-बार कोशिश की, मिन्नतें कीं, लेकिन कई दिनों तक इस समस्या का कोई साफ हल नहीं निकाला गया।"
मार्कशीट सुधरी तो नया पेंच फंसा
काफी जद्दोजहद और दबाव के बाद सीबीएसई ने करीब एक हफ्ते बाद तनिष्क को सुधारी हुई नई मार्कशीट जारी की, जिसमें उसके 81 फीसदी नंबर दिख रहे थे। परिवार ने राहत की सांस ली ही थी कि उनके सामने एक और बड़ी मुसीबत आकर खड़ी हो गई। नंबरों से पूरी तरह संतुष्ट न होने के कारण परिवार ने री-इवैल्युएशन यानी दोबारा जांच के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया। नियम के मुताबिक, इसके लिए छात्र को पहले अपनी आंसर शीट की स्कैन कॉपी मांगनी होती है।
तनिष्क के पिता ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे के सभी 6 विषयों की आंसर शीट की कॉपियों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया और तय फीस भी जमा कर दी। लेकिन जब बोर्ड की तरफ से कॉपियां भेजी गईं, तो उनमें सिर्फ 5 विषयों की ही आंसर शीट शामिल थीं। एक विषय की कॉपी गायब थी। सचिन का कहना है कि इसी एक गायब आंसर शीट की वजह से उनका पूरा री-इवैल्युएशन का प्रोसेस बीच में ही अटक गया है। जब तक सभी विषयों की कॉपियां नहीं मिल जातीं, तब तक वे पूरी प्रक्रिया को पूरा नहीं कर सकते।
6 जून की डेडलाइन से तनाव बढ़ा
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता की बात समय की कमी है। सीबीएसई के नियमों के अनुसार, री-इवैल्युएशन के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख 6 जून 2026 तय की गई है। अब जब आखिरी तारीख सिर पर आ चुकी है, तो परिवार के पास समय बहुत कम बचा है। पिता सचिन ने बोर्ड से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे तुरंत इस मामले में दखल दें। उन्होंने मांग की है कि तनिष्क की छूटी हुई आंसर शीट को फौरन जारी किया जाए ताकि वह समय रहते अपने हक का इस्तेमाल कर सके और री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन कर पाए।
रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड की इस लापरवाही का सबसे बुरा असर 12वीं के छात्र तनिष्क के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा है। पिता सचिन ने बताया कि इस लंबी अनिश्चितता और सरकारी दफ्तरों की लेटलतीफी ने उनके बेटे को अंदर से तोड़ दिया है। वह काफी उदास रहने लगा है। सचिन ने कहा, "वह हर वक्त हमसे बस यही एक सवाल पूछता रहता है कि पापा, यह सब सिर्फ मेरे साथ ही क्यों हो रहा है? मैंने तो अच्छे से परीक्षा दी थी।"
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


