JEE Advanced पास, लेकिन IIT की सीट अभी नहीं पक्की; हजारों छात्रों को CBSE ने दी टेंशन

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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CBSE री-इवैल्यूएशन 2026 को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ गई है। पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं के बीच IIT प्रवेश के लिए जरूरी 75% अंकों की शर्त कई छात्रों की उम्मीदों को प्रभावित कर रही है।

JEE Advanced पास, लेकिन IIT की सीट अभी नहीं पक्की; हजारों छात्रों को CBSE ने दी टेंशन

देशभर में हजारों छात्र इन दिनों सिर्फ अपने JEE Advanced रैंक या JoSAA काउंसलिंग पर ही नजर नहीं रखे हुए हैं, बल्कि CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर भी लगातार निगाह बनाए हुए हैं। वजह साफ है। कई ऐसे छात्र हैं जो IIT में दाखिले के बेहद करीब हैं, लेकिन उनके लिए कक्षा 12 के अंकों में मामूली बढ़ोतरी भी भविष्य बदल सकती है। ऐसे में पोर्टल पर सामने आ रही तकनीकी परेशानियों ने छात्रों की बेचैनी और बढ़ा दी है। CBSE की ऑनलाइन मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया से जुड़ी समस्याएं साझा की हैं।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई छात्रों का दावा है कि वे पोर्टल तक पहुंत बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन समस्या आ रही है। एक छात्रा सना नाज ने बताया कि वह कई दिनों से लॉगिन अनुरोध भेज रही हैं, लेकिन पोर्टल तक पहुंच नहीं पा रही हैं। उनका दावा है कि आधार के जरिए लॉगिन करने पर भी "इनवैलिड क्रेडेंशियल्स" का संदेश दिखाई दे रहा है। वहीं कुछ अन्य छात्रों ने शिकायत की कि स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं खुल नहीं रहीं और स्क्रीन पर "403 एरर" दिखाई दे रहा है। कई छात्रों ने यह भी कहा कि सही जानकारी भरने के बावजूद पोर्टल बार-बार "वेरिफिकेशन फेल्ड" का संदेश दिखा रहा है। इन शिकायतों पर CBSE ने छात्रों से सीधे संपर्क करने और उनकी समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया है।

सीबीएलई पोर्टल झेल रहा साइबर हमले की चुनौती

CBSE के मुताबिक 3 जून रात 9:30 बजे तक री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन पोर्टल पर 56 हजार से ज्यादा आवेदन प्राप्त हो चुके थे। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के एक साथ पोर्टल इस्तेमाल करने से तकनीकी दबाव भी बढ़ा है। बोर्ड ने यह भी जानकारी दी कि उसकी वेबसाइट पर करोड़ों डेटा पैकेट वाले डिनायल-ऑफ-सर्विस (DDoS) हमले की कोशिश हुई थी, जिसे तकनीकी टीम ने सफलतापूर्वक विफल कर दिया। बोर्ड का कहना है कि विशेषज्ञ लगातार सिस्टम की निगरानी कर रहे हैं और छात्रों को बेहतर अनुभव देने के लिए सुधार किए जा रहे हैं।

JEE Advanced छात्रों के लिए क्यों अहम है यह प्रक्रिया?

इस साल री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है जब JoSAA 2026 काउंसलिंग भी शुरू हो चुकी है। IIT में प्रवेश पाने के इच्छुक सभी JEE Advanced सफल अभ्यर्थियों को JoSAA पोर्टल पर पंजीकरण और चॉइस फिलिंग करनी होती है। ऐसे में जिन छात्रों को लगता है कि उनके CBSE अंकों में गलती हुई है या अपेक्षा से कम अंक मिले हैं, वे री-इवैल्यूएशन के जरिए अपने अंकों में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। अगर संशोधित परिणाम समय पर आते हैं और अंक बढ़ते हैं तो कई छात्रों की IIT में प्रवेश की राह आसान हो सकती है।

IIT में दाखिले के लिए सिर्फ JEE Advanced पास करना काफी नहीं

कई छात्र यह मान लेते हैं कि JEE Advanced निकाल लेने के बाद IIT की सीट लगभग तय हो जाती है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। IIT में प्रवेश के लिए JEE Advanced के साथ-साथ कक्षा 12 की पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होती हैं। उम्मीदवार को भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित विषयों के साथ कम से कम 75 प्रतिशत कुल अंक हासिल करने होते हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 65 प्रतिशत है। कुल प्रतिशत की गणना पांच विषयों के आधार पर की जाती है। इनमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, सबसे अधिक अंक वाला भाषा विषय और शेष विषयों में सबसे अधिक अंक वाला एक अतिरिक्त विषय शामिल होता है।

कुछ अंकों की बढ़ोतरी बदल सकती है भविष्य

सबसे ज्यादा चिंता उन छात्रों में है जो 75 प्रतिशत की सीमा से बेहद कम अंतर से पीछे रह गए हैं। ऐसे छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन केवल अंक बढ़ाने की प्रक्रिया नहीं बल्कि IIT में प्रवेश पाने का आखिरी मौका बन गया है। यदि पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढ़ते हैं तो कई छात्र IIT प्रवेश की पात्रता हासिल कर सकते हैं। दूसरी तरफ यदि प्रक्रिया में देरी होती है या तकनीकी समस्याएं बनी रहती हैं, तो JoSAA काउंसलिंग के दौरान छात्रों की अनिश्चितता और बढ़ सकती है। फिलहाल हजारों छात्र CBSE के अगले अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। एक तरफ JoSAA काउंसलिंग की समय-सीमा आगे बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ री-इवैल्यूएशन के परिणामों पर कई छात्रों का IIT सपना टिका हुआ है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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