CBSE 12वीं अंग्रेजी का पेपर कैसा था, सैंपल पेपर करने से होता कितना फायदा
सीबीएसई 12वीं बोर्ड का अंग्रेजी का पेपर छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है; विशेषज्ञों के अनुसार सैंपल पेपर हल करने वाले बच्चे आसानी से 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक ला सकते हैं।

भारत में बोर्ड परीक्षाओं का मौसम किसी बड़े और तनावपूर्ण त्योहार से कम नहीं होता। रातों की नींद उड़ जाती है, दिन भर किताबों के पन्ने पलटते हैं और हर छात्र के जेहन में बस एक ही कश्मकश होती है कि आखिर पेपर कैसा आएगा। 12वीं क्लास (Class 12) किसी भी छात्र के करियर की सबसे अहम सीढ़ी होती है, और इस सीढ़ी का एक बड़ा पड़ाव 'अंग्रेजी' (English) का विषय है। अक्सर छात्रों को लगता है कि अंग्रेजी में नंबर कट जाते हैं या पेपर बहुत लेंदी (lengthy) आ जाता है। लेकिन आज, 12 मार्च 2026 को जब सीबीएसई (CBSE) 12वीं के छात्र अंग्रेजी का पेपर देकर परीक्षा हॉल से बाहर निकले, तो उनके चेहरों पर एक बड़ी सी मुस्कान और सुकून की लहर थी।
आज का पेपर न सिर्फ सिलेबस के दायरे में था, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं था जिन्होंने अपनी तैयारी में थोड़ी सी भी समझदारी दिखाई है। देश भर के नामी शिक्षकों और विशेषज्ञों ने इस पेपर का गहराई से विश्लेषण (Analysis) किया है। उनका साफ तौर पर मानना है कि जिन छात्रों ने सैंपल पेपर्स (Sample Papers) की अच्छी प्रैक्टिस की थी, वे आसानी से 90 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल कर सकते हैं। आइए, पूरे पेपर के इस शानदार विश्लेषण को तफ्सील से समझते हैं।
रट्टाफिकेशन नहीं, समझ की हुई असली परीक्षा
एनडीटीवी की रिपोर्ट की मानें तो मॉडर्न पब्लिक स्कूल, शालीमार बाग की प्रिंसिपल डॉ. अलका कपूर ने पेपर का बारीकी से विश्लेषण करते हुए इसे एक बेहद संतुलित (well-balanced) प्रश्न पत्र करार दिया है। उन्होंने बताया कि इस बार का पेपर इस तरह से सेट किया गया था कि वह विषय पर छात्र की असली पकड़ का आकलन कर सके।
उन्होंने बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) की तारीफ करते हुए कहा, "एमसीक्यू पूरी तरह से 'योग्यता-आधारित' (competency-based) थे। इनमें सिर्फ रटी-रटाई बातों को याद करने के बजाय छात्रों की समझ और उसे लागू करने (application skills) की क्षमता को परखा गया।" डॉ. कपूर के मुताबिक, ज्यादातर सवाल विश्लेषणात्मक (analytical) प्रकृति के थे, जो छात्रों को आलोचनात्मक (critically) रूप से सोचने और कंटेंट को सही ढंग से समझने के लिए प्रेरित कर रहे थे। कुल मिलाकर पेपर ने ज्ञान, समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता के बीच एक बेहतरीन तालमेल बनाए रखा।
सैंपल पेपर साबित हुआ 'ब्रह्मास्त्र': जैन इंटरनेशनल की विशेषज्ञ का विश्लेषण
बेंगलुरु के जैन इंटरनेशनल रेजिडेंशियल स्कूल (JIRS) में अंग्रेजी की पीजीटी (PGT) शिक्षिका खुशबू आर्या ने जो बातें कही हैं, वो हर छात्र का हौसला बढ़ाने वाली हैं। उनके अनुसार, "जिस भी छात्र ने सीबीएसई की वेबसाइट पर मौजूद सैंपल क्वेश्चन पेपर्स की प्रैक्टिस की है, उसके लिए यह पेपर बेहद आसान था।" उन्होंने दावा किया कि पूरी तैयारी करने वाले होनहार छात्र 90% से ऊपर का स्कोर ला सकते हैं, और यहां तक कि एक औसत छात्र भी 75% से ज्यादा अंक आसानी से अपनी झोली में डाल सकता है।
कैसे रहा तीनों सेट्स (Sets) का हाल
सेट 1 (Set 1) का विस्तृत हाल:
सेक्शन ए (Reading): यह खंड बिल्कुल सीबीएसई के सैंपल पेपर की तर्ज पर था और छात्रों को इसे हल करने में कोई खास परेशानी नहीं हुई।
सेक्शन बी (Writing): राइटिंग सेक्शन भी काफी आसान रहा। हालांकि, सवाल नंबर 5B (जॉब एप्लीकेशन) में एक छोटी सी गुगली फेंकी गई थी। आमतौर पर बच्चे प्रश्न में 'National Daily' लिखा देखने के आदी होते हैं और खुद से किसी अखबार का नाम गढ़ लेते हैं। लेकिन इस बार प्रश्न पत्र में ही अखबार का नाम 'The National Times' दे दिया गया था। औसत या धीमी गति से सीखने वाले छात्रों के लिए यह थोड़ा कंफ्यूज करने वाला हो सकता था। वहीं, रिपोर्ट राइटिंग में भी छात्रों को थोड़ा चौकन्ना रहना था, क्योंकि इवेंट एक दिन का नहीं, बल्कि पूरे हफ्ते (week-long) चलने वाला था। फिर भी, सवाल बहुत सीधे और आसान थे।
सेक्शन सी (Literature): 'रेफरेंस टू कॉन्टेक्स्ट' (Reference to context) वाले सवाल उन छात्रों के लिए एकदम हलवा थे, जिन्होंने सैंपल पेपर लगाए थे। साहित्य के सवाल पूरी तरह से एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों पर ही आधारित थे। 5 नंबर वाले बड़े सवाल योग्यता पर आधारित जरूर थे, लेकिन अगर किसी ने ठीक से अभ्यास किया है, तो उसके लिए यह बिल्कुल भी मुश्किल नहीं थे।
सेट 2 (Set 2) में क्या था खास?
सेट 2 का पहला हिस्सा (Section A) और राइटिंग सेक्शन (Section B) बिल्कुल सेट 1 की तरह ही आसान था। लिटरेचर के एक्सट्रैक्ट (Extracts) भी सेट 1 जैसे ही थे। हालांकि, सेट 2 में 2-अंकों वाले कुछ सवालों (Q10) ने थोड़ी चुनौती पेश की। इन सवालों को हल करने के लिए चैप्टर्स की गहरी और बारीक जानकारी होना जरूरी था। लेकिन इस सेट में भी 5 नंबर वाले सवाल काफी आसान और स्कोरिंग रहे।
सेट 3 (Set 3) का ओवरऑल रिव्यू:
सेट 3 का भी सेक्शन ए और सी लगभग पहले सेट जैसा ही था। लिटरेचर का हिस्सा भी ज्यादा अलग नहीं था। सबसे अच्छी बात यह रही कि 'इनविटेशन और रिप्लाई' (Invitation and Replies) वाले विषय में छात्रों के लिए यह पहचानना बहुत आसान था कि उन्हें 'कार्ड' लिखना है या 'लेटर'। इसमें किसी तरह का कोई उलझाव नहीं रखा गया था।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


