मिडिल ईस्ट के हालात पर CBSE का बड़ा एक्शन, 12वीं की परीक्षाएं अटकीं, बिना एग्जाम ऐसे बनेगा रिजल्ट

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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CBSE ने पश्चिम एशिया के देशों में 12वीं के छात्रों के लिए वैकल्पिक मूल्यांकन योजना जारी की है जिसमें इंटरनल असेसमेंट के आधार पर रिजल्ट तैयार होगा।

मिडिल ईस्ट के हालात पर CBSE का बड़ा एक्शन, 12वीं की परीक्षाएं अटकीं, बिना एग्जाम ऐसे बनेगा रिजल्ट

मिडिल ईस्ट के कई देशों में पढ़ने वाले CBSE 12वीं के छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। जिन छात्रों की परीक्षाएं मिडिल ईस्ट में तनाव के हालात की वजह से बीच में अटक गई थीं या पूरी नहीं हो पाई थीं उनके लिए अब बोर्ड ने एक नया रास्ता निकाल लिया है। CBSE ने शुक्रवार को एक सर्कुलर जारी कर साफ कर दिया कि ऐसे छात्रों का रिजल्ट अब एक खास वैकल्पिक मूल्यांकन योजना के जरिए तैयार किया जाएगा। गौरतलब है कि यूएई, ईरान, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में हाल के हालात के चलते कई एग्जाम या तो रद्द करने पड़े या फिर टाल दिए गए। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर रिजल्ट कैसे बनेगा और उनका साल खराब तो नहीं होगा। अब CBSE के इस फैसले ने काफी हद तक यह चिंता दूर कर दी है।

जिन छात्रों ने परीक्षा दी उनका रिजल्ट कैसे बनेगा?

CBSE ने साफ किया है कि जिन छात्रों ने अपने पेपर दे दिए हैं, उनके रिजल्ट पूरी तरह उनके असली प्रदर्शन के आधार पर ही तैयार किए जाएंगे। यानी जिन विषयों की परीक्षा हो चुकी है, वहां कोई बदलाव नहीं होगा और वही नंबर फाइनल माने जाएंगे।

जिन विषयों की परीक्षा नहीं हुई, वहां क्या होगा?

सबसे बड़ा बदलाव उन विषयों में होगा जिनकी परीक्षा नहीं हो पाई। ऐसे मामलों में बोर्ड इंटरनल असेसमेंट और प्रैक्टिकल नंबरों के आधार पर फाइनल रिजल्ट तैयार करेगा। मतलब अब स्कूलों में हुए टेस्ट और प्रैक्टिकल का रोल काफी अहम हो गया है।

मार्क्स कैलकुलेशन का तरीका समझिए

जिन विषयों में थ्योरी के 70 या 80 नंबर होते हैं, जैसे मैथ्स, इंग्लिश, हिस्ट्री और बायोलॉजी, उनमें स्कूलों को तीन तरह के इंटरनल एग्जाम के नंबर देने होंगे। इसमें क्वार्टरली एग्जाम, हाफ-ईयरली एग्जाम और प्री-बोर्ड एग्जाम शामिल हैं। इन तीनों में से जिस परीक्षा में छात्र का सबसे ज्यादा स्कोर होगा उसी को फाइनल रिजल्ट के लिए माना जाएगा। यानी छात्रों को उनके सबसे बेहतर प्रदर्शन का फायदा मिलेगा।

गौरतलब है कि इस फैसले से साफ है कि CBSE ने छात्रों के नुकसान को कम से कम रखने की कोशिश की है। बोर्ड द्वारा जारी नोटिफिकेशन में बोर्ड का कहना है कि इस योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो और पढ़ाई का सिलसिला बिना रुकावट आगे बढ़ता रहे। अगला कदम है यह है कि अब स्कूलों और बाकी संबंधित पक्षों को इस पूरी प्रक्रिया की डिटेल्स दी जाएंगी, ताकि हर छात्र का रिजल्ट सही और निष्पक्ष तरीके से तैयार किया जा सके।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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