CBSE 10th Second Board Result: 50 दिन बीते, नतीजों का अता-पता नहीं, 6 लाख से ज्यादा छात्रों को टेंशन
CBSE 10वीं के सेकंड बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट 50 दिन बाद भी नहीं आए हैं। लगभग 6.68 लाख छात्र परेशान हैं और देरी के कारण 11वीं के एडमिशन अटक गए हैं।

एक तरफ स्कूलों में नया एकेडमिक सेशन अपनी पूरी रफ्तार पकड़ चुका है, तो दूसरी तरफ करीब 6.68 लाख बच्चे अब भी अपने मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर टकटकी लगाए बैठे हैं। इंतजार है तो बस एक नोटिफिकेशन का। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के 10वीं क्लास के सेकंड बोर्ड एग्जाम को खत्म हुए लगभग 50 दिन हो चुके हैं। लेकिन रिजल्ट का अभी तक कहीं कोई नामोनिशान नहीं है। छात्र रोज सुबह इस उम्मीद के साथ उठते हैं कि शायद आज नतीजे आ जाएं, लेकिन शाम होते-होते उनके हाथ सिर्फ निराशा ही लगती है। सोशल मीडिया पोस्ट पर गौर करें तो यह देरी अब महज एक इंतजार नहीं रही, बल्कि बच्चों के लिए एक मानसिक प्रताड़ना बन चुकी है, जिसने उनके आगे की पढ़ाई और करियर पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
इस साल CBSE ने अपने एग्जामिनेशन सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार दो चरणों में बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की थीं। मकसद था बच्चों के सिर से एग्जाम का स्ट्रेस कम करना और उन्हें अपने मार्क्स सुधारने का एक और मौका देना। इसी कड़ी में 10वीं के सेकंड बोर्ड एग्जाम (यानी इंप्रूवमेंट एग्जाम) 15 मई से 21 मई के बीच कराए गए थे।
मई के मध्य में जब ये परीक्षाएं खत्म हुईं, तो बच्चों को लगा कि जून के आखिर तक नतीजे आ जाएंगे। शुरुआत में कुछ ऐसी ही खबरें भी थीं कि 30 जून तक रिजल्ट डिक्लेयर कर दिए जाएंगे। लेकिन आज जुलाई का मध्य आ चुका है और बोर्ड की तरफ से रिजल्ट की तारीख को लेकर कोई भी ऑफिशियल जानकारी या नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। बोर्ड की यह खामोशी छात्रों की बेचैनी को और बढ़ा रही है।
11वीं के एडमिशन पर मंडराया गहरा संकट
इस लेटलतीफी का सबसे बड़ा और सीधा असर बच्चों के 11वीं कक्षा के एडमिशन पर पड़ रहा है। देश भर के ज्यादातर स्कूलों में नए सेशन की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। जिन बच्चों ने फेज 1 के आधार पर एडमिशन ले लिया, उन्होंने अपनी स्ट्रीम (आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस) भी तय कर ली है। यहां तक कि कई स्कूलों में तो फर्स्ट-टर्म के एग्जाम भी पूरे हो चुके हैं।
अब ऐसे में वो छात्र खुद को बुरी तरह फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं, जिन्होंने अपने नंबर सुधारने के लिए सेकंड बोर्ड एग्जाम दिया था। अगर रिजल्ट आने में इतनी ही देर होनी थी, तो इस पूरी कवायद का फायदा ही क्या? जब मनचाहे स्कूल या स्ट्रीम में एडमिशन की सीटें ही फुल हो जाएंगी, तो ये बेहतर मार्क्स उनके किस काम आएंगे? यह वाजिब सवाल हर उस घर में गूंज रहा है, जहां कोई बच्चा अपने नतीजों का इंतजार कर रहा है।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
CBSE के इस रवैये को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर पैरेंट्स और स्टूडेंट्स का गुस्सा साफ देखने को मिल रहा है। लोग लगातार पोस्ट कर रहे हैं और बोर्ड से तीखे सवाल पूछ रहे हैं। एक हताश यूजर ने अपनी नाराजगी जताते हुए लिखा, "CBSE 10वीं के सेकंड बोर्ड एग्जाम का रिजल्ट आखिर कब जारी करेगा? ना कोई नोटिफिकेशन है, ना कोई हिंट। बच्चे मायूस होकर बार-बार बस वेबसाइट रिफ्रेश कर रहे हैं। पहले कहा गया था कि 30 जून तक नतीजे आ जाएंगे।" एक अन्य यूजर ने इस पूरी प्रक्रिया की उपयोगिता पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने पूछा, "क्या रिजल्ट में हो रही यह देरी CBSE 10वीं फेज 2 एग्जाम को पूरी तरह से बेमानी नहीं बना रही? अब तक ज्यादातर बच्चे फेज 1 के आधार पर 11वीं में एडमिशन ले चुके हैं। स्ट्रीम चुनी जा चुकी है। पहले टर्म के एग्जाम भी हो गए। अब इस फेज 2 के रिजल्ट का क्या मतलब रह गया है? कृपया समझाएं कि इन छात्रों को इतने लंबे समय तक क्यों लटका कर रखा गया है।"
एक यूजर ने लिखा, "मई के बीच में इंप्रूवमेंट बोर्ड हुआ था। अब जुलाई का मध्य आ गया है और रिजल्ट का कुछ पता नहीं। कम से कम तारीख तो बता दीजिए। बच्चे 11वीं में एडमिशन नहीं ले पा रहे हैं और स्कूलों में नया सेशन काफी पहले शुरू हो चुका है।" मामले की गंभीरता को समझाते हुए एक और यूजर ने बोर्ड की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने लिखा, "अगर आप 10वीं का रिजल्ट इतनी देर से जारी करेंगे, तो आप देश का भविष्य बर्बाद कर देंगे। कितने ही बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो चुके होंगे? आप छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बचाने के लिए बड़े-बड़े नियम तो बनाते हैं, लेकिन आपकी खुद की जिम्मेदारी और टाइमलाइन का क्या?"
आगे क्या?
यह पूरी स्थिति वाकई चिंताजनक है। एक तरफ शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ लाखों बच्चों के भविष्य को इस तरह अधर में छोड़ देना उन दावों की जमीनी हकीकत बयां करता है। अब देखना यह है कि छात्रों और उनके अभिभावकों के इस भारी दबाव के बाद क्या CBSE जल्द ही कोई कदम उठाता है, या फिर यह इंतजार अभी और लंबा खिंचने वाला है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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